
बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ अब तेजी से उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए ‘बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान’ (Very Severe Cyclonic Storm) में तब्दील हो रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह चक्रवाती प्रणाली 27 अक्टूबर को समुद्र के ऊपर प्रचंड गति पकड़ लेगी और इसके आगे बढ़ते ही तटीय और प्रायद्वीपीय भारत के विशाल भूभाग पर बादलों की घनी परत छा जाएगी। समुद्र में 60 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी हवाएं चलना शुरू हो चुकी हैं, जिसके चलते समुद्र तटीय इलाकों में लहरें 4 से 5 मीटर ऊंची उठने लगी हैं। 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकराने से पहले ही, 27 अक्टूबर को इस तूफान का व्यापक असर देश के 10 प्रमुख राज्यों के मौसम पर दिखने लगेगा।
मौसम विभाग ने 27 अक्टूबर के लिए देश के 10 राज्यों में व्यापक बारिश, बिजली कड़कने और तूफानी हवाओं का अलर्ट जारी किया है। इस सूची में सबसे संवेदनशील स्थान पर आंध्र प्रदेश और ओडिशा हैं, जहां तटीय जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी कर ‘अत्यधिक भारी बारिश’ की चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही तमिलनाडु, पुडुचेरी/यानम, और तेलंगाना में आकाशीय बिजली चमकने के साथ झमाझम बारिश का दौर शुरू होगा। चक्रवात से उठने वाली नम पूर्वी हवाओं के आंतरिक हिस्सों में खिंचने के कारण पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और पूर्वी मध्य प्रदेश में 27 अक्टूबर की दोपहर बाद से घने बादल छाने और कई स्थानों पर तेज हवाओं के साथ मध्यम से भारी बारिश का सिलसिला शुरू होने का पूर्वानुमान है।
चक्रवात ‘अर्नब’ के सबसे नजदीक होने के कारण तटीय आंध्र प्रदेश (विशेषकर विशाखापट्टनम, काकीनाडा, बापटला, मछलीपट्टनम) और दक्षिण ओडिशा के गंजम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट व मालकानगिरि जिलों में 27 अक्टूबर की सुबह से ही मूसलाधार बारिश और 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने लगेंगी। आपात स्थिति से निपटने के लिए ओडिशा और आंध्र प्रदेश में एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की दर्जनों टीमें तटीय इलाकों में तैनात कर दी गई हैं। निचले इलाकों से लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है और संवेदनशील तटीय क्षेत्रों में स्कूल-कॉलेज बंद रखने के आदेश दे दिए गए हैं। मछुआरों को 29 अक्टूबर तक समुद्र में न उतरने की सख्त हिदायत दी गई है।
मध्य और पूर्वी भारत के राज्यों जैसे बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाकों में 27 अक्टूबर से हवा की दिशा बदलकर नम पुरवाई हो जाएगी। इसके प्रभाव से दिन के समय तेज धूप गायब रहेगी और आसमान में बादलों का डेरा रहेगा। बिहार के सीमावर्ती जिलों और झारखंड में दोपहर बाद गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियां जोर पकड़ेंगी। लगातार बादलों और बूंदाबांदी के कारण इन राज्यों में दिन के तापमान में 3 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे उमस भरी गर्मी से पूरी तरह राहत मिलेगी और शाम होते-होते हल्की ठंडक का अहसास होने लगेगा। वहीं दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब जैसे उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा, लेकिन हवाओं का रुख बदलने से हल्की धुंध और तापमान में हल्की नरमी देखने को मिलेगी।
अक्टूबर के इस महत्वपूर्ण समय में हो रही चक्रवाती बारिश को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सतर्क किया है। आंध्र प्रदेश, ओडिशा, बिहार और पश्चिम बंगाल के किसानों को सलाह दी गई है कि यदि धान की फसल कट चुकी है तो उसे सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं और अनाज मंडियों में खुले में रखी उपज को तिरपाल से ढकें। आंधी-तूफान के दौरान जलभराव की स्थिति बनने पर खेतों से पानी निकालने के प्रबंध पहले से तैयार रखें। इसके अतिरिक्त, खराब मौसम और विजिबिलिटी कम होने के कारण तटीय आंध्र और ओडिशा से गुजरने वाली कई ट्रेनों व उड़ानों के संचालन पर असर पड़ सकता है, इसलिए आम यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले रेलवे और एयरलाइंस के अपडेट अवश्य जांच लें तथा आकाशीय बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे जाने से बचें।
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