पटना। बिहार की सत्ता के गलियारों में इस समय भारी हलचल है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के दिग्गज नेता नितिन नवीन को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। जहां एक ओर नीतीश कुमार के बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफे की खबरें पुख्ता हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर नितिन नवीन के अचानक असम रवाना होने ने नए राजनीतिक कयासों को जन्म दे दिया है। लोग सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में अब यह सवाल पूछने लगे हैं कि क्या बिहार की कमान किसी नए हाथ में जाने वाली है?
नीतीश कुमार का इस्तीफा और जदयू की मैराथन बैठक
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। रविवार को उन्होंने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेताओं के साथ लंबी मंत्रणा की। इस बैठक के बाद बाहर आए नेताओं ने संकेत दिए कि मुख्यमंत्री कल अपना इस्तीफा दे देंगे। गौरतलब है कि नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं, जिसके चलते उन्हें राज्य विधानमंडल की सदस्यता छोड़नी होगी। हालांकि, वे मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे या नहीं, इसे लेकर भी स्थिति साफ होती दिख रही है।
नितिन नवीन का ‘सरप्राइज’ मूव: क्या बनेंगे बिहार के सीएम?
सबसे ज्यादा चर्चा नितिन नवीन को लेकर हो रही है। रविवार सुबह उनके विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देने की पूरी तैयारी थी। यहां तक कि विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार अपना दिल्ली दौरा बीच में छोड़कर विशेष रूप से पटना पहुंचे थे। विधानसभा सचिवालय को छुट्टी के दिन भी खुला रखा गया था। लेकिन ऐन वक्त पर नितिन नवीन विधानसभा जाने के बजाय एयरपोर्ट पहुंच गए और असम के लिए उड़ान भर ली। उनके इस कदम ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। चर्चा है कि उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जिससे ‘भावी मुख्यमंत्री’ की अटकलें तेज हो गई हैं।
क्या कहते हैं नियम: कब तक देना होगा इस्तीफा?
संविधान के अनुच्छेद 101-2 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक साथ संसद और राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं रह सकता। 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद दोनों नेताओं को अपनी वर्तमान सदस्यता छोड़नी है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार का कहना है कि इस्तीफा 30 मार्च तक हो जाना चाहिए, लेकिन कानूनी बारीकियां कुछ और कहती हैं।
गजट नोटिफिकेशन और 14 दिनों की मियाद
विशेषज्ञों के अनुसार, ‘प्रोहिबिशन ऑफ सिमुल्टनियस मेंबरशिप रूल्स 1950’ के तहत, इस्तीफा देने की 14 दिनों की समय सीमा निर्वाचन की तारीख से नहीं, बल्कि गजट नोटिफिकेशन के प्रकाशन की तारीख से गिनी जाती है। चूंकि अभी राज्यसभा चुनाव परिणामों का गजट प्रकाशित नहीं हुआ है, इसलिए तकनीकी रूप से उनके पास अभी समय है। ऐसे में 30 मार्च तक इस्तीफा न देने पर सदस्यता जाने का डर फिलहाल निराधार नजर आता है।
मुख्यमंत्री की कुर्सी और नीतीश कुमार का भविष्य
नीतीश कुमार कब मुख्यमंत्री पद छोड़ेंगे, यह बिहार का सबसे बड़ा सवाल है। सूत्रों का दावा है कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह में वे अपनी कुर्सी छोड़ सकते हैं। हालांकि, संवैधानिक रूप से अनुच्छेद 164 (4) उन्हें विधानमंडल का सदस्य न रहते हुए भी 6 महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की अनुमति देता है। लेकिन कयास यही हैं कि राज्यसभा की शपथ लेने के साथ ही बिहार की राजनीति में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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