
वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की भूमिका तेजी से मजबूत होती दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की सक्रिय ऊर्जा कूटनीति के चलते भारत अब केवल तेल आयातक देश नहीं रहा, बल्कि दुनिया की सप्लाई चेन में एक अहम केंद्र बनकर उभरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिफाइनरियों के बिना वैश्विक तेल बाजार की आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
अमेरिकी रणनीतिक हलकों में भी इस बात को स्वीकार किया जाने लगा है कि भारत की ऊर्जा क्षमता और उसकी रिफाइनिंग ताकत वैश्विक बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है। इसी संदर्भ में अमेरिकी कारोबारी और रणनीतिक विश्लेषक Sergio Gor ने भी भारत की भूमिका पर मुहर लगाई है।
भारत की रिफाइनिंग क्षमता बनी वैश्विक ताकत
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश ने अपनी रिफाइनिंग क्षमता को भी काफी बढ़ाया है। भारत की कई बड़ी रिफाइनरियां अब कच्चे तेल को प्रोसेस कर पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पादों के रूप में कई देशों को निर्यात कर रही हैं।
इसका नतीजा यह है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत एक अहम प्रोसेसिंग हब के रूप में उभर आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारतीय रिफाइनरियां किसी वजह से उत्पादन कम कर दें, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।
मोदी की ‘एनर्जी डिप्लोमेसी’ का असर
प्रधानमंत्री Narendra Modi की सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा कूटनीति को प्राथमिकता दी है। रूस, अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीका के कई देशों के साथ भारत ने तेल और गैस के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी मजबूत की है।
रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल की खरीद, खाड़ी देशों के साथ ऊर्जा समझौते और नए व्यापारिक रास्तों के निर्माण ने भारत को वैश्विक ऊर्जा नेटवर्क में महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना दिया है।
अमेरिकी रणनीतिक हलकों में बढ़ी भारत की अहमियत
अमेरिका के नीति विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तेल बाजार की स्थिरता के लिए भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। अमेरिकी विश्लेषक Sergio Gor ने भी संकेत दिया है कि भारत की रिफाइनिंग क्षमता और उसकी ऊर्जा नीति को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की बढ़ती मांग और उसकी प्रोसेसिंग क्षमता दोनों मिलकर दुनिया के ऊर्जा बाजार में संतुलन बनाए रखने में मदद कर रही हैं।
ग्लोबल मार्केट पर पड़ सकता है असर
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी कारण से भारत की रिफाइनिंग गतिविधियों में बाधा आती है, तो वैश्विक बाजार में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। कई एशियाई, अफ्रीकी और यूरोपीय देशों के लिए भारत पेट्रोलियम उत्पादों का अहम सप्लायर बन चुका है।
यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ऊर्जा नीति और उसकी रिफाइनिंग क्षमता को अब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा से जोड़कर देखा जाने लगा है।
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