दिल्ली समेत सभी महानगरों में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बड़ा उछाल—सरकार का बयान, हवाई किराया कितना महंगा हो सकता है जानिए पूरी खबर

नई दिल्ली, 1 अप्रैल 2026—देश के प्रमुख महानगरों सहित दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF/जेट फ्यूल) की कीमतों में आज अचानक वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे विमानन उद्योग और यात्रियों की चिंताएं बढ़ गई हैं. ग्लोबल तेल संकट और मध्य पूर्व के तनाव के बीच यह कदम उठाया गया है, जिसका प्रभाव अब भारत में स्पष्ट रूप से दिख रहा है.

ATF की बढ़ी कीमतें: रिकॉर्ड तोड़ उछाल

तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा जारी नवीनतम डेटा के अनुसार, दिल्ली में ATF यानी जेट फ्यूल की कीमत पहले के ₹96,638 प्रति किलोलीटर से बढ़कर लगभग ₹2,07,341 प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई है, जो कि मात्रा में 100% से अधिक की वृद्धि है—यह इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि मानी जा रही है. अन्य महानगरों जैसे मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में भी समान पैटर्न में कीमतें बढ़ीं हैं.

विमानन उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक यह उछाल दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि और यूएस–इजराइल–ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधाओं के चलते आया है. इस संघर्ष ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में पारगमन को प्रभावित किया है, जिससे आपूर्ति और परिवहन लागत पर दबाव बढ़ा है.

सरकार ने क्या कहा—महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण

सरकार और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने इस वृद्धि के आंकड़ों को लेकर स्पष्ट किया है कि वास्तविक वृद्धि दर 115% नहीं बल्कि लगभग 8.5% की औपचारिक वृद्धि है, और कुछ प्रारंभिक रिपोर्टों में आंकड़े गलत प्रकाशित हुए थे. हालांकि, वास्तविक रूप से कीमत आज भी पिछले महीने की तुलना में काफी बढ़ी हुई है.

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक कदम में घरेलू एयरलाइंस के लिए ATF के मंथली रेट में 25% तक की वृद्धि को नियत किया है ताकि बेहद अस्थिर अंतरराष्ट्रीय बाजारों के प्रभाव को कम किया जा सके और एयरफेयर में तेज उछाल से यात्रियों को बचाया जा सके.

विमानन उद्योग पर असर

विशेषज्ञ बताते हैं कि ईंधन सस्ता नहीं रहा तो हवाई किराया (Airfare) पर भी बढ़ोतरी होने की संभावना है क्योंकि ATF एयरलाइंस के कुल खर्च का एक बड़ा हिस्सा होता है. हालांकि, कुछ कंपनियां शुरुआती चरण में किराया सीधे बढ़ाने की बजाय ईंधन लागत को अवशोषित करने की रणनीति अपना रही हैं.

इस फैसले का अर्थ क्या है?

  • ATF की वृद्धि यात्रियों के लिए विशेष रूप से इंडिया–मेट्रो रूट्स में महंगे टिकट का कारण बन सकती है.
  • सरकार द्वारा निर्धारित उपरी सीमा रेखा (25%) ने उद्योग को एक राहत दी है, जिससे कीमतें पूर्ण रूप से बाज़ार के दबाव के अनुरूप नहीं बढ़ सकीं.
  • वैश्विक तेल संकट के बीच घरेलू विमानन कंपनियों को वित्तीय दबाव से बचाने का प्रयास जारी है.

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