पूजा में लंबी बाती का दीपक जलाएं या गोल? जानें किस देवता के आगे कौन सी बत्ती जलाने से चमकेगी किस्मत

सनातन धर्म में दैनिक पूजा-पाठ के दौरान दीपक प्रज्वलित करना एक अनिवार्य और पवित्र परंपरा है। माना जाता है कि बिना दीपक के की गई कोई भी पूजा अधूरी रह जाती है। दीपक न केवल घर के अंधकार को मिटाता है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर पूरे वातावरण में सकारात्मकता का संचार भी करता है। अक्सर लोग पूजा करते समय रूई की बत्ती (बाती) के आकार पर ध्यान नहीं देते, जबकि शास्त्रों में लंबी बाती और गोल बाती (फूल बाती) दोनों का अलग-अलग महत्व और नियम बताए गए हैं। गलत बाती का चुनाव करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि शास्त्रों के अनुसार किस देवी-देवता के सामने कौन सी बाती जलाना सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है।

दीपक प्रज्वलित करने का क्या है आध्यात्मिक महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक की लौ को ईश्वर का विग्रह रूप माना जाता है। शास्त्रों में स्पष्ट है कि बाती का आकार देवता के स्वभाव और उनकी ऊर्जा के अनुसार तय होता है। जहां गोल बाती जीवन में स्थिरता, शांति और ध्यान का प्रतीक मानी जाती है, वहीं लंबी बाती वंश वृद्धि, धन, समृद्धि और निरंतर आगे बढ़ने की शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है। यदि हम सही देवता के सामने सही बत्ती का दीया जलाते हैं, तो उनकी विशेष कृपा अति शीघ्र प्राप्त होती है।

गोल बाती (फूल बत्ती) का दीपक किन देवताओं के लिए है शुभ?

ज्योतिष शास्त्र और पुराणों के अनुसार, गोल या फूल बाती का दीपक मुख्य रूप से पुरुष देवों और सात्विक आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

  • इन देवताओं के सामने जलाएं: भगवान शिव, श्री हरि विष्णु, ब्रह्मा जी, इंद्र देव और प्रथम पूजनीय भगवान श्री गणेश जी की पूजा में हमेशा गोल बाती का ही प्रयोग करना चाहिए।

  • तुलसी पूजा का नियम: शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने भी हमेशा गोल बाती का ही दीपक जलाना चाहिए।

  • मिलने वाले लाभ: गोल बाती का दीपक जलाने से घर में मानसिक शांति बनी रहती है, पारिवारिक कलह दूर होती है और घर में मां लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है। इसे गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल में जलाना सर्वोत्तम माना जाता है।

लंबी बाती का दीपक किनके लिए है सर्वोत्तम?

लंबी बाती का दीपक मुख्य रूप से शक्ति, ऊर्जा और भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति के लिए जलाया जाता है। यह दीपक विशेष तौर पर देवियों की आराधना के लिए नियत है।

  • इन देवियों के सामने जलाएं: धन की देवी मां लक्ष्मी, मां दुर्गा, सरस्वती जी और अन्य सभी देवी स्वरूपों (जैसे संतोषी माता, शीतला माता) के पूजन के लिए लंबी बाती का ही उपयोग करना चाहिए।

  • पितरों के लिए विशेष: अपने पूर्वजों यानी पितरों के निमित्त दक्षिण दिशा में जलाया जाने वाला दीपक भी हमेशा लंबी बाती का ही होना चाहिए।

  • मिलने वाले लाभ: मान्यताओं के अनुसार, देवियों के सामने लंबी बाती का दीया जलाने से घर में धन-वैभव, ऐश्वर्य की कमी नहीं होती और कुल (वंश) की वृद्धि होती है। खासकर दिवाली, नवरात्रि और लक्ष्मी पूजन के दौरान लंबी बाती का दीपक घर की उन्नति के द्वार खोलता है।

दीपक जलाते समय ध्यान रखने योग्य जरूरी नियम

पूजा का पूर्ण लाभ उठाने के लिए दीपक और बाती से जुड़े इन नियमों का पालन अवश्य करें:

  1. पूजा के लिए हमेशा कलावा (मौली) या साफ और शुद्ध रूई से बनी बाती का ही इस्तेमाल करें।

  2. घी का दीपक हमेशा अपने दाहिने हाथ (Right Hand) की ओर रखें और तेल का दीपक हमेशा बाएं हाथ (Left Hand) की ओर रखना शुभ होता है।

  3. बाती हमेशा सूखी और साफ होनी चाहिए। गीली बाती जलाने से धुआं होता है, जिसे पूजा में विघ्न माना जाता है।

गलत बाती चुनने के नुकसान और सही बत्ती के फायदे

शास्त्रों के अनुसार, यदि देवियों के सामने गोल बाती और देवताओं के सामने लंबी बाती जलाई जाए, तो इससे अनजाने में वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है और पूजा का पूरा पुण्य फल नहीं मिलता। इसके विपरीत, सही बत्ती का चुनाव करने से घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, सेहत अच्छी रहती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है। इसलिए आज ही से अपनी दैनिक पूजा में इस छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बात का विशेष ध्यान रखें।

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