
ज्योतिष शास्त्र में धन, ज्ञान, विद्या, संतान और विवाह के कारक ग्रह देवगुरु बृहस्पति वर्तमान में अतिचारी अवस्था में होने के साथ-साथ अस्त चल रहे हैं, जो 9 अगस्त तक इसी स्थिति में रहेंगे। जब गुरु ग्रह अस्त होते हैं, तो उनके शुभ प्रभावों में कमी आती है और अशुभ प्रभाव बढ़ने लगते हैं। गुरु की अतिचारी गति (सामान्य से अधिक तेज चाल) के कारण कई जातकों को अचानक निर्णय लेने में कठिनाई और बने-बनाए कार्यों में अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है।
अतिचारी गुरु के अस्त होने का क्या है अर्थ?
गुरु ग्रह इस समय कर्क राशि में विराजमान हैं, जहाँ वे उच्च के माने जाते हैं। सामान्यतः गुरु एक वर्ष में राशि परिवर्तन करते हैं, लेकिन अतिचारी होने पर वे एक ही वर्ष में एक से अधिक बार राशि बदलते हैं (अक्टूबर में गुरु सिंह राशि में प्रवेश करेंगे)। उच्च राशि में अतिचारी और अस्त होने की यह स्थिति जातक के जीवन में अचानक और अनपेक्षित बदलाव लाती है। इस दौरान कोई भी बड़ा वित्तीय या व्यावसायिक फैसला लेने से पूर्व अत्यधिक विचार-विमर्श की आवश्यकता है।
इन 4 राशियों को रहना होगा बेहद सतर्क
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मेष राशि: आर्थिक मोर्चे पर तंगी या अचानक धन हानि का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान बड़े निवेश, शेयर बाजार और पैसों के लेन-देन से दूरी बनाए रखना ही श्रेयस्कर होगा।
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कर्क राशि: भले ही गुरु आपकी ही राशि में उच्च के हैं, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। किसी भी कार्य में जल्दबाजी न करें, वाद-विवाद से दूर रहें और संयम से काम लें।
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तुला राशि: करियर और फाइनेंस में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। नौकरीपेशा लोगों को दफ्तर में सतर्क रहना होगा, सहकर्मियों या वरिष्ठ अधिकारियों से बहस करने से बचें।
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मकर राशि: लव लाइफ और दांपत्य जीवन में गलतफहमियां बढ़ सकती हैं। पार्टनर के साथ मतभेद गहरा सकते हैं, इसलिए संवादहीनता से बचें और ठंडे दिमाग से निर्णय लें।
अशुभ प्रभावों से बचने के सरल और अचूक उपाय
अतिचारी और अस्त गुरु के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए प्रत्येक गुरुवार को चने की दाल, पीले वस्त्र या पीले फल का दान करें। इसके साथ ही नियमित रूप से केले के वृक्ष की पूजा करें और जल अर्पित करें।
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