
सनातन धर्म में ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि को एक अत्यंत प्रभावशाली और पुण्य फलदायी तिथि माना गया है। यह दिन पूरी तरह से पितरों (पूर्वजों) की आत्मिक शांति और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करने, अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करने और विशेष मंत्रों का जप-तप करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
यदि इस विशेष तिथि पर नियमों का पालन करते हुए पूर्वजों के निमित्त पूजा-पाठ किया जाए, तो पितृ देव अत्यंत प्रसन्न होते हैं। उनकी कृपा से परिवार में चल रही धन की किल्लत दूर होती है, सुख-समृद्धि का वास होता है और लंबे समय से रुके हुए मांगलिक कार्य बिना किसी बाधा के पूरे हो जाते हैं। आइए जानते हैं ज्येष्ठ अमावस्या पर पितृ तर्पण की सही विधि और किन प्रभावशाली मंत्रों का जाप करना आपके लिए कल्याणकारी रहेगा।
ज्येष्ठ अमावस्या पर पितृ तर्पण की संपूर्ण विधि
पितरों की तृप्ति और आशीर्वाद के लिए शास्त्रों में तर्पण की एक निश्चित विधि और समय बताया गया है। अमावस्या के दिन इस विधि से तर्पण अवश्य करें:
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स्नान और संकल्प: अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी या घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
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तर्पण का सही समय: शास्त्रों के अनुसार, पितरों के निमित्त श्राद्ध, धूप-ध्यान या तर्पण करने के लिए ‘दोपहर का समय’ सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है।
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अंजलि से जल देना: दोपहर के समय एक तांबे या कांसे के पात्र में स्वच्छ जल लें। उसमें गंगाजल, दूध, जौ, काले तिल और कुशा (एक प्रकार की घास) मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों का ध्यान करते हुए अंजलि (हाथों) से जल अर्पित करें।
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ब्राह्मण भोजन और दान: तर्पण प्रक्रिया पूरी होने के बाद पितरों की शांति के लिए सामर्थ्य के अनुसार दान करें। घर पर सात्विक भोजन बनाकर ब्राह्मणों को आदरपूर्वक भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा दें।
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पंचबलि भोग: ब्राह्मण भोजन के साथ ही गाय, कुत्ते, कौए, देव और चींटियों के लिए भोजन का अंश (पंचबलि) निकालना न भूलें। विशेषकर पक्षियों को दाना जरूर डालें।
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आचरण की शुद्धता: अमावस्या के दिन अपनी सोच को पूरी तरह सकारात्मक रखें। घर में या बाहर किसी से भी वाद-विवाद, झगड़ा या क्लेश न करें। अपनी वाणी को शुद्ध रखें और किसी को अपशब्द न कहें।
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तामसिक भोजन से दूरी: इस पवित्र तिथि पर भूलकर भी घर में लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा जैसे तामसिक भोजन का प्रयोग न करें। पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।
काले तिल का दान मिटाएगा हर पितृ दोष
ज्येष्ठ अमावस्या का दिन कुंडली में मौजूद सभी प्रकार के पितृ दोषों और राहु-केतु के अशुभ प्रभावों को दूर करने के लिए सबसे शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन पूजा के बाद काले तिल का दान करने से पितर तृप्त होते हैं।
इस छोटे से उपाय को करने से घर में हो रही अचानक धन की हानि रुक जाती है, व्यापार में तरक्की होती है और परिवार के सदस्यों को लंबे समय से चली आ रही बीमारियों व आपसी मनमुटाव से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाता है।
इन प्रभावशाली पितृ मंत्रों का करें जाप
अमावस्या तिथि पर शांति और समृद्धि के लिए शांत चित्त होकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके नीचे दिए गए मंत्रों का कम से कम 108 बार (एक माला) जाप करना चाहिए। इससे पितृ देव प्रसन्न होकर अपने वंशजों को दीर्घायु और खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं:
सरल पितृ मंत्र: ‘ॐ पितृ देवतायै नम:’
पितृ गायत्री मंत्र: ‘ॐ पितृ गणाय विद्महे जगतधारिणे धीमहि तन्नो पित्रो प्रचोदयात्।’
शास्त्रोक्त पितृ स्तुति मंत्र: ‘ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:।’
शिव-शक्ति स्वरूप पितृ मंत्र: ‘ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि। शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्।।’
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