
बिहार की राजधानी पटना स्थित ऐतिहासिक बापू सभागार में आयोजित राजनीतिक सम्मेलन के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा दिए गए एक बयान ने देश की राजनीति में जबरदस्त तूफान खड़ा कर दिया है। एसआईआर (SIR) के मुद्दे पर पहले से ही जारी सियासी खींचतान के बीच खरगे की जुबान से निकले आपत्तिजनक शब्दों ने राजनीतिक मर्यादाओं की बहस को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर सार्वजनिक मंच से की गई टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कांग्रेस पार्टी के खिलाफ चौतरफा हमला बोल दिया है। बीजेपी ने इस पूरे मामले को सीधे तौर पर देश के प्रधानमंत्री के स्वर्गीय पिता और भारतीय सांस्कृतिक संस्कारों का खुला अपमान करार दिया है।
राजनीतिक तापमान उस वक्त अचानक बढ़ गया जब बापू सभागार में अपने संबोधन के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसी जगहों पर जनता द्वारा चुनी गई सरकारों को असंवैधानिक तरीकों से प्रभावित किया गया। इसी भाषण के दौरान दर्शक दीर्घा से जब किसी व्यक्ति ने तेज आवाज में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटाना मुमकिन नहीं है, तो खरगे अपना आपा खो बैठे और उन्होंने अत्यंत अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हुए विवादित टिप्पणी कर दी। इस बयान की वीडियो क्लिप सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर राष्ट्रीय टीवी चैनलों और राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश फैल गया।
कांग्रेस अध्यक्ष के इस विवादित बयान पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बेहद कड़ा और भावुक पत्र साझा करते हुए कांग्रेस पार्टी को आड़े हाथों लिया। अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पटना की धरती पर देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वर्गीय पिताजी पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा की गई यह अभद्र टिप्पणी भारतीय लोकतंत्र की समस्त मर्यादित सीमाओं को पूरी तरह से तार-तार करती है। उन्होंने याद दिलाया कि यह कोई पहला अवसर नहीं है जब कांग्रेस नेतृत्व ने प्रधानमंत्री मोदी या उनके साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले परिवार को निशाना बनाकर अभद्र और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया हो।
गृहमंत्री ने आगे निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी हर बीतते दिन के साथ राजनीतिक शुचिता और शालीनता के न्यूनतम पैमानों को भी ध्वस्त करती जा रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव में लगातार मिलने वाली करारी हारों के चलते हताशा और कुंठा के शिकार कांग्रेसी नेता अब पूरी तरह से वैचारिक दिवालियापन की स्थिति में पहुंच चुके हैं। केंद्रीय गृहमंत्री ने दो टूक कहा कि देश की जनता ऐसे अपमानजनक और अमर्यादित रवैये को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी और लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरगे के इस बयान पर अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि एक उम्रदराज और वरिष्ठ नेता से समाज में संयमित भाषा की उम्मीद की जाती है। किसी भी लोकतांत्रिक देश में किसी दिवंगत व्यक्ति, विशेषकर प्रधानमंत्री के पिता के विषय में ऐसी अशोभनीय शब्दावली का प्रयोग भारतीय सभ्यता, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के सर्वथा विपरीत है। उन्होंने सवाल किया कि क्या मल्लिकार्जुन खरगे ने यह विवादास्पद बयान गांधी परिवार के इशारे पर दिया है, और यदि नहीं, तो क्या कांग्रेस आलाकमान अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस असंसदीय व्यवहार पर उनका इस्तीफा मांगेगा।
वहीं बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मामले की एक और परत खोली। पात्रा ने तंज कसते हुए कहा कि पटना के कार्यक्रम में जब एक कांग्रेसी कार्यकर्ता ने मोदी जी की लोकप्रियता का जिक्र किया, तो खरगे जी अपनी झुंझलाहट नहीं छिपा पाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की लगातार छुट्टियों वाली राजनीति और चुनावी विफलताओं ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा दिया है, जिसका गुस्सा अब खरगे जी के मुंह से अपशब्दों के रूप में बाहर आ रहा है। सांसद अनुराग ठाकुर और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी खरगे के बयान को निंदनीय बताते हुए कहा कि राहुल गांधी की संगत का असर अब खरगे के बयानों में साफ झलक रहा है और कांग्रेस को बिना किसी शर्त के देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
खरगे के इस विवादास्पद बयान के खिलाफ अब कानूनी कार्रवाई का दौर भी शुरू हो चुका है। पटना के स्थानीय थाने में बीजेपी नेता कृष्ण कल्लू ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ बाकायदा एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत पत्र में कहा गया है कि सार्वजनिक मंच से करोड़ों नागरिकों की आस्था के केंद्र प्रधानमंत्री और उनके परिवार के प्रति आपत्तिजनक और अपमानजनक बातें कहकर सामाजिक शांति और सौहार्द को चोट पहुंचाई गई है। पुलिस ने शिकायत को अपने रिकॉर्ड में शामिल कर कानूनी पहलुओं की पड़ताल शुरू कर दी है।
इधर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा कर दी है। 26 अक्टूबर को देश के सभी राज्यों, राजधानियों और जिला मुख्यालयों में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर कांग्रेस के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह राजनीतिक उबाल ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों का इंडिया (I.N.D.I.A.) गठबंधन 1 नवंबर को राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक महारैली करने की योजना बना रहा है। बीजेपी के आक्रामक रुख से विपक्ष बैकफुट पर दिखाई दे रहा है।
बयान को लेकर चौतरफा घिरती देख कांग्रेस पार्टी ने डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू कर दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पार्टी का पक्ष रखते हुए दावा किया कि खरगे के बयान का गलत संदर्भ निकाला जा रहा है। पवन खेड़ा ने अजीबोगरीब दलील पेश करते हुए कहा कि खरगे का आशय किसी व्यक्ति विशेष के जैविक पिता से नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘वैचारिक पिता’ यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके नेतृत्व से था।
खेड़ा ने आरोप लगाया कि बापू सभागार में बीजेपी के कुछ तत्वों ने जानबूझकर व्यवधान डालने की कोशिश की थी और एक सम्मानित दलित नेता के भाषण को बाधित करने का प्रयास किया गया था। हालांकि बीजेपी नेताओं ने पवन खेड़ा के इस बचाव को खारिज करते हुए कहा है कि यह कांग्रेस का अपनी मर्यादाहीन टिप्पणियों पर लीपापोती करने का एक और विफल प्रयास है। पूरे देश में इस समय यह राजनीतिक विवाद शीर्ष चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इसके और अधिक गरमाने के पूरे आसार हैं।
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