इस्लामाबाद/रावलपिंडी। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने शहबाज शरीफ सरकार और पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान (Military Establishment) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रावलपिंडी में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने पाकिस्तान की विदेश नीति को “पूरी तरह विफल” बताया और दावा किया कि देश अपने ही पड़ोसियों के बीच अलग-थलग पड़ चुका है।
मौलाना ने विशेष रूप से CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे) और अफगानिस्तान नीति पर सरकार को घेरते हुए कई कड़वे सवाल पूछे।
1. अफगान नीति की विफलता: ‘आतंकवादी आ सकते हैं, अनार नहीं’
मौलाना फजलुर रहमान ने सीमा सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर सरकार और सेना के विरोधाभासों को उजागर किया। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा:
-
व्यापार बनाम आतंकवाद: “अफगानिस्तान से एक अनार या खरबूजा भी पाकिस्तान में प्रवेश नहीं कर सकता (व्यापार बंद है), लेकिन आतंकवादी लगातार सीमा पार कर रहे हैं। अगर अधिकारी कहते हैं कि वे वहां से आ रहे हैं, तो उन्हें रोकते क्यों नहीं? उन्हें खत्म क्यों नहीं करते?”
-
विफलता का सवाल: उन्होंने सवाल उठाया कि दशकों से चली आ रही अफगान नीति इतनी बुरी तरह क्यों विफल हुई कि आज वहां की सरकार के साथ पाकिस्तान के संबंध न्यूनतम स्तर पर हैं।
2. चारों तरफ से घिरे: ‘चीन भी अब नाराज है’
रहमान ने इस्लामाबाद की विदेश नीति की आलोचना करते हुए गिनाया कि कैसे पाकिस्तान ने अपने दोस्तों को भी नाराज कर दिया है:
-
नाराज पड़ोसी: उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि “भारत हमारा दुश्मन है, अफगानिस्तान हमारा दुश्मन है, और अब ईरान और चीन भी हमसे नाराज हैं।”
-
चीन का टूटता भरोसा: मौलाना के अनुसार, चीन को उम्मीद थी कि पीडीएम (PDM) सरकार के आने से CPEC परियोजनाओं में तेजी आएगी, लेकिन स्थिति इसके उलट है। उन्होंने पूछा, “इमरान खान के समय CPEC रुका था, लेकिन क्या इस सरकार के तहत एक भी ईंट आगे बढ़ी है? आज चीन पाकिस्तान से बेहद नाराज है और उसे हम पर भरोसा नहीं रहा।”
3. ‘जनरल तय करते हैं देश की दिशा’
पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर प्रहार करते हुए रहमान ने कहा कि शहबाज शरीफ की सरकार केवल नाम की है, असली कमान सैन्य मुख्यालय (GHQ) के पास है।
-
अस्थिर नीतियां: “हमारी विदेश नीति नागरिक सरकार नहीं, बल्कि सैन्य प्रतिष्ठान तय करता है। एक जनरल आता है और कहता है कि हम बातचीत करेंगे, दूसरा आता है और कहता है कि हम युद्ध छेड़ेंगे।”
-
जवाबदेही: उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की जनता को यह जानने का हक है कि उनकी नीतियां केवल अलगाव, अविश्वास और असुरक्षा क्यों पैदा कर रही हैं।
मौलाना के भाषण के मुख्य बिंदु (Quick Summary)
| मुद्दा | मौलाना फजलुर रहमान का बयान |
| CPEC | चीन का भरोसा खत्म हो गया है, काम ठप पड़ा है। |
| आतंकवाद | सीमा पर फल और व्यापार बंद है, लेकिन आतंकी आसानी से आ रहे हैं। |
| सत्ता की हैसियत | नागरिक सरकार बेबस है, सेना के जनरल नीतियां तय कर रहे हैं। |
| क्षेत्रीय संबंध | भारत, अफगानिस्तान, ईरान और चीन—सभी से रिश्ते खराब हैं। |
The News 11 – ताज़ा हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया
