
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के राजनीतिक गलियारों और सूबे की राजधानी लखनऊ से इस वक्त कांग्रेस पार्टी (Congress Party) की रणनीति को लेकर एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के भीतर आगामी चुनावों और राजनीतिक माहौल को पूरी तरह से गरमाने के लिए एक बेहद आक्रामक अभियान का शंखनाद कर दिया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार पूरे राज्य में आगामी 2 से 8 अक्टूबर तक ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ (Loktantra Bachao Saptah) बहुत ही भव्य और व्यापक स्तर पर मनाया जाएगा। इस विशेष राजनीतिक अभियान के तहत राज्य के सभी 75 जिलों और तहसीलों में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ (Vote Bachao, Desh Bachao) के नारे के साथ जोरदार मार्च निकालेंगे और जनसंपर्क अभियान चलाएंगे। पार्टी का यह मानना है कि देश और प्रदेश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को जिस तरह से कमजोर किया जा रहा है और चुनावी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं, उसके खिलाफ आम जनता को जागरूक करना इस वक्त सबसे बड़ी जरूरत है। आज के इस विस्तृत, राजनीतिक विश्लेषणात्मक और जमीनी आलेख में हम आपको कांग्रेस के इस नए राष्ट्रव्यापी व प्रांतीय अभियान, इसकी रूपरेखा और इसके राजनीतिक दूरगामी प्रभावों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।
2 से 8 अक्टूबर तक चलने वाले इस ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ की मुख्य रूपरेखा और कार्यक्रम
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पावन जयंती यानी 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस सप्ताह भर के विशेष राजनीतिक कार्यक्रम के लिए उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने एक बहुत ही ठोस और मजबूत रणनीति तैयार की है। प्रदेश के हर जिला मुख्यालय, महानगरों, कस्बों और न्याय पंचायत स्तर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, विधायक, फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारी और जमीनी कार्यकर्ता इकट्ठा होकर सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ मार्च मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा, जिसमें हजारों की संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता तख्तियों, बैनरों और झंडों के साथ शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए जनता तक पार्टी का संदेश पहुंचाएंगे। इसके साथ ही जिला मुख्यालयों पर नुक्कड़ सभाओं, विचार गोष्ठियों और सेमिनार का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर चर्चाएं की जाएंगी ताकि आम नागरिकों के बीच सीधे तौर पर संवाद स्थापित किया जा सके।
मतदान अधिकारों की रक्षा और चुनावी पारदर्शिता को लेकर कांग्रेस का कड़ा रुख
इस पूरे अभियान का सबसे अहम और मुख्य केंद्र बिंदु लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत यानी आम जनता के मताधिकार (Voting Rights) की रक्षा करना और चुनावी प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता की मांग उठाना है। कांग्रेस पार्टी का यह आरोप रहा है कि प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग करके और मतदाता सूचियों में गड़बड़ी पैदा करके लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जिसके खिलाफ अब पार्टी ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ मार्च के माध्यम से कांग्रेस यह संदेश देने की पुरजोर कोशिश कर रही है कि हर एक नागरिक का वोट उसकी सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ढाल है, और यदि वोट के अधिकार पर ही पहरा बैठने लगे तो देश का संविधान खतरे में पड़ जाता है। इस जमीनी अभियान के जरिए पार्टी युवाओं, महिलाओं, दलितों, पिछड़ों और समाज के हर वर्ग के लोगों को यह समझाने का प्रयास करेगी कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव में न आएं।
उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों के बीच अपनी जमीन मजबूत करने का बड़ा सियासी दांव
राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि उत्तर प्रदेश में अपनी खोई हुई सियासी जमीन को वापस पाने और कैडर बेस को फिर से सक्रिय करने के लिए कांग्रेस का यह सड़क पर उतरने वाला फैसला बेहद महत्वपूर्ण और समयोचित कदम है। पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्षेत्रीय दलों और सत्ताधारी दल के बीच मुख्य मुकाबला देखा जा रहा था, ऐसे में कांग्रेस पार्टी इस राष्ट्रव्यापी और प्रांतीय अभियान के जरिए खुद को मुख्य विपक्षी ताकत के रूप में मजबूती से स्थापित करने की फिराक में है। 2 अक्टूबर से शुरू होने वाला यह सप्ताह भर का कार्यक्रम न केवल पार्टी के कार्यकर्ताओं में एक नया जोश और ऊर्जा भरने का काम करेगा, बल्कि यह आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के जनाधार का एक बड़ा लिटमस टेस्ट भी साबित होगा। राज्य के सभी जिलों में एक साथ इस प्रकार का बड़ा आंदोलन खड़ा करना कांग्रेस की सांगठनिक क्षमता को भी परखने का एक बेहतरीन मौका होगा।
जनता के बीच जाकर संवाद बनाने की रणनीति कितना लाएगी रंग?
बंद कमरों की बैठकों और सोशल मीडिया की बयानबाजी से बाहर निकलकर सीधे जनता के बीच चौपाल लगाने और मार्च निकालने की यह पुरानी और असरदार कांग्रेस शैली एक बार फिर से मैदान में उतरती हुई दिखाई दे रही है। महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन जैसे तमाम मुद्दों को एक साथ जोड़कर जनता के सामने ले जाने से निश्चित रूप से राजनीतिक माहौल में गर्माहट आएगी। आगामी 8 अक्टूबर तक चलने वाले इस ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ के समापन पर पार्टी के बड़े नेता राजधानी लखनऊ में एक बड़ी समीक्षा बैठक करेंगे और आगे के राजनीतिक आंदोलनों की रूपरेखा तय करेंगे। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस का यह नया तेवर आने वाले दिनों में क्या नया भूचाल लाता है और जनता इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस अभियान ने सूबे के राजनीतिक पारे को अभी से काफी तेज कर दिया है।
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