अनिल अंबानी को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा झटका: बैंकों के लिए ‘फ्रॉड’ घोषित करने का रास्ता साफ, अदालत ने कहा- सिंगल जज का आदेश ‘गैरकानूनी’

मुंबई। कर्ज के जाल में फंसे रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए उद्योगपति अनिल अंबानी को मिली अंतरिम राहत को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अदालत ने बैंकों को उनके खिलाफ धोखाधड़ी (Fraud) के मामले में कार्रवाई फिर से शुरू करने की हरी झंडी दे दी है। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के पुराने आदेश को ‘Illegal and Perverse’ (गैरकानूनी और विकृत) बताते हुए रद्द कर दिया है।

क्या था मामला और क्यों मिली थी राहत?

यह पूरा विवाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की 2024 की ‘मास्टर डायरेक्शंस ऑन फ्रॉड क्लासिफिकेशन’ गाइडलाइंस से जुड़ा है। दरअसल, दिसंबर 2025 में एक सिंगल जज बेंच ने अनिल अंबानी को बड़ी राहत दी थी। तब अदालत ने बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक और IDBI बैंक को अंबानी के खिलाफ कार्रवाई करने से रोक दिया था। राहत का आधार यह था कि फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने वाले BDO LLP के हस्ताक्षरकर्ता चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) नहीं थे। इस तकनीकी खामी के चलते बैंकों की कार्रवाई पर स्टे लगा दिया गया था।

हाई कोर्ट ने फटकारा, बैंकों की दलील को माना सही

सिंगल जज के इस फैसले के खिलाफ तीनों बैंकों ने डिवीजन बेंच में अपील की थी। बैंकों की दलील थी कि फोरेंसिक ऑडिट पूरी तरह वैध है और इसमें फंड के गलत इस्तेमाल (Siphoning of funds) के पुख्ता सबूत मिले हैं। डिवीजन बेंच ने बैंकों के तर्क से सहमति जताते हुए कहा कि निचली अदालत का फैसला कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऑडिट प्रक्रिया में कोई ऐसी खामी नहीं थी जिसके आधार पर बैंकों को उनके अधिकारों से वंचित किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट जाने की मोहलत भी नहीं मिली

अदालत के इस कड़े रुख के बाद अनिल अंबानी की कानूनी टीम ने हाई कोर्ट से इस फैसले पर कुछ समय के लिए स्टे (रोक) लगाने की मांग की, ताकि वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकें। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस अनुरोध को सिरे से ठुकरा दिया। इसका मतलब यह है कि अब बैंकों के पास अनिल अंबानी के खातों को ‘फ्रॉड’ घोषित करने और बकाया वसूली के लिए कड़े कानूनी कदम उठाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

अब आगे क्या होगा?

इस फैसले के बाद अब बैंक आरबीआई के नियमों के तहत अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों के खिलाफ फ्रॉड क्लासिफिकेशन की प्रक्रिया को अंजाम दे सकेंगे। यदि खाते फ्रॉड घोषित होते हैं, तो न केवल बैंकिंग लेनदेन पर असर पड़ेगा, बल्कि केंद्रीय जांच एजेंसियां भी इस मामले में अपनी जांच का दायरा बढ़ा सकती हैं। अंबानी के लिए यह फैसला उनके कारोबारी साम्राज्य को बचाने की कोशिशों के बीच एक गंभीर कानूनी अड़चन माना जा रहा है।

Check Also

राज्यसभा में मची सनसनी: मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को दिया खुला चैलेंज, बोले- ‘क्या आपमें हिम्मत है कि…

भारतीय संसद का उच्च सदन यानी राज्यसभा हमेशा से ही देश के सबसे गंभीर वैचारिक …