10 साल से पाकिस्तान की जेल में कुलभूषण जाधव: ईरान की भूमिका पर क्यों उठते रहे सवाल? जानिए किडनैपिंग से ICJ तक पूरा घटनाक्रम

नई दिल्ली: वैश्विक तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्षों के बीच एक ऐसा मामला है जो एक दशक बाद भी भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है। भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव आज भी पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। 3 मार्च 2016 को ईरान से कथित अपहरण और फिर पाकिस्तान की सैन्य अदालत से मौत की सजा—इस पूरे प्रकरण ने न केवल भारत-पाकिस्तान संबंधों को प्रभावित किया, बल्कि ईरान की भूमिका को लेकर भी कई सवाल खड़े किए। आखिर कौन हैं कुलभूषण जाधव, और क्यों उनकी गिरफ्तारी के बाद ईरान की चुप्पी चर्चा का विषय बनी रही?

कौन हैं कुलभूषण जाधव?

महाराष्ट्र के सांगली में 1970 में जन्मे कुलभूषण जाधव ने कम उम्र में ही रक्षा सेवाओं का रास्ता चुना। 1987 में उन्होंने नेशनल डिफेंस अकादमी जॉइन की और 1991 में भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त किया। सेवा से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने ईरान में व्यवसाय शुरू किया। कारोबारी गतिविधियों के चलते उनका ईरान आना-जाना लगा रहता था।

ईरान से अपहरण और पाकिस्तान का दावा

भारत का आरोप है कि 3 मार्च 2016 को ईरान की जमीन से जाधव का अपहरण किया गया और उन्हें पाकिस्तान ले जाया गया। पाकिस्तान ने 25 मार्च 2016 को उनकी गिरफ्तारी की घोषणा करते हुए दावा किया कि उन्हें बलूचिस्तान से पकड़ा गया। इस दावे को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया। इस अपहरण में पाकिस्तान समर्थित सुन्नी आतंकी संगठन जैश अल अदल का नाम भी सामने आया।

ईरान की भूमिका पर क्यों उठे सवाल?

सबसे बड़ा सवाल यह रहा कि यदि जाधव को ईरान से उठाया गया, तो स्थानीय प्रशासन या सुरक्षा एजेंसियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? किसी विदेशी नागरिक का अपहरण और सीमा पार ले जाना बिना स्थानीय तंत्र की जानकारी के संभव है या नहीं—यही प्रश्न विशेषज्ञ लगातार उठाते रहे हैं। इसके अलावा, भारत के लगातार विरोध के बावजूद ईरान की ओर से जाधव की रिहाई को लेकर सार्वजनिक स्तर पर कोई ठोस बयान सामने नहीं आया। इस चुप्पी ने संदेह को और गहरा किया।

मौत की सजा और अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाजा

मार्च 2016 से अप्रैल 2017 के बीच भारत ने 16 बार कॉन्सुलर एक्सेस की मांग की, लेकिन पाकिस्तान ने अनुमति नहीं दी। 10 अप्रैल 2017 को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जाधव को मौत की सजा सुना दी। इसके बाद 8 मई 2017 को भारत ने मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पहुंचाया। 18 मई 2017 को अंतरराष्ट्रीय अदालत ने फांसी पर रोक लगा दी।

17 जुलाई 2019 को अदालत ने अपने फैसले में पाकिस्तान को सजा की समीक्षा करने और भारत को कॉन्सुलर एक्सेस देने का निर्देश दिया। इसके बाद सितंबर 2019 में भारत को दूसरी बार कॉन्सुलर एक्सेस मिला।

10 साल बाद भी बरकरार है अनिश्चितता

एक दशक बीत जाने के बाद भी कुलभूषण जाधव पाकिस्तान की जेल में हैं। भारत लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की मांग करता रहा है, जबकि पाकिस्तान जासूसी के आरोपों पर अड़ा है। यह मामला आज भी भारत-पाकिस्तान संबंधों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का अहम हिस्सा बना हुआ है।

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