
पुणे। दुनिया भर में रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संकट के बीच भारत के वैज्ञानिकों ने बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है। पुणे स्थित CSIR-राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (NCL) के शोधकर्ताओं ने LPG का स्वदेशी और सस्ता विकल्प डाइमिथाइल ईथर (DME) गैस विकसित करने में सफलता पाई है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह गैस एलपीजी की तरह ही जलती है, कम प्रदूषण फैलाती है और मौजूदा कुकिंग गैस इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ भी आसानी से इस्तेमाल की जा सकती है।
इस उपलब्धि को ऊर्जा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि बड़े स्तर पर इसका उत्पादन शुरू हो जाता है तो देश में रसोई गैस की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
20 साल की रिसर्च के बाद मिली बड़ी सफलता
पुणे की नेशनल केमिकल लैबोरेटरी (NCL) के वैज्ञानिक पिछले करीब दो दशकों से इस परियोजना पर काम कर रहे थे। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. तिरुमलाईस्वामी राजा और उनकी टीम ने लंबे शोध के बाद ऐसा फॉर्मूला विकसित किया है, जिससे डाइमिथाइल ईथर गैस का उत्पादन संभव हो पाया है।
फिलहाल प्रयोगशाला स्तर पर शुरू किए गए पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रतिदिन करीब 250 किलोग्राम DME गैस का उत्पादन किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि तकनीक को औद्योगिक स्तर पर अपनाया जाए तो इसका उत्पादन तेजी से बढ़ाया जा सकता है।
LPG की तरह जलती है, प्रदूषण भी कम
वैज्ञानिकों के अनुसार डाइमिथाइल ईथर के गुणधर्म काफी हद तक LPG जैसे ही हैं। यही वजह है कि इसे मौजूदा गैस वितरण व्यवस्था के साथ इस्तेमाल करना आसान हो सकता है।
DME गैस का सबसे बड़ा फायदा यह बताया जा रहा है कि यह पारंपरिक ईंधनों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाती है। इस कारण इसे पर्यावरण के लिए भी अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
LPG में मिलाकर भी किया जा सकेगा उपयोग
शोधकर्ताओं के मुताबिक यदि इस गैस का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होता है तो इसे LPG में लगभग 8 प्रतिशत तक मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे गैस की उपलब्धता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर सफल होती है तो भारत को रसोई गैस के क्षेत्र में बड़ी आर्थिक राहत मिल सकती है। साथ ही घरेलू ईंधन के मामले में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
आयात पर निर्भरता घटाने में मिल सकती है मदद
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में गैस और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता है। ऐसे में यदि DME गैस का उत्पादन देश में बड़े स्तर पर होने लगता है तो इससे विदेशी ईंधन पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने के बाद DME गैस की कीमत LPG से भी कम हो सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
अभी भी सामने हैं कुछ चुनौतियां
हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक को पूरी तरह व्यावसायिक बनाने से पहले कई तकनीकी और औद्योगिक चुनौतियों को पार करना होगा। इसके लिए उद्योगों के साथ साझेदारी और बड़े निवेश की जरूरत पड़ सकती है।
फिर भी वैज्ञानिकों को भरोसा है कि आने वाले समय में यह तकनीक भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है और घरेलू गैस के नए विकल्प के रूप में उभर सकती है।
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