
देश की राजधानी नई दिल्ली में सियासी तापमान अचानक चरम पर पहुंच गया है, जहां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में समूचा विपक्ष आज एक बार फिर सड़कों पर उतरने की पूरी तैयारी कर चुका है। तय रणनीतिक योजना के अनुसार विपक्षी दलों के सभी सांसद सबसे पहले संसद भवन परिसर में एकजुट होंगे और वहां से अपनी मांगों को बुलंद करते हुए राष्ट्रपति भवन की ओर पैदल मार्च निकालेंगे। विपक्षी दलों का यह उग्र प्रदर्शन चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता, स्पेशल समरी रिवीजन (एसआईआर) की प्रक्रिया में सामने आईं कथित गंभीर अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रिया में वोट चोरी के संगीन आरोपों को लेकर आयोजित किया जा रहा है।
राष्ट्रपति भवन से औपचारिक मुलाकात का समय न मिलने की स्थिति को देखते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने विपक्षी एकता को पूरी ताकत के साथ जमीन पर उतारने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने गुरुवार को व्यक्तिगत स्तर पर फोन करके पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे जैसे शीर्ष गठबंधन नेताओं को तत्काल प्रभाव से नई दिल्ली पहुंचने का विशेष आग्रह किया है। इस राजनीतिक हलचल की पुष्टि करते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने कोलकाता से राष्ट्रीय राजधानी के लिए उड़ान भरने से ठीक पहले स्पष्ट रूप से कहा कि वोट चोरी और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन जैसे अत्यंत संवेदनशील विषय पर आपात चर्चा और कार्रवाई के लिए उन्हें शीर्ष स्तर से दिल्ली बुलाया गया है।
विपक्षी दलों का मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य देश की संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से व्यक्तिगत मुलाकात कर उन्हें चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और कथित गड़बड़ियों के पुख्ता प्रमाण सौंपना है। विपक्षी नेता राष्ट्रपति के समक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने की औपचारिक मांग भी रखना चाहते हैं। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति भवन को मुलाकात का पहला औपचारिक अनुरोध पत्र 2 अक्टूबर को ही भेजा गया था, जिसके बाद राष्ट्रपति सचिवालय ने बैठक में शामिल होने वाले विशिष्ट नेताओं की सूची मांगी थी। इसके बाद 5 अक्टूबर को नेताओं के नामों के साथ दोबारा औपचारिक पत्र प्रेषित किया गया और 7, 8 या 9 अक्टूबर को समय देने का आग्रह किया गया था, परंतु अब तक कोई आधिकारिक समय निर्धारित नहीं किया गया है। विपक्ष ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उन्हें समय नहीं मिला तो राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च निकालना तय है।
विपक्षी गठबंधन के तमाम सांसद शुक्रवार को दोपहर 3 बजे पुराने संसद भवन यानी संविधान सदन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में एक उच्चस्तरीय आपात बैठक करने जा रहे हैं। इस महाबैठक में कथित वोट चोरी के खिलाफ आगामी आंदोलनों और प्रदर्शनों की विस्तृत रूपरेखा तय की जाएगी। विपक्षी रणनीतिकारों का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख बचाने के लिए उनके पास विरोध के सभी विकल्प खुले हुए हैं। यदि सुरक्षा एजेंसियां उन्हें राष्ट्रपति भवन की ओर जाने से रोकती हैं, तो विपक्षी दलों ने सेवा तीर्थ, राष्ट्रपति भवन, उपराष्ट्रपति आवास, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निवास के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन करने की पुख्ता रणनीति तैयार कर रखी है। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं और पुलिस बल चप्पे-चप्पे पर तैनात है।
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