
नई दिल्ली: भारत ने स्वदेशी और सुरक्षित परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी तकनीकी ताकत का दम दिखाया है। तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR)’ ने दूसरे चरण की क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में पहुंच गया है, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को खुद पूरा करने की क्षमता रखते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता को भारत के लिए “निर्णायक मोड़” बताते हुए वैज्ञानिकों को बधाई दी है।
क्या है PFBR की क्रिटिकैलिटी और क्यों है खास
कलपक्कम में स्थापित 500 मेगावॉट क्षमता वाला यह सोडियम कूल्ड फास्ट ब्रीडर रिएक्टर अब उस अवस्था में पहुंच गया है, जहां यह जितना ईंधन खपत करेगा, उससे अधिक नया ईंधन तैयार करेगा। सरल शब्दों में कहें तो यह रिएक्टर Plutonium-233 का उपयोग करते हुए Plutonium-239 का उत्पादन करेगा और साथ ही बिजली भी बनाएगा।यह तकनीक भारत को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।
स्वदेशी तकनीक से तैयार, ‘नेट जीरो 2070’ लक्ष्य को मिलेगी रफ्तार
यह रिएक्टर पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, जिसे भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) ने डिजाइन और विकसित किया है।यह उपलब्धि भारत के ‘नेट जीरो 2070’ लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगी, क्योंकि यह स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा का स्रोत है।
पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं
भारत की इस उपलब्धि के बाद पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ यूजर्स ने अपने देश को भी इसी तरह के स्वदेशी परमाणु कार्यक्रम शुरू करने की सलाह दी, ताकि रणनीतिक संतुलन बनाए रखा जा सके।
वहीं, कुछ प्रतिक्रियाएं आक्रामक भी रहीं, जिनमें भारत के परमाणु कार्यक्रम पर सवाल उठाए गए और वैश्विक नीति पर पक्षपात के आरोप लगाए गए।
भारत-पाकिस्तान तुलना पर छिड़ी बहस
सोशल मीडिया पर भारतीय यूजर्स ने भी जवाब देते हुए पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाए। विदेशी मुद्रा भंडार और कर्ज के मुद्दे उठाते हुए भारत की आत्मनिर्भरता और तकनीकी प्रगति को रेखांकित किया गया।
यह बहस दोनों देशों के बीच तकनीकी और आर्थिक अंतर को भी उजागर करती है।
यूएई लोन और पाकिस्तान की आर्थिक चुनौती
पाकिस्तान पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का कर्ज भी चर्चा का विषय बना हुआ है। वर्ष 2019 में लिया गया 3.5 अरब डॉलर का कर्ज अब चुकाने का दबाव बढ़ा रहा है।इस बीच पाकिस्तानी नेताओं के बयान भी विवाद का कारण बने हैं, जिससे खाड़ी देशों में नाराजगी बढ़ने की खबरें हैं।
तीन चरणों में आगे बढ़ रहा भारत का परमाणु कार्यक्रम
भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम तीन चरणों में विकसित किया गया है, जिसकी परिकल्पना डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने की थी।
पहले चरण में PHWR रिएक्टर काम कर रहे हैं, जबकि PFBR दूसरा चरण है। तीसरे चरण में थोरियम आधारित रिएक्टर विकसित किए जाएंगे, जिसमें भारत के विशाल थोरियम भंडार का उपयोग होगा।
दुनिया में भारत की अलग पहचान
भारत के पास दुनिया का लगभग 25% थोरियम भंडार है और वह भविष्य में इसे ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।फिलहाल भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता करीब 8.78 गीगावॉट है, जिसे 2047 तक 100 गीगावॉट तक बढ़ाने का लक्ष्य है।विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की ब्रीडर रिएक्टर तकनीक अभी अमेरिका, चीन, फ्रांस और जापान जैसे देशों में भी सीमित या विकसित अवस्था में है।
निष्कर्ष: ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
PFBR की सफलता भारत के लिए केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है। यह आने वाले समय में देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक मंच पर भारत की तकनीकी ताकत को और मजबूत करेगा।
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