पश्चिम बंगाल की सत्ता में हुए तख्तापलट का असर अब खेल जगत की दिग्गज हस्तियों पर भी दिखने लगा है। राज्य की नई शुभेंदु अधिकारी सरकार ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और ‘दादा’ के नाम से मशहूर सौरव गांगुली की सुरक्षा में बड़ी कटौती कर दी है। ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल के दौरान गांगुली को मिली ‘Z’ (जेड) कैटेगरी की सुरक्षा को अब घटाकर ‘Y’ (वाई) कैटेगरी का कर दिया गया है। फिलहाल सौरव गांगुली क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
सत्ता बदलते ही सुरक्षा का हुआ रिव्यू, राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज
गांगुली की सुरक्षा में की गई इस अचानक कटौती के बाद बंगाल के राजनीतिक हल्कों में तरह-तरह की चर्चाएं और कयासबाजियां तेज हो गई हैं। हालांकि, इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए शुभेंदु सरकार की तरफ से एक आधिकारिक बयान जारी किया गया है। सरकार का कहना है कि वीआईपी (VIP) सुरक्षा केवल उन्हीं व्यक्तियों को दी जाएगी, जिनकी जान को सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट में वास्तव में कोई खतरा बताया गया हो।
गौरतलब है कि नई सरकार के गठन के बाद पश्चिम बंगाल की सुरक्षा एजेंसियों ने राज्य की कई प्रमुख हस्तियों को मिली सुरक्षा की नए सिरे से समीक्षा (Review) की थी। इसी असेसमेंट के आधार पर सौरव गांगुली की सुरक्षा आवश्यकताओं का दोबारा मूल्यांकन किया गया और उनकी सुरक्षा श्रेणी को संशोधित करने का निर्णय लिया गया।
‘Z’ से ‘Y’ कैटेगरी में आने पर क्या बदलेगा? जानिए सुरक्षा का गणित
सुरक्षा श्रेणी में हुए इस बदलाव के बाद सौरव गांगुली के सुरक्षा घेरे में भारी कमी आएगी। साल 2023 में तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार ने गांगुली की सुरक्षा को वाई कैटेगरी से बढ़ाकर जेड कैटेगरी का कर दिया था।
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Z कैटेगरी में क्या मिलता था: इस सुरक्षा घेरे के तहत दादा की सुरक्षा में हर समय 30 से 35 पुलिसकर्मी तैनात रहते थे और उनके काफिले के साथ एक एस्कॉर्ट/पायलट वाहन भी चलता था।
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Y कैटेगरी में अब क्या मिलेगा: अब वाई श्रेणी की सुरक्षा मिलने के बाद उनके साथ तैनात सुरक्षाकर्मियों की संख्या घटकर केवल 11 रह जाएगी। इस घेरे में केवल दो पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर्स (PSO) शामिल होते हैं और काफिले से एस्कॉर्ट गाड़ियां हट जाती हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश में सबसे वीआईपी सुरक्षा ‘Z+’ (जेड प्लस) मानी जाती है, जिसमें 36 सुरक्षाकर्मी (जिसमें 10 एसपीजी या एनएसजी कमांडो और बाकी राज्य पुलिस के जवान) तैनात होते हैं।
क्रिकेट के ‘महाराज’ ने हमेशा बनाए रखी है राजनीति से दूरी
सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे आक्रामक और सफल कप्तानों में गिने जाते हैं। उनकी कप्तानी के दौर को भारतीय क्रिकेट का ‘स्वर्ण काल’ माना जाता है, क्योंकि उन्होंने टीम को विदेशों में जीतना सिखाया और युवराज सिंह, मोहम्मद कैफ, वीरेंद्र सहवाग और हरभजन सिंह जैसे नए टैलेंट्स को तराशा।
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी दादा का जलवा कम नहीं हुआ। उन्होंने क्रिकेट प्रशासक के रूप में शानदार पारी खेली और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष पद को संभाला। वर्तमान में वह बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के मुखिया हैं। दिलचस्प बात यह है कि पश्चिम बंगाल के हर विधानसभा या लोकसभा चुनाव के दौरान तमाम बड़े राजनीतिक दलों ने सौरव गांगुली को अपने पाले में लाने की पुरजोर कोशिश की, लेकिन ‘कैप्टन कूल’ की तरह दादा ने हमेशा सियासत की पिच से एक सुरक्षित दूरी बनाए रखी है।
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