भारतीय क्रिकेट जगत में बेहद कम उम्र में अपनी आतिशी बल्लेबाजी से तहलका मचाने वाले 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी इन दिनों हर तरफ छाए हुए हैं। श्रीलंका के खिलाफ वनडे ट्राई सीरीज के फाइनल में महज 29 गेंदों में 94 रनों की विस्फोटक पारी (जिसमें 11 गेंदों में अर्धशतक का लिस्ट-ए रिकॉर्ड शामिल है) खेलकर उन्होंने सबको हैरान कर दिया। उनकी इसी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है, जहां वे अपना इंटरनेशनल डेब्यू कर सकते हैं।
हालांकि, जहां एक तरफ सूर्यवंशी की तुलना महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण अफ्रीका के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज डेरिल कलिनन ने इस युवा खिलाड़ी के लंबे भविष्य और सेहत को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है।
पावर-हिटिंग और कड़े शॉट खेलने की तकनीक से है चोट का खतरा
डेरिल कलिनन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर एक पोस्ट साझा करते हुए सूर्यवंशी की बल्लेबाजी शैली पर गहरी चिंता व्यक्त की। कलिनन का मानना है कि सूर्यवंशी का खेल पूरी तरह से ‘पावर-हिटिंग’ (ताकतवर शॉट्स) पर निर्भर है, जिसके लिए उन्हें हर शॉट के साथ बेहद तेज बैट स्पीड (बल्ला घुमाने की गति) की जरूरत होती है।
कलिनन ने लिखा:
“मैं इस युवा खिलाड़ी से बहुत प्रभावित हूं, लेकिन जो बात मुझे परेशान कर रही है और जिसपर कोई बात नहीं कर रहा, वो है चोटें (Injuries)। 15 साल की उम्र में इतना भारी बल्ला घुमाना और लगातार क्रिकेट खेलना चिंताजनक है। मुझे उसकी कलाइयों (Wrists), कोहनी (Elbow) और शरीर के जोड़ों की चिंता है। अभी वह बढ़ रहा है और उसके जोड़, लिगामेंट तथा मांसपेशियां विकसित हो रही हैं, ऐसे में इस आक्रामक खेल से उन पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा।”
सचिन तेंदुलकर की ‘टेनिस एल्बो’ का दिया हवाला
कलिनन ने अपने तर्क को मजबूत करने के लिए क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का उदाहरण दिया। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2004 में टेनिस एल्बो (Tennis Elbow) नाम की गंभीर कोहनी की चोट के कारण सचिन तेंदुलकर का करियर लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच गया था।
कलिनन ने कहा कि सचिन अपने 24 साल के लंबे करियर में तमाम चोटों से जूझे, लेकिन कोहनी की चोट ने उन्हें सबसे ज्यादा डराया था, जबकि सचिन भी सूर्यवंशी की तरह इतनी बार और इतनी ताकत से जोरदार बल्ला स्विंग नहीं करते थे।
आज का बिजी शेड्यूल और भारी बल्ले बढ़ा सकते हैं मुसीबत
70 टेस्ट और 138 वनडे खेलने वाले कलिनन ने फैंस के कमेंट्स का जवाब देते हुए कहा कि आज के दौर में क्रिकेट का शेड्यूल बेहद व्यस्त (Busy Schedule) हो चुका है। हमारे जमाने में खिलाड़ी हल्के बल्लों का इस्तेमाल करते थे और आज की तुलना में बहुत कम मैच खेलते थे, फिर भी कई खिलाड़ियों को कलाई की पुरानी (Chronic) बीमारियों से जूझना पड़ता था।
हालांकि, उन्होंने माना कि आज के समय में आधुनिक ट्रेनिंग और रिकवरी (Recovery) के तरीके खिलाड़ियों की मदद करते हैं, लेकिन सूर्यवंशी के शरीर के अभी पूरी तरह विकसित न होने के कारण उन पर बार-बार इंजरी होने का रिस्क बहुत ज्यादा है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट प्रबंधन को सूर्यवंशी के वर्कलोड मैनेजमेंट (Workload Management) पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है।
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