
दैनिक भागदौड़ और तनावभरी जिंदगी में सीढ़ियां चढ़ते समय, तेज चलते समय या थोड़ा सा काम करते ही सांस फूलने (Shortness of Breath) की समस्या को लोग अक्सर सामान्य थकान, कमजोरी, वजन बढ़ना या गैस की दिक्कत मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन मेडिकल विशेषज्ञों और कार्डियोलॉजिस्ट्स के अनुसार, यह अनदेखी जानलेवा साबित हो सकती है। लगातार सांस का फूलना दिल की एक गंभीर और छिपी हुई समस्या यानी हार्ट वॉल्व डिजीज (Heart Valve Disease) का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है।
समय पर पहचान और इलाज न मिलने पर यह स्थिति हार्ट फेलियर, अनियमित धड़कन (एरिदमिया) और अचानक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती है।
हार्ट वॉल्व क्या हैं और कैसे काम करते हैं?
मानव हृदय में चार मुख्य चैंबर होते हैं, जिनके बीच रक्त के एकतरफा और सुचारू प्रवाह को बनाए रखने के लिए चार वॉल्व—माइट्रल वॉल्व, एओर्टिक वॉल्व, ट्राइकसपिड वॉल्व और पल्मोनरी वॉल्व काम करते हैं:
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एकतरफा दरवाजा: ये वॉल्व दरवाजे की तरह काम करते हैं, जो दिल के धड़कने पर खुलते हैं ताकि खून आगे बढ़ सके और फिर तुरंत बंद हो जाते हैं ताकि खून उल्टा वापस न लौटे।
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स्टेनोसिस (Stenosis): जब वॉल्व सख्त या संकरे हो जाते हैं, तो खून को आगे भेजने के लिए दिल को बहुत ज्यादा जोर लगाना पड़ता है।
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रेगुर्गिटेशन या लीकेज (Regurgitation): जब वॉल्व ठीक से बंद नहीं होते, तो खून पीछे की तरफ लीक होने लगता है, जिससे फेफड़ों में दबाव बढ़ता है और सांस फूलने लगती है।
हार्ट वॉल्व खराब होने के प्रमुख लक्षण
वॉल्व की समस्या धीरे-धीरे पनपती है और इसके लक्षण शुरुआत में काफी हल्के हो सकते हैं:
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सांस फूलना (Dyspnea): लेटने पर या थोड़ा सा भी चलने-फिरने पर दम घुटना और सांस लेने में भारीपन महसूस होना।
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सीने में भारीपन या दर्द: छाती में जकड़न, दबाव या हल्का दर्द होना।
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चक्कर आना और बेहोशी: मस्तिष्क तक पर्याप्त रक्त न पहुंचने के कारण अचानक सिर घूमना या आंखों के आगे अंधेरा छा जाना।
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पैरों और टखनों में सूजन (Edema): शरीर में तरल पदार्थ जमा होने से पैरों, टखनों और पेट में सूजन आ जाना।
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धड़कनों का तेज होना (Palpitations): दिल की धड़कन का अचानक बहुत तेज या अनियमित महसूस होना और अत्यधिक कमजोरी लगना।
किन कारणों से खराब होते हैं दिल के वॉल्व?
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बचपन का रूमैटिक फीवर: भारत में गले के गंभीर संक्रमण के बाद होने वाला रूमैटिक हार्ट डिजीज (RHD) वॉल्व खराब होने का एक प्रमुख कारण है।
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उम्र और कैल्शियम जमाव: उम्र बढ़ने के साथ वॉल्व पर कैल्शियम जमने लगता है, जिससे वे कड़े हो जाते हैं।
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जन्मजात दोष (Congenital Heart Defect): कई लोगों में जन्म से ही वॉल्व की बनावट असामान्य (जैसे बाइकस्पिड एओर्टिक वॉल्व) होती है।
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हार्ट अटैक या संक्रमण: दिल का दौरा पड़ने से वॉल्व को सहारा देने वाली नसें कमजोर हो सकती हैं या एंडोकार्डाइटिस जैसा बैक्टीरियल संक्रमण वॉल्व को नष्ट कर सकता है।
जांच और आधुनिक इलाज की तकनीकें
यदि किसी व्यक्ति को लगातार सांस फूलने या सीने में भारीपन की शिकायत है, तो उसे तुरंत हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। डॉक्टर स्टेथोस्कोप से हार्ट मर्मर (Heart Murmur) की आवाज सुनकर और 2D इकोकार्डियोग्राफी (2D Echo) जांच के जरिए वॉल्व की स्थिति, लीकेज और सिकुड़न का सटीक पता लगा सकते हैं।
आजकल मेडिकल साइंस में हार्ट वॉल्व के इलाज के लिए अत्याधुनिक और सुरक्षित तकनीकें मौजूद हैं। दवाओं से लक्षणों को नियंत्रित करने के अलावा गंभीर मामलों में वॉल्व रिपेयर या वॉल्व रिप्लेसमेंट किया जाता है। अब कई मामलों में बिना ओपन हार्ट सर्जरी के, केवल पैर की नस के जरिए तार डालकर नया वॉल्व लगाने की TAVR/TAVI जैसी मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाएं भी सफलतापूर्वक की जा रही हैं।
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