अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान की रकम की चोरी (Ram Mandir Scam 2026) का मामला अब बेहद गरमा गया है। इस महाघोटाले की गाज गिरने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय (Champat Rai) का एक कथित पत्र सामने आया है। विशेष जांच दल (SIT) को लिखा गया यह पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने राम मंदिर ट्रस्ट के अंदरूनी विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के एक नए दौर को जन्म दे दे दिया है।
इस कथित पत्र में चंपत राय ने बेहद चौंकाने वाले दावे करते हुए दान की गिनती के लिए बनाए गए दिशा-निर्देशों (SoP) से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है। उन्होंने साफ कहा है कि पैसों की गिनती के विवादास्पद तरीके उनके द्वारा नहीं, बल्कि ट्रस्ट के अन्य सदस्यों और बैंक अधिकारियों द्वारा तय किए गए थे।
एसओपी (SOP) पर मेरे हस्ताक्षर नहीं, मुझे अंधेरे में रखा गया: चंपत राय
चंपत राय ने एसआईटी को भेजे गए अपने कथित पत्र में लिखा है कि जांच एजेंसी के दस्तावेजों में 6 फरवरी 2025 का एक कागज शामिल है, जो दान राशि की गणना प्रक्रिया के लिए निर्धारित दिशा-निर्देश (SOP) है।
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किनके हैं हस्ताक्षर: चंपत राय का दावा है कि इस एसओपी पर केवल ट्रस्ट के न्यासी (Trustee) डॉ. अनिल मिश्रा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक गोविंद मिश्र के ही हस्ताक्षर हैं।
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देरी से मिली जानकारी: पत्र में आगे लिखा है, “दस्तावेजों में दर्शाया गया है कि इसकी एक कॉपी महासचिव (मुझे) को भेजी गई थी। लेकिन वास्तविकता यह है कि मुझे इस पत्र की भनक एक साल बाद यानी 13 जून 2026 को अपने एकाउंट ऑफिस से लगी। मैं इस एसओपी से कतई सहमत नहीं हूं और इसे पूरी तरह अस्वीकार करता हूं।”
‘अगर मैं अयोध्या में नहीं था, तो मेरा इंतजार क्यों नहीं किया गया?’
पूर्व महासचिव ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पत्र में तर्क दिया है कि अगस्त 2020 से लेकर जून 2026 तक राम मंदिर से जुड़े जितने भी आधिकारिक अनुबंध (Agreements) या समझौते हुए, उन सभी पर केवल उनके और संबंधित दूसरी पार्टी के प्रमुख अधिकारी के ही हस्ताक्षर मौजूद हैं।
ऐसे में दान की गिनती जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय पर बने दिशा-निर्देश वाले पत्र पर उनके हस्ताक्षर क्यों नहीं कराए गए? चंपत राय ने पूछा कि यदि वे उस समय अयोध्या में उपस्थित नहीं थे, तो उनके आने का इंतजार क्यों नहीं किया गया और उनके बिना ही नियम क्यों फाइनल कर दिए गए?
एसआईटी (SIT) की जांच में खुली पोल: जानबूझकर ढीