अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा की गई जमीन खरीद को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह गुरुवार सुबह अचानक लखनऊ के मंडलायुक्त और एसआईटी (SIT) अध्यक्ष विजय विश्वास पंत के दफ्तर पहुंचे। संजय सिंह अपने साथ दस्तावेजों का एक बड़ा पुलिंदा लेकर आए थे, जिसे उन्होंने जांच टीम के हवाले कर दिया है। सांसद का दावा है कि इन कागजातों में राम मंदिर के नाम पर हुए बड़े खेल के पुख्ता सबूत हैं।
3 पन्ने का पत्र और 11 जमीनों की कुंडली
एसआईटी अध्यक्ष से मुलाकात के दौरान संजय सिंह ने 3 पन्नों का एक विस्तृत शिकायती पत्र और 11 अलग-अलग जमीन सौदों के रजिस्ट्री दस्तावेज सौंपे। इन दस्तावेजों में मुख्य रूप से जमीनों के सर्किल रेट और ट्रस्ट द्वारा चुकाई गई वास्तविक कीमत का तुलनात्मक विवरण दिया गया है। ‘आप’ सांसद का आरोप है कि आस्था के नाम पर मिले चंदे का इस्तेमाल कर कौड़ियों के भाव की जमीन को आसमान छूती कीमतों पर खरीदा गया है।
2 करोड़ की जमीन 18.5 करोड़ में? लगे गंभीर आरोप
संजय सिंह ने मीडिया से बात करते हुए बेहद चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या में कई जमीनें बाजार भाव और सर्किल रेट से कई गुना ज्यादा कीमत पर खरीदीं।
“एक मामले में महज 2 करोड़ रुपये की मालियत वाली जमीन को 18.5 करोड़ रुपये में खरीदा गया, जबकि एक अन्य सौदे में 9 करोड़ रुपये की जमीन के लिए ट्रस्ट ने 55 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया।”
सांसद ने इसे सीधे तौर पर राम भक्तों की आस्था और चंदे के साथ विश्वासघात बताते हुए एसआईटी से इस पूरे मामले की गहनता से जांच करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
SIT के बुलावे पर सबूतों के साथ पहुंचे सांसद
आपको बता दें कि यह मुलाकात पहले से तय थी। चंदे और दान में हुई कथित हेराफेरी की जांच कर रही एसआईटी ने संजय सिंह को अपने आरोपों के पक्ष में सबूत पेश करने के लिए समय दिया था। इससे पहले बुधवार को सांसद ने एक वीडियो संदेश जारी कर यह साफ कर दिया था कि वे 25 जून को सुबह 11:00 बजे लखनऊ मंडलायुक्त (जो एसआईटी के अध्यक्ष भी हैं) के सामने पेश होकर सारे दस्तावेजी साक्ष्य सौंपेंगे। संजय सिंह ने कहा कि वे जांच को भटकाने नहीं, बल्कि सच को सामने लाने के लिए एसआईटी के पास आए हैं।
सियासत गरमाई: अखिलेश का तंज और VHP की मांग
राम मंदिर से जुड़े इस विवाद ने उत्तर प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है। एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ‘SIT’ के बहाने तीखा तंज कसते हुए इसे ‘शेयर इन थेफ्ट’ (चोरी में हिस्सेदारी) करार दिया है, वहीं दूसरी तरफ विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इस मामले में तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर फास्टट्रैक कोर्ट के जरिए दूध का दूध और पानी का पानी करने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि संजय सिंह द्वारा सौंपे गए इन 11 सौदों के दस्तावेजों के बाद एसआईटी की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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