यूपी चुनाव से पहले मायावती का बड़ा एक्शन, पूर्व मंत्री अंटू मिश्रा को बसपा से दिखाया बाहर का रास्ता! कार्यकर्ताओं को दी ‘साम-दाम-दंड-भेद’ से सावधान रहने की हिदायत

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर जैसे-जैसे राजनीतिक माहौल गर्मा रहा है, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती एक्शन मोड में आ गई हैं। संगठन में अनुशासन और पार्टी के प्रति निष्ठा को सर्वोपरि रखते हुए मायावती ने एक और बड़ा फैसला लिया है। बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रहे अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा को ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में तत्काल प्रभाव से पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

अंटू मिश्रा का निष्कासन केवल एक पूर्व मंत्री का निष्कासन नहीं है, बल्कि इसे बसपा के भीतर एक बड़े संगठनात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अंटू मिश्रा बसपा के राष्ट्रीय महासचिव और मायावती के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा के सगे भांजे हैं। ऐसे में सतीश चंद्र मिश्रा के करीबी रिश्तेदार पर हुई इस सीधी कार्रवाई से पार्टी के छोटे-बड़े कैडर में अनुशासन को लेकर एक कड़ा संदेश गया है कि पार्टी हित से बढ़कर कोई भी व्यक्ति या पद नहीं है।

सोशल मीडिया पर दी जानकारी: विरोधियों के हथकंडों से सावधान रहने की अपील

बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए इस कड़े फैसले की सार्वजनिक जानकारी दी। मायावती ने लिखा कि उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के दौरान स्वास्थ्य मंत्री रहे श्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा को उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों के फलस्वरूप तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।

इसके साथ ही मायावती ने पार्टी के नेताओं, पदाधिकारियों और कैडर कार्यकर्ताओं को चुनावी माहौल के बीच एक विशेष संदेश और चेतावनी जारी की। मायावती ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि अब जब विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल काफी गरमाया हुआ है, ऐसे समय में पार्टी के सभी स्तरों के लोगों को विरोधियों के सभी प्रकार के ‘साम, दाम, दंड, भेद’ आदि हथकंडों से पूरी तरह सावधान रहना चाहिए। उन्होंने अपील की कि सभी कार्यकर्ता अपनी पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ बहुजन समाज पार्टी के अम्बेडकरवादी मिशन को आगामी विधानसभा चुनाव में सफल बनाने में जी-जान से जुट जाएं।

चुनावी तैयारियों के बीच कड़ा अनुशासन: कई बड़े चेहरों पर गिर चुकी है गाज

आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए मायावती लगातार पार्टी संगठन की समीक्षा कर रही हैं। यह पहली बार नहीं है जब मायावती ने किसी बड़े चेहरे पर ऐसी सख्त कार्रवाई की हो। इससे पहले भी वे अनुशासनहीनता और गुटबाजी के आरोपों में कई कद्दावर नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा चुकी हैं।

हाल ही में मायावती ने अपने उत्तराधिकारी और बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ तथा राष्ट्रीय समन्वयक रणधीर सिंह बेनीवाल पर भी गाज गिराई थी। इन लगातार हो रही कार्यवाइयों से साफ झलकता है कि बसपा सुप्रीमो चुनावी रण में उतरने से पहले पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार की गुटबाजी, निष्क्रियता या बाहरी दलों के साथ गुप्त सांठगांठ को कतई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।

कौन हैं अंटू मिश्रा और क्यों बनी निष्कासन की स्थिति?

अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा बहुजन समाज पार्टी की 2007 से 2012 तक रही सरकार में बेहद ताकतवर मंत्रियों में गिने जाते थे। वे उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री का अहम पद संभाल चुके हैं। ब्राह्मण समाज के बीच बसपा का जनाधार बढ़ाने और 2007 के ‘सोशल इंजीनियरिंग’ फार्मूले को जमीन पर उतारने में भी उनकी सक्रिय भूमिका मानी जाती थी।

हालांकि, पिछले लंबे समय से अंटू मिश्रा बसपा की सक्रिय सांगठनिक गतिविधियों से दूरी बनाए हुए थे। राजनीतिक गलियारों में लगातार यह चर्चा चल रही थी कि वे अन्य राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं के संपर्क में हैं। इससे पूर्व मार्च 2024 में भी उनके भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने की मजबूत अटकलें उठी थीं, जब वे लखनऊ स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय भी पहुंचे थे। यद्यपि उस समय उनका भाजपा में प्रवेश नहीं हो सका था, लेकिन तभी से बसपा नेतृत्व की नजरें उनकी गतिविधियों पर टिकी हुई थीं।

निष्कासन पर अंटू मिश्रा का रुख और बसपा की भावी रणनीति

पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद जब मीडिया ने पूर्व मंत्री अंटू मिश्रा से संपर्क किया, तो उन्होंने बेहद नपी-तुली प्रतिक्रिया दी। अंटू मिश्रा ने कहा कि वे बहन जी (मायावती) के खिलाफ कुछ भी नहीं बोलेंगे। उन्होंने मायावती को अपना अभिभावक बताते हुए कहा कि उनके हर आदेश का वे पालन करेंगे और बहुत जल्द लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करके अपना पक्ष जनता के सामने रखेंगे।

दूसरी ओर, बसपा शीर्ष नेतृत्व अब पूरी तरह से चुनावी मोड में नजर आ रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बसपा ने उत्तर प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर प्रभारियों और संभावित प्रत्याशियों के नाम तय करना शुरू कर दिया है। मायावती खुद राज्य के सभी जिलों और मंडलों की समीक्षा बैठकें ले रही हैं। पार्टी का मुख्य जोर इस बार बूथ स्तर तक कैडर को मजबूत करने, सर्वसमाज में पैठ बनाने और सामाजिक व राजनीतिक समीकरणों के आधार पर मजबूत उम्मीदवारों को मैदान में उतारने पर है।

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