Edible Oil Consumption in India: स्वाद के चक्कर में हम अपनी थाली में सेहत को कितनी बार नजरअंदाज कर देते हैं? हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना में एक जनसभा के दौरान देशवासियों से खाद्य तेल की खपत कम करने की विशेष अपील की है। पीएम मोदी ने न केवल तेल के उपयोग को सीमित करने की सलाह दी, बल्कि ईंधन बचाने और विदेशी मुद्रा के संरक्षण पर भी जोर दिया। आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में तेल की बढ़ती खपत अब केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गई है।
दोगुनी से भी ज्यादा हुई प्रति व्यक्ति तेल की खपत
भारत में पिछले कुछ दशकों में खाद्य तेल की खपत का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022-23 में भारत में प्रति व्यक्ति औसत खाद्य तेल की खपत 19.50 लीटर दर्ज की गई। यदि हम वर्ष 2014-15 के आंकड़ों को देखें, तो यह 18.3 लीटर प्रति व्यक्ति थी। वहीं, 2020-21 में यह आंकड़ा बढ़कर 18.7 लीटर हो गया। पिछले दो वर्षों (2020-21 से 2022-23) में ही इसमें 0.80 लीटर की वृद्धि हुई है, जो यह साबित करता है कि तमाम स्वास्थ्य चेतावनियों के बावजूद हम तेल के उपयोग को नियंत्रित करने में विफल रहे हैं।
स्वाद बनाम सेहत: बदलती जीवनशैली का असर
हमारी पारंपरिक पाक कला धीरे-धीरे तेल-मसाले वाली आधुनिक जीवनशैली की ओर झुक गई है। जंक फूड और डीप फ्राइड (तले हुए) खाद्य पदार्थों के प्रति बढ़ते आकर्षण ने हमारी डाइट में तेल की मात्रा को खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की अधिक मात्रा हृदय रोगों, मोटापे और मधुमेह जैसी बीमारियों को सीधा न्योता देती है।
आर्थिक पहलू: देश की तिजोरी पर भी दबाव
पीएम मोदी की इस अपील के पीछे एक बड़ा आर्थिक कारण भी छिपा है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा विदेश से आयात करता है। इसमें ताड़ के तेल (पाम ऑयल) का योगदान सबसे ज्यादा है, जो देश में उत्पादित नहीं होता। जितना अधिक हम तेल की खपत करते हैं, उतनी ही अधिक विदेशी मुद्रा इसके आयात पर खर्च होती है। विदेशी मुद्रा को बचाने और चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को कम करने के लिए तेल की खपत पर लगाम लगाना अब राष्ट्रीय हित की मांग बन गया है।
पीएम मोदी की सलाह: संयम ही है विकल्प
प्रधानमंत्री ने न केवल तेल कम खाने की बात कही, बल्कि लोगों को जीवनशैली में बदलाव लाने का मंत्र भी दिया। उन्होंने लोगों से एक साल तक अनावश्यक सोना न खरीदने, ईंधन बचाने और विदेशी दौरों से परहेज करने का भी आग्रह किया ताकि देश आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सके। स्वस्थ रहने और राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अब समय आ गया है कि हम अपनी थाली से ‘अतिरिक्त तेल’ को अलविदा कहें।
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