
देश की राजधानी नई दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में उस समय एक बहुत बड़ा अप्रत्याशित और चौंकाने वाला मोड़ देखने को मिला, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन के तुरंत बाद कांग्रेस के ही दिग्गज सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस का रुख देखकर उनकी जमकर सराहना कर दी।
एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता और शीर्ष नेता सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाए हुए थे, वहीं दूसरी तरफ तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर द्वारा पुलिस प्रशासन की परिपक्वता और संयम की खुलेआम तारीफ किए जाने से पूरी पार्टी और विपक्षी खेमे में अचानक सन्नाटा छा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शशि थरूर का यह बयान केवल एक प्रशासनिक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक और कूटनीतिक संदेशों की एक लंबी श्रृंखला छिपी हुई है।
अपनी बेबाक बयानबाजी और स्वतंत्र विचारों के लिए जाने जाने वाले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मीडिया और सार्वजनिक मंच पर बात करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदर्शन के दौरान जिस प्रकार की संवेदनशील स्थिति पैदा हो गई थी, वहां कोई भी बड़ा हादसा या अनहोनी घट सकती थी। लेकिन दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और जवानों ने अत्यंत धैर्य, संयम और प्रशासनिक समझदारी का परिचय देते हुए पूरे मामले को बेहद ही पेशेवर तरीके से संभाला।
शशि थरूर ने कहा कि जब बड़े राजनीतिक विरोध प्रदर्शन होते हैं, तो अक्सर पुलिस बल और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है, जिससे स्थितियां नियंत्रण से बाहर चली जाती हैं। हालांकि, इस बार दिल्ली पुलिस ने किसी भी प्रकार का अनावश्यक बल प्रयोग या उकसावे वाली कार्रवाई न करके यह साबित किया कि संकट प्रबंधन (Crisis Management) में समझदारी और कानून-व्यवस्था के प्रति निष्ठा कितनी आवश्यक है। उन्होंने गृह मंत्रालय और पुलिस बल के शीर्ष अधिकारियों के इस संतुलित रवैये को लोकतांत्रिक मूल्यों के हित में बताया।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा का विषय राहुल गांधी और शशि थरूर के बयानों का विरोधाभास बना हुआ है। राहुल गांधी केंद्र सरकार और उसकी प्रशासनिक संस्थाओं पर तानाशाही और विपक्षी आवाजों को दबाने का लगातार आरोप लगा रहे थे। जंतर-मंतर और संसद भवन के आसपास हुए इस प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों को लोकतंत्र विरोधी करार दिया था।
ऐसे में राहुल गांधी के इस तीखे विरोध प्रदर्शन के ठीक बाद अपनी ही पार्टी के बड़े नेता द्वारा दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार के प्रशासनिक रवैये को ‘समझदार’ बताना कांग्रेस के लिए एक असहज करने वाली स्थिति बन गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके समर्थकों ने तुरंत शशि थरूर के इस बयान को लपक लिया है और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा है कि कांग्रेस के विवेकशील नेता भी अब समझ रहे हैं कि दिल्ली पुलिस पूरी निष्पक्षता और संवैधानिक दायरे में रहकर काम कर रही है।
यह पहली बार नहीं है जब शशि थरूर ने अपनी पार्टी के पारंपरिक स्टैंड से अलग हटकर कोई स्वतंत्र या निष्पक्ष राय रखी हो। इससे पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर वे केंद्र सरकार की सकारात्मक पहलों की खुलकर प्रशंसा कर चुके हैं।
हालांकि, राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहे किसी प्रत्यक्ष और बड़े राजनीतिक आंदोलन के दौरान इस तरह का बयान आना आने वाले समय में पार्टी के आंतरिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। दिल्ली में पुलिस प्रशासन, केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के बीच जारी इस रस्साकशी के बीच शशि थरूर के इस संतुलित और कूटनीतिक बयान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वे भारतीय राजनीति में एक अलग और स्वतंत्र शैली की छाप रखते हैं।
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