आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 में भारतीय टीम की ऐतिहासिक जीत और प्रतिका रावल के चोटिल होने के बाद शेफाली वर्मा का टीम में शामिल होना भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे चर्चित फैसलों में से एक रहा है। हाल ही में, कप्तान हरमनप्रीत कौर और टीम प्रबंधन ने उस नाटकीय लम्हे के बारे में खुलासा किया है जिसने पूरे टूर्नामेंट की तस्वीर बदल दी।
30 सेकंड की वह निर्णायक मीटिंग
जब प्रतिका रावल चोटिल होकर टूर्नामेंट से बाहर हुईं, तो टीम इंडिया के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया था। हेड कोच अमोल मजूमदार ने बताया कि चोट की खबर सुनते ही उनका दिल बैठ गया था। हालांकि, टीम प्रबंधन ने घबराने के बजाय त्वरित निर्णय लिया। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने बताया कि रिप्लेसमेंट चुनने के लिए हुई मीटिंग महज 30 सेकंड की थी।
हरमनप्रीत ने कहा, “हमने जैसे ही प्रतिका के बाहर होने की पुष्टि की, हम सब एक साथ आए और सबने एक स्वर में कहा—’शेफाली, शेफाली, शेफाली’। हर कोई स्पष्ट था कि शेफाली ही इस भूमिका के लिए सबसे सही विकल्प हैं। बीसीसीआई का भरोसा और टीम का आपसी विश्वास हमें सकारात्मक ऊर्जा से भर गया था।”
क्यों चुनी गईं शेफाली वर्मा?
उपकप्तान स्मृति मंधाना ने इस चयन के पीछे के तर्क को स्पष्ट करते हुए कहा कि बड़े मैचों में ‘X-फैक्टर’ की जरूरत होती है। मंधाना ने बताया, “हमें ऐसे खिलाड़ी की जरूरत थी जिसे अंतरराष्ट्रीय अनुभव हो और जो ओपनिंग की जिम्मेदारी संभाल सके। शेफाली ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया था और वह हर तरह के गेंदबाजी आक्रमण पर हावी होने की क्षमता रखती थी। मैंने उससे यही कहा कि सेमीफाइनल और फाइनल जैसे बड़े मंचों को भी घरेलू मैच की तरह खेलो और बस मैदान का आनंद लो।”
चुनौतीपूर्ण दौर और वापसी का सफर
शेफाली वर्मा के लिए टीम से बाहर रहने का शुरुआती दौर बहुत कठिन था। शेफाली ने खुद इस पर बात करते हुए कहा, “वर्ल्ड कप टीम में जगह न मिल पाना मेरे लिए सबसे दुखद था। लोग अक्सर पूछते थे कि मैं टीम में क्यों नहीं हूं, जो और भी मुश्किल होता था। लेकिन मैंने इसे स्वीकार किया और अपने गेम पर फोकस करने का फैसला किया।”
शेफाली ने बताया कि उस दौरान उनके पिता और भाई ने उन्हें बहुत प्रेरित किया। उन्होंने खुद को एक शांत माहौल में ढाल लिया और जमकर अभ्यास किया। जब उन्हें अचानक वर्ल्ड कप के नॉकआउट मैचों के लिए कॉल आया, तो वह एक साल से टीम से बाहर थीं। शेफाली ने उस अनुभव को याद करते हुए कहा, “प्रतिका के लिए मुझे बुरा लगा, लेकिन मुझे मानसिक रूप से सेमीफाइनल के लिए तैयार होने में ज्यादा समय नहीं मिला। हालांकि, यह मौका मेरे लिए एक नई शुरुआत थी।”
शेफाली वर्मा का यह चुनाव न केवल टीम इंडिया के लिए तुरुप का इक्का साबित हुआ, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट की पहली आईसीसी ट्रॉफी जीतने में भी उनकी भूमिका निर्णायक रही।
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