1200 किमी रेंज और अमेरिकी-चीनी पुर्जे! रूस की नई क्रूज मिसाइल ‘फिलिन’ ने बढ़ाई यूक्रेन की आफत

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को ने अपने हथियारों के शस्त्रागार में एक बेहद खतरनाक और सस्ते लंबी दूरी के स्ट्राइक हथियार को शामिल किया है, जिसका नाम 'फिलिन' है। इस नई क्रूज मिसाइल को विशेष रूप से यूक्रेन की राजधानी कीव और उसके सुदूर पश्चिमी क्षेत्रों में तैनात बहुस्तरीय एयर डिफेंस सिस्टम को थकाने और भेदने के मकसद से तैयार किया गया है। यूक्रेन की सैन्य खुफिया एजेंसी (HUR) द्वारा जारी किए गए ताजा तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, रूसी सेना ने 2026 की गर्मियों के अंतिम हफ्तों से इस हथियार का सक्रिय युद्धक उपयोग शुरू कर दिया है। यह मिसाइल न केवल यूक्रेन के अग्रिम मोर्चे के ठिकानों बल्कि देश के सुदूर पश्चिमी और भीतरी सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में रणनीतिक बुनियादी ढांचे को सीधा निशाना बनाने में पूरी तरह सक्षम है।

इस नए हथियार के सामने आने से यूक्रेन की रक्षा प्रणाली के सामने अभूतपूर्व जटिलताएं खड़ी हो गई हैं। मॉस्को की रणनीति अब केवल महंगी और अत्यधिक उन्नत मिसाइलों पर निर्भर रहने की नहीं है, बल्कि वह ऐसे सस्ते स्ट्राइक सिस्टम विकसित कर रहा है जिन्हें बड़ी तादाद में बनाकर दागा जा सके। जब सैकड़ों की संख्या में झुंड बनाकर चलने वाले ड्रोनों के साथ इस तरह की तेज रफ्तार क्रूज मिसाइलें आसमान से बरसती हैं, तो कीव के लिए पश्चिमी देशों से मिले महंगे इंटरसेप्टर मिसाइलों के जरिए प्रत्येक खतरे को बेअसर करना आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोण से बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

अमेरिकी पुर्जे और चीनी नेविगेशन: एचयूआर ने खोला मिसाइल के भीतर का राज

यूक्रेन की सैन्य खुफिया एजेंसी (HUR) ने 22 अक्टूबर को अपने आधिकारिक 'वार एंड सैंक्शन्स' पोर्टल पर फिलिन मिसाइल का पूरा कच्चा-चिट्ठा सार्वजनिक करते हुए एक इंटरैक्टिव 3D मॉडल, उसके विस्तृत तकनीकी विनिर्देश और घटकों का डेटाबेस जारी किया है। यूक्रेनी और अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषक तब हैरान रह गए जब जांच में यह सामने आया कि कड़े पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद इस मिसाइल के निर्माण में विदेशी घटकों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, खुफिया एजेंसी ने मिसाइल के सर्किट में अमेरिकी निर्माताओं से जुड़े 35 इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और चीनी कंपनियों द्वारा निर्मित 22 इलेक्ट्रॉनिक घटकों की स्पष्ट पहचान की है।

एचयूआर के विशेषज्ञों का कहना है कि फिलिन में इस्तेमाल किए गए इलेक्ट्रॉनिक्स काफी हद तक अन्य रूसी मिसाइलों और गैरपिया जैसे घातक स्ट्राइक ड्रोनों में पाए जाने वाले सर्किट बोर्ड से मिलते-जुलते हैं। इन मानकीकृत ऑनबोर्ड यूनिट्स और सर्किट बोर्डों के मानकीकरण का सबसे बड़ा फायदा यह है कि रूस कम लागत और बहुत कम समय में फैक्ट्रियों के भीतर इनका बड़े पैमाने पर उत्पादन कर पा रहा है। मिसाइल के इस अंतरराष्ट्रीय कलपुर्जों के नेटवर्क ने एक बार फिर पश्चिमी निर्यात नियंत्रण और वैश्विक प्रतिबंधों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

