क्या लगातार पेट फूलना डिम्बग्रंथि के कैंसर (Ovarian Cancer) का लक्षण है? महिलाएं भूलकर भी न छिपाएं शरीर के ये गुप्त संकेत

महिलाओं के शरीर में हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण समय-समय पर कई तरह के बदलाव होते रहते हैं। इन्हीं में से एक बेहद आम समस्या है पेट फूलना (Bloating)। अक्सर बाहर का तीखा-मसालेदार खाना खाने, गैस बनने, तनाव या पीरियड्स (मासिक धर्म) के दिनों में पेट फूलना सामान्य माना जाता है।

लेकिन, यदि आपको यह समस्या अक्सर बनी रहती है और कई हफ्तों तक ठीक नहीं होती, तो सावधान हो जाइए। डॉक्टरों और कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार पेट फूलना डिम्बग्रंथि के कैंसर (Ovarian Cancer – अंडाशय का कैंसर) का एक प्रमुख और शुरुआती लक्षण हो सकता है। आइए जानते हैं कि इस बीमारी के शुरुआती संकेतों को कैसे पहचानें और यह किन महिलाओं के लिए अधिक जोखिम भरा है।

शुरुआत में महिलाएं समझती हैं मामूली गैस, यहीं होती है बड़ी चूक

अंडाशय के कैंसर को ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरणों (Early Stages) में इसका पता लगाना बेहद मुश्किल होता है। इसके लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि महिलाएं इन्हें अक्सर पाचन से जुड़ी गड़बड़ी मान लेती हैं।

ज्यादातर महिलाएं गैस की दवाएं खाकर, चूर्ण लेकर या अपनी डाइट बदलकर इस उम्मीद में बैठी रहती हैं कि समस्या खुद ठीक हो जाएगी। लेकिन जब यह बीमारी अंडाशय के भीतर बढ़ने लगती है, तो शरीर पेट फूलने के माध्यम से कुछ खास संकेत देने लगता है।

पेट फूलने के साथ दिखें ये 8 लक्षण, तो तुरंत करवाएं जांच

यदि आपको दो से तीन सप्ताह तक लगभग हर दिन पेट फूलने का अहसास हो, और उसके साथ नीचे दिए गए लक्षण भी महसूस हों, तो इसे सामान्य समझने की भूल बिल्कुल न करें:

  • पेट या पेल्विक एरिया (श्रोणि क्षेत्र) में लगातार हल्का दर्द या ऐंठन रहना।

  • पेट में हमेशा भारीपन या सूजन का बने रहना।

  • भूख में अचानक कमी आ जाना या बहुत कम खाना खाने पर ही पेट भरा हुआ महसूस होना।

  • बिना किसी डाइटिंग या वर्कआउट के अचानक वजन का बढ़ना या तेजी से घटना।

  • बार-बार या बहुत जल्दी-जल्दी पेशाब (Urinary Urgency) आना।

  • लगातार कब्ज (Constipation) या पेट साफ न होने की समस्या।

  • बिना किसी भारी काम के भी हर समय अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होना।

महत्वपूर्ण तथ्य: पेट फूलने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको कैंसर ही है। अधिकांश मामलों में यह गैस, कब्ज, तनाव या खराब लाइफस्टाइल के कारण होता है। लेकिन अंतर केवल समय का है; अगर कारण सामान्य है तो यह 2-4 दिनों में ठीक हो जाएगा, पर अगर यह कैंसर का संकेत है तो हफ्तों तक लगातार बना रहेगा।

किन महिलाओं को होता है ओवेरियन कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा?

कुछ महिलाओं में जेनेटिक और शारीरिक कारणों से इस कैंसर के विकसित होने की संभावना अधिक होती है:

  • पारिवारिक इतिहास (Family History): यदि आपके परिवार में मां, बहन या मौसी को कभी डिम्बग्रंथि, स्तन (Breast Cancer) या कोलोरेक्टल कैंसर रहा हो, तो जोखिम बढ़ जाता है।

  • बढ़ती उम्र और मोटापा: आमतौर पर मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बाद यानी 50 साल की उम्र पार करने पर इसका खतरा बढ़ता है, लेकिन कम उम्र की महिलाएं भी इसका शिकार हो सकती हैं।

  • अन्य कारण: एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) की बीमारी होना, धूम्रपान करना या कुछ खास आनुवंशिक म्यूटेशन (जैसे BRCA जीन) का होना।

उम्र का भ्रम न पालें, सतर्कता ही है सबसे बड़ा बचाव

समाज में यह एक आम धारणा है कि अंडाशय का कैंसर केवल बूढ़ी या अधिक उम्र की महिलाओं को होता है। यह पूरी तरह सच नहीं है। चिकित्सा जगत में ऐसे कई मामले देखे गए हैं जहां कम उम्र की युवतियां भी ओवेरियन कैंसर की चपेट में आई हैं। उम्र कम होने के भ्रम में लक्षणों को छिपाना या नजरअंदाज करना बीमारी को अंतिम स्टेज तक पहुंचा सकता है। शरीर के संकेतों को पहचानें और समय रहते स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से मिलकर अल्ट्रासाउंड या जरूरी जांच जरूर करवाएं।

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