
प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनके छोटे कारोबार को मजबूत उद्यमों में बदलने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) और भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) लखनऊ ने हाथ मिलाया है। शुक्रवार को आईआईएम लखनऊ के एंटरप्राइज इनक्यूबेशन सेंटर (आईआईएमएल-ईआईसी) और यूपीएसआरएलएम के बीच ग्रामीण उद्यम इनक्यूबेशन कार्यक्रम के लिए अनुबंध हुआ। आईआईएम लखनऊ के निदेशक यामिनी भूषण पाण्डेय और मिशन निदेशक अरुण कुमार ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस पहल को लेकर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समझौते का मसौदा तैयार होने से पूर्व संबंधित अधिकारियों और संस्थानों के साथ संयुक्त बैठक की थी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कार्यक्रम की रूपरेखा में ग्रामीण महिलाओं का हित सर्वोपरि रहे। चयन से लेकर वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण तक प्रत्येक स्तर पर पारदर्शिता बरती जाए तथा पूरी प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी की जाए।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरे लिए महिलाओं का आर्थिक विकास प्रथम है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं में उद्यम चलाने की क्षमता और मेहनत करने का जज्बा है। जरूरत उन्हें सही प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी, बाजार और पूंजी उपलब्ध कराने की है। सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण महिलाएं केवल आजीविका चलाने तक सीमित न रहें, बल्कि सफल उद्यमी बनकर दूसरों को भी रोजगार दें।
श्री मौर्य ने पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यप्रणाली पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले ‘100 में 80 हमारा’ का नियम अपनाया जाता था। हमारी सरकार गरीब के हक का 100 प्रतिशत पैसा उसके खाते में पहुंचाने वाली डबल इंजन सरकार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंच रहा है। सरकार की प्राथमिकता है कि गरीबों और महिलाओं के लिए निर्धारित धनराशि का पूरा लाभ उन्हें मिले।
रतन सिंह, सूचनाधिकारी, उप मुख्यमंत्री
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