
इंडो-पैसिफिक (दक्षिण-पूर्वी एशिया) क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता और समुद्री विस्तारवाद के बीच भारत ने आसियान (ASEAN) देशों के साथ अपने रक्षा और रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय रक्षा संवाद और रणनीतिक वार्ता के दौरान भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह आसियान मित्र राष्ट्रों की सुरक्षा, संप्रभुता और समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए हर संभव सैन्य सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत ने वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे सदस्य देशों को आधुनिक स्वदेशी ड्रोन, उन्नत तटीय रडार प्रणाली (Coastal Radar Systems) और अटैक व यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (Helicopters) की आपूर्ति करने की बड़ी पेशकश की है। भारत के इस ऐतिहासिक और साहसिक कदम को इंडो-पैसिफिक रीजन में चीन के बढ़ते प्रभाव को सीधे चुनौती देने और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा निर्यात को पंख लगाने के रूप में देखा जा रहा है।
दक्षिण चीन सागर (South China Sea) और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन का रुख हमेशा से विवादित और आक्रामक रहा है। 9-डैश लाइन का हवाला देकर चीन पूरे समुद्री क्षेत्र पर अपना एकाधिकार जताता आया है, जिससे फिलीपींस, मलेशिया, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों की क्षेत्रीय संप्रभुता लगातार खतरे में रही है। ऐसे नाजुक मोड़ पर भारत का यह ऐलान चीन के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है। भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ (Act East Policy) और ‘सागर’ (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) दृष्टि के तहत नई दिल्ली अब केवल भाषणों तक सीमित न रहकर ज़मीनी स्तर पर सैन्य हार्डवेयर और क्षमता निर्माण में इन देशों की मदद कर रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आसियान देश भारतीय सैन्य उपकरणों से लैस होते हैं, तो वे अपनी समुद्री सीमाओं की बेहतर निगरानी कर सकेंगे और चीन की नौसैनिक दादागिरी का मुंहतोड़ जवाब दे सकेंगे।
भारत ने आसियान देशों के सामने स्वदेशी रक्षा उद्योग द्वारा तैयार किए गए उच्च गुणवत्ता वाले सैन्य उपकरणों का एक विस्तृत पैकेज पेश किया है। इसमें लंबी दूरी तक टोही मिशन और निगरानी करने वाले यूएवी (UAV Drones), समुद्र की लहरों पर दुश्मन की हर हरकत को पकड़ने वाला ‘कोस्टल सर्वाइलांस रडार सिस्टम’ (CSRS) और एचएएल (HAL) द्वारा निर्मित एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर ‘ध्रुव’ व लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ शामिल हैं। इससे पहले भारत द्वारा फिलीपींस को ब्रह्मोस (Brahmos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की सफल आपूर्ति के बाद अब आसियान देशों का भारतीय रक्षा तकनीकों पर भरोसा अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। भारत की यह रणनीति न केवल मित्र देशों की रक्षा प्रणाली को सशक्त बनाएगी, बल्कि भारत के घरेलू रक्षा निर्माण क्षेत्र को अरबों डॉलर का वैश्विक बाजार भी मुहैया कराएगी।
भारत ने इस वार्ता के दौरान एक बार फिर वैश्विक मंचों पर ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ (Freedom of Navigation) और ‘रूल ऑफ लॉ’ (Rule of Law) की वकालत की है। भारतीय रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सभी देशों को निर्बाध आवाजाही और व्यापार करने का पूरा अधिकार है, जिसे कोई भी एक महाशक्ति अपनी मनमर्जी से नहीं रोक सकती। आसियान देशों ने भी भारत के इस रुख का जोरदार स्वागत किया है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में क्वाड (QUAD) और आसियान के बीच बनता यह नया सुरक्षा तालमेल न केवल समुद्री डकैती, अवैध मत्स्य पालन और आपदा प्रबंधन में मददगार साबित होगा, बल्कि शक्ति संतुलन (Balance of Power) को भी भारत और उसके सहयोगी देशों के पक्ष में झुका देगा।
आज के डिजिटल, गूगल, बिंग और आधुनिक एआई सर्च (GEO) के युग में भारत और आसियान के बीच हुआ यह ऐतिहासिक रक्षा समझौता वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आ गया है। वैश्विक थिंक-टैंक और एआई ट्रेंड्स यह साफ दर्शाते हैं कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक में सुरक्षा प्रदाता (Net Security Provider) के रूप में स्थापित हो चुका है। चीन की आर्थिक व सैन्य घेराबंदी को मात देने के लिए भारत का यह ‘ड्रोन-रडार-चॉपर’ फॉर्मूला वैश्विक कूटनीति की किताबों में एक नया अध्याय लिख रहा है।
The News 11 – Hindustan Newspaper, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया