राम मंदिर चढ़ावा विवाद: SIT ने अभी नहीं सौंपी है रिपोर्ट, मीडिया में चल रही खबरों को यूपी सरकार ने बताया ‘भ्रामक और तथ्यहीन’

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे और दान की रकम में कथित हेराफेरी के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक बेहद महत्वपूर्ण और आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आया है। राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने मीडिया और सोशल मीडिया के विभिन्न हलकों में सूत्रों के हवाले से चल रही उन खबरों का पूरी तरह खंडन किया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है।

정부(정부 आधिकारिक स्रोत) ने साफ किया है कि एसआईटी की जांच अभी जारी है और रिपोर्ट सौंपे जाने को लेकर किए जा रहे दावे पूरी तरह निराधार हैं।

सूचना विभाग ने ‘एक्स’ पर पोस्ट जारी कर जनता से की अपील

उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर बकायदा एक आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की। विभाग ने अपनी पोस्ट में लिखा:

“श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र से संबंधित प्रकरण में एसआईटी द्वारा अभी तक अपनी जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी को प्रस्तुत नहीं की गई है। इस संबंध में कुछ समाचार पत्रों/मीडिया माध्यमों में प्रकाशित खबरें भ्रामक एवं तथ्यहीन हैं। कृपया ऐसी किसी भी अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करें तथा केवल आधिकारिक स्रोत से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें।”

ट्रस्ट के अनुरोध पर ही सीएम योगी ने किया था SIT का गठन

इस संवेदनशील मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो अयोध्या श्रीराम मंदिर में चढ़ावे को लेकर सोशल मीडिया पर उठी अफवाहों और आरोपों के बाद खुद ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी।

ट्रस्ट का कहना था कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और तीर्थ क्षेत्र की वैश्विक छवि को धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश है, जिसका पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री ने इस अनुरोध को गंभीरता से लेते हुए तुरंत तीन वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था।

SIT के प्रमुख चेहरे:

इस तीन सदस्यीय हाई-प्रोफाइल टीम की अगुवाई लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। उनके साथ इस टीम में आईजी (लखनऊ रेंज) किरन एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन बतौर सदस्य शामिल हैं। यह टीम पूरे प्रकरण की वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर गहन छानबीन कर रही है।

नृपेंद्र मिश्र के बयान से ट्रस्ट के भीतर असहजता बरकरार

चढ़ावे से जुड़े इस विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पदेन सदस्य और भवन-निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र (पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी) द्वारा मीडिया में दिए गए बयानों को लेकर ट्रस्ट के बाकी सदस्यों में असहजता का माहौल है।

ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों का मानना है कि प्रशासनिक सेवा के इतने वरिष्ठ स्तर पर रहे व्यक्ति द्वारा इस संवेदनशील मोड़ पर सार्वजनिक बयान जारी करना उचित नहीं था, क्योंकि इससे मीडिया को अनर्गल चर्चाओं का मौका मिल गया और ट्रस्ट की छवि पर भी इसका असर पड़ा।

दूसरे चरण में आरोप लगाने वालों पर कसेगा शिकंजा

भले ही रिपोर्ट अभी मुख्यमंत्री को नहीं सौंपी गई है, लेकिन एसआईटी जमीनी स्तर पर सबूत जुटाने में व्यस्त है। जांच शुरू होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर कई ऐसे लोग सामने आए हैं जिन्होंने खुद को राम मंदिर का पूर्व कर्मचारी या पूर्व इंजीनियर बताते हुए निर्माण कार्य और दान राशि में बड़े गबन के दावे किए हैं।

एसआईटी के सूत्रों के मुताबिक, जांच के अगले चरण में सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से ट्रस्ट पर प्रश्नचिह्न खड़े करने वाले इन सभी लोगों को समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा, ताकि यह साफ हो सके कि उनके दावों में कितनी सच्चाई है या यह केवल सनसनी फैलाने का प्रयास है।

Check Also

अतिक्रमण पर CM योगी का कड़ा रुख: जनता दर्शन में अफसरों को दिए सख्त निर्देश, बोले’अवैध कब्जा कतई बर्दाश्त नहीं

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर जनता की …