3D प्रिंटेड बॉडी से लेकर जेट इंजन तक: क्या है फिलिन की तकनीकी मारक क्षमता

मिलिटार्नी और डिफेंस जर्नल्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलिन मिसाइल का डिजाइन और विकास मॉस्को स्थित प्रसिद्ध रक्षा संस्थान 'एनपीओ मोल्निया' द्वारा किया गया है, जो रूस के प्रमुख 'टैक्टिकल मिसाइल्स कॉर्पोरेशन' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मिसाइल की शारीरिक बनावट काफी आधुनिक है। इसका 3.5 मीटर लंबा मुख्य धड़ और 3 मीटर चौड़ा पंख बेहद हल्के कार्बन फाइबर और फाइबरग्लास कंपोजिट मटेरियल से तैयार किया गया है। इसके अलावा इसके कुछ जटिल आंतरिक और संरचनात्मक हिस्सों को 3D प्रिंटिंग तकनीक की मदद से ढाला गया है, जिससे इसका वजन कम रहता है और रडार क्रॉस-सेक्शन भी सीमित हो जाता है।

मिसाइल को गति देने के लिए इसमें रेनॉल्ड्स एलएलसी द्वारा असेंबल किया गया स्वदेशी रूसी R500 टर्बोजेट इंजन लगाया गया है। इसके ऑनबोर्ड एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सेंट पीटर्सबर्ग की पीएलएजेड (PLAZ) एलएलसी द्वारा तैयार किया गया है, जो पहले से ही रूसी सेना के गैरपिया अटैक ड्रोन के लिए महत्वपूर्ण पुर्जे बनाती है। नेविगेशन और सटीकता के लिए इसमें चीन में निर्मित आधुनिक इनर्टियल नेविगेशन सिस्टम (INS) और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के खिलाफ अत्यधिक प्रतिरोधी 16-चैनल वाला 'कोमेटा' सैटेलाइट एंटीना लगाया गया है, जिससे यूक्रेनी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम इसे आसानी से भटका नहीं पाते। जमीन पर लगे मोबाइल लॉन्चर से सॉलिड-प्रोपेलेंट रॉकेट बूस्टर के सहारे दागी जाने वाली यह मिसाइल 50 से 100 किलोग्राम तक का घातक विस्फोटक वारहेड ले जा सकती है। 800 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ने वाली यह मिसाइल जमीन से मात्र कुछ मीटर की बेहद नीची ऊंचाई से लेकर 6 किलोमीटर के आसमान तक उड़ने की क्षमता रखती है और इसकी कुल मारक रेंज 1,200 किलोमीटर आंकी गई है।

सस्ते हथियारों की रणनीति और यूक्रेन के एयर डिफेंस का बढ़ता संकट

फिलिन मिसाइल का उद्भव रूस के उस व्यापक रक्षा सिद्धांत का हिस्सा है जिसके तहत वह 'Kh-101' और 'कैलिबर' जैसी अत्यधिक महंगी क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ भारी संख्या में सस्ते विकल्पों को मैदान में उतार रहा है। प्रसिद्ध सैन्य विश्लेषक रॉब ली के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, मॉस्को का रक्षा मंत्रालय साल के अंत तक एक हजार से ज्यादा फिलिन मिसाइलों की खेप अपनी सेना में शामिल करने की तैयारी में था। हालांकि अभी तक युद्ध के मैदान में इसका सीमित और परीक्षण के तौर पर ही इस्तेमाल देखा गया है, लेकिन यदि इसका औद्योगिक उत्पादन तेज होता है, तो यह यूक्रेन के बिजली संयंत्रों और रक्षा प्रतिष्ठानों के लिए बहुत बड़ा खतरा बन जाएगा।

यह संकट ऐसे समय में गहराया है जब यूक्रेन लगातार रूस के भीषण हवाई हमलों की मार झेल रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हाल ही में सार्वजनिक मंच से चेतावनी दी थी कि रूसी सेना ने महज एक सप्ताह के भीतर करीब 2,300 स्ट्राइक ड्रोन, 48 मिसाइलें और 1,600 गाइडेड ग्लाइड बम दागे हैं, जिससे देश के नौ प्रमुख क्षेत्रों में भारी तबाही मची है। कीव लगातार वाशिंगटन और यूरोपीय सहयोगियों से अतिरिक्त पैट्रियट और नासाम्स (NASAMS) एयर डिफेंस मिसाइलें भेजने की गुहार लगा रहा है। इस भारी सैन्य तनाव के बीच राजनयिक हलचल भी जारी है, जहां राष्ट्रपति जेलेंस्की के अनुसार नवंबर के शुरुआती पखवाड़े में अबू धाबी के मंच पर यूक्रेन, रूस और अमेरिका के वार्ताकारों के बीच तकनीकी स्तर की त्रिपक्षीय गोपनीय बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।

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