
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने स्पष्ट कर दिया है कि 2047 तक भारत को खंडित करने का सपना देखने वालों के मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे। मुंबई में संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित व्याख्यानमाला के समापन सत्र में भागवत ने जनसंख्या असंतुलन, समान नागरिक संहिता (UCC), आरक्षण और बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति जैसे ज्वलंत मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने दो टूक कहा कि अब भारत टूटने वाला नहीं है, बल्कि जो इसे तोड़ने की कोशिश करेंगे, वे खुद बिखर जाएंगे।
UCC पर ‘सबकी सहमति’ का मंत्र और एकता का संदेश
समान नागरिक संहिता (UCC) पर चर्चा करते हुए संघ प्रमुख ने इसे देश की एकता के लिए एक अनिवार्य कदम बताया। उन्होंने कहा कि कानून का ढांचा ऐसा होना चाहिए जो समाज को जोड़ने का काम करे, न कि उसमें दरार पैदा करे। उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि कैसे जन-संवाद के जरिए विश्वास में लेकर इसे लागू किया जा सकता है। भागवत के अनुसार, “UCC एक विचार के रूप में बेहतरीन है, लेकिन इसे थोपने के बजाय सबकी सहमति और विश्वास के साथ आगे बढ़ाना चाहिए ताकि विभाजन की स्थिति पैदा न हो।”
जाति नहीं योग्यता सर्वोपरि: क्या कोई SC/ST बनेगा सरसंघचालक?
जब संघ प्रमुख से पूछा गया कि क्या कभी कोई अनुसूचित जाति या जनजाति का व्यक्ति सरसंघचालक बन सकता है, तो उन्होंने संघ की कार्यप्रणाली को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “संघ में कोई ब्राह्मण, क्षत्रिय या किसी विशेष जाति का व्यक्ति पद नहीं पाता। जो भी बनेगा, वह केवल हिंदू होगा। यहाँ जाति योग्यता का पैमाना नहीं है और न ही किसी विशेष वर्ग का होना कोई अयोग्यता है।” उन्होंने यह भी साफ किया कि 75 वर्ष की आयु के बाद दायित्व मुक्त होने की उनकी इच्छा के बावजूद, संगठन के आग्रह पर वे अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
आरक्षण और भेदभाव पर बड़ा बयान
आरक्षण के मुद्दे पर आरएसएस की स्थिति स्पष्ट करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि जब तक समाज से जातीय भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक आरक्षण व्यवस्था जारी रहनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भेदभाव केवल कानूनों से नहीं, बल्कि सामाजिक इच्छाशक्ति और आत्मीयता से खत्म होगा। साथ ही, उन्होंने जातीय भेदभाव के लिए बने कानूनों के दुरुपयोग पर भी चिंता जताई और इसे रोकने की आवश्यकता बताई।
जनसंख्या असंतुलन: ‘तीन बच्चों का सिद्धांत’ और घुसपैठ पर प्रहार
देश में बदलती डेमोग्राफी पर चिंता जताते हुए भागवत ने फिर से हर परिवार में तीन बच्चों के सिद्धांत का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जनसंख्या असंतुलन के पीछे केवल जन्म दर ही नहीं, बल्कि ‘घुसपैठ’ और ‘जबरन मतांतरण’ (Conversion) बड़े कारण हैं। उन्होंने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की और कहा कि संदिग्ध व्यक्तियों की सूचना अधिकारियों को दें। उन्होंने विदेशी घुसपैठियों को रोजगार न देने की भी सलाह दी।
बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा और ‘अखंड भारत’ का संकल्प
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर संघ प्रमुख ने कहा कि वहां मौजूद सवा करोड़ हिंदू अगर एकजुट हो जाएं, तो दुनिया भर के हिंदू अपनी मर्यादा में रहकर उनकी हर संभव मदद करेंगे। उन्होंने 2047 के डर को खारिज करते हुए कहा कि हमें ‘अखंड भारत’ की कल्पना करनी चाहिए। भागवत ने ‘सावरकर’ को भारत रत्न देने की मांग पर कहा कि सावरकर को सम्मान मिलने से सम्मान का ही गौरव बढ़ेगा, क्योंकि वे पहले से ही करोड़ों दिलों में बसते हैं।
फिल्म ‘धुरंधर’ और बदलते भारत की नीति
व्यापारिक समझौतों पर उन्होंने सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत अब अपने हितों को सर्वोपरि रखकर डील कर रहा है। वहीं, ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों के माध्यम से विचारधारा के प्रसार पर उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक ऐसी प्रेरणादायी फिल्मों को देखने के लिए दूसरों को भी प्रेरित करते हैं और कभी-कभी शाखाएं योजना बनाकर इन्हें देखने जाती हैं।
The News 11 – Hindustan Newspaper, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया