
आज के समय में अस्पताल जाना किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है। जरा सोचिए, जब कोई मरीज दिल की बीमारी से पहले ही शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान होकर अस्पताल पहुंचता है, तो वहां उसे जिंदगी बचाने के नाम पर ऐसे व्यावसायिक जाल में फंसा लिया जाता है कि उसकी आधी जिंदगी की कमाई इलाज के बिल चुकाने में निकल जाती है। इस पूरे खेल का सबसे बड़ा हथियार होता है स्टेंट (Stent)। जब भी एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) की बात आती है, तो अस्पतालों में अलग-अलग ब्रांड्स और जटिल मेडिकल शब्दों की ऐसी जानकारी परोसी जाती है कि मरीज और उसके परिवार वाले बिना पूरी बात समझे डर के मारे कागजों पर आंख मूंदकर दस्तखत कर देते हैं। यहीं से शुरू होता है मरीजों की जेब पर डाका डालने का खेल।
लूट का जाल: महंगे स्टेंट का भ्रम
अक्सर अस्पतालों में यह झूठा भ्रम फैलाया जाता है कि जितना महंगा स्टेंट डलेगा, दिल उतना ही सुरक्षित रहेगा। आपको इस तरह समझाया जाता है मानो स्टेंट कोई ब्रांडेड स्मार्टफोन हो—जितना महंगा मॉडल, उतना ही शानदार परफॉर्मेंस। जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
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सरकारी कीमत बनाम अस्पताल का बिल: बाजार में मिलने वाले ड्रग-इल्यूटिंग स्टेंट (Drug-Eluting Stent) की एक तय कीमत सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है, जो अधिकतम 30 से 40 हजार रुपये के आसपास होती है।
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मनमानी मार्जिन: लेकिन अस्पताल अपनी मनमानी मार्जिन, भारी-भरकम कंसल्टेशन फीस और खास तकनीक का हवाला देकर उसी स्टेंट की कीमत बिल में डेढ़ से दो लाख रुपये तक दिखा देते हैं।
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डर का कारोबार: खेल तब और खतरनाक हो जाता है जब डॉक्टर मरीजों या उनके परिजनों को यह कहकर डराते हैं कि “सस्ता स्टेंट कुछ ही महीनों में ब्लॉक हो जाएगा, इसलिए आपको महंगा विदेशी स्टेंट ही लगवाना चाहिए।”
कौन सा स्टेंट होता है असल में सही?
विशेषज्ञों और कई मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल की नसों की बनावट और ब्लॉकेज की स्थिति हर मरीज में अलग होती है। लेकिन यह साफ है कि महंगा स्टेंट हमेशा बेहतर हो, यह बिल्कुल जरूरी नहीं है।
भारत सरकार द्वारा अनुमोदित और तय किए गए मेडिकली अप्रूव्ड स्टेंट पूरी तरह से सुरक्षित होते हैं और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर पूरी तरह खरे उतरते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि आप किसी विदेशी ब्रांड के झांसे में आने के बजाय क्वालिटी और जरूरत पर फोकस करें।
ब्रांड से ज्यादा क्या है महत्वपूर्ण?
डॉक्टर की सलाह के बाद यह देखना जरूरी है कि स्टेंट की मेटल बॉडी और उस पर चढ़ी दवा की क्वालिटी कैसी है, न कि उसका कोई फैंसी ब्रांड नाम। इसके अलावा, सबसे अहम बात यह है कि स्टेंट की कीमत से ज्यादा इस बात का महत्व है कि कार्डियोलॉजिस्ट ने उसे कितनी सफाई और सटीकता से नसों में फिट किया है।
चिकित्सा जगत के जानकारों का मानना है कि एक कुशल डॉक्टर सामान्य और किफायती स्टेंट से भी मरीज की जान सफलताપूर्व बचा सकता है, जबकि गलत या लापरवाही से लगाया गया सबसे महंगा स्टेंट भी फेल हो सकता है। इसलिए अस्पताल के बिल और ब्रांड के चक्कर में फंसने के बजाय हमेशा पारदर्शी इलाज और योग्य डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।
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