नई दिल्ली। अपना खुद का नया घर बनाना हर व्यक्ति का एक बड़ा सपना होता है। घर को मजबूत और खूबसूरत बनाने के लिए लोग दिल खोलकर पैसा खर्च करते हैं। कई बार लोग बजट बचाने या पुरानी लकड़ी को कीमती मानकर नए घर के दरवाजों, खिड़कियों या अलमारी (Wardrobes) में उसका दोबारा इस्तेमाल कर लेते हैं। लेकिन क्या वास्तु शास्त्र में ऐसा करना सही माना गया है?
वास्तु विज्ञान के अनुसार, नए घर में पुरानी लकड़ी का उपयोग करना एक गंभीर दोष पैदा करता है, जो घर के मुखिया और परिवार की तरक्की को रोक सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि लकड़ी को लेकर वास्तु शास्त्र के नियम क्या कहते हैं और घर में किस तरह के पेड़ की लकड़ी का इस्तेमाल करना सबसे उत्तम होता है।
क्या नए घर में पुरानी लकड़ी का इस्तेमाल करना सही है?
वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार, यदि किसी लकड़ी का उपयोग पहले किसी अन्य मकान या काम में हो चुका है, तो उसे नए मकान में दोबारा इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए। वास्तु में इसे बेहद अशुभ माना गया है।
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अशांति और धनहानि: मान्यता है कि पुराने घर की चौखट, दरवाजे या लकड़ी को नए घर में लगाने से संपत्ति का नाश होता है और परिवार में हमेशा मानसिक अशांति बनी रहती है।
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गृहस्वामी को कष्ट: शास्त्रों में यहां तक कहा गया है कि पुरानी लकड़ी से बने घर में गृहस्वामी (घर का मालिक) लंबे समय तक सुख-चैन से नहीं रह पाता है। इसलिए पुराने दरवाजे या खिड़कियों को तोड़कर नई जगह फिट करने के बजाय हमेशा नए घर के लिए नई और शुद्ध लकड़ी का ही चुनाव करें।
नए मकान में कितनी तरह की लकड़ी का करें इस्तेमाल?
अक्सर लोग घर की सजावट के लिए अलग-अलग कमरों में भिन्न-भिन्न प्रकार की लकड़ियों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन वास्तु इसे लेकर एक खास गणना बताता है:
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उत्तम (एक तरह की लकड़ी): वास्तु के अनुसार, पूरे घर के निर्माण और फर्नीचर में केवल एक ही पेड़ की लकड़ी का उपयोग करना सबसे श्रेष्ठ और भाग्यशाली माना जाता है।
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मध्यम (दो तरह की लकड़ी): यदि एक तरह की लकड़ी उपलब्ध न हो, तो अधिकतम दो प्रकार की लकड़ियों का मिश्रण किया जा सकता है, इसे मध्यम फलदायी माना गया है।
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अधम (तीन या अधिक): घर में तीन या उससे अधिक प्रकार की लकड़ियों का मिलाजुलाकर इस्तेमाल करना ‘अधम’ यानी सबसे निम्न श्रेणी का माना जाता है। इससे घर की ऊर्जा असंतुलित होती है।
विशेष नोट: घर में प्रचुर धन-समृद्धि लाने के लिए शीशम, श्रीपर्णी और तिन्दुकी की लकड़ी को अकेले (बिना किसी दूसरी लकड़ी के मिश्रण के) लगाना अत्यंत मंगलकारी और चमत्कारी माना जाता है।
भूलकर भी घर में न लाएं इन पेड़ों की लकड़ियां
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के निर्माण में हर तरह के पेड़ की लकड़ी का उपयोग नहीं किया जा सकता। निम्नलिखित पेड़ों की लकड़ियां घर में नकारात्मकता और बीमारियां लाती हैं:
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जिन पौधों या पेड़ों के पत्तों या टहनियों से दूध (सफेद रस) निकलता हो।
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जिन पेड़ों में तीखे कांटे होते हैं।
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ऐसे पेड़ जहां सांपों का वास हो, जिनमें दीमक लगी हो, या जो किसी समाधि-स्थल, श्मशान भूमि, देव मंदिर, आश्रम, नदियों के संगम या तालाब के किनारे उगे हों।
घर के लिए कौन से वृक्षों की लकड़ी होती है सबसे शुभ?
यदि आप नए घर का काम शुरू करवा रहे हैं, तो सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और दीर्घायु के लिए इन वृक्षों की लकड़ी का चयन करें:
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अशोक, साखू, असना, चंदन, देवदारु, शीशम, अर्जुन, शाल और शमी—इन वृक्षों की लकड़ियों से बने दरवाजे और फर्नीचर घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और परिवार के सदस्यों का भाग्य चमकाते हैं।
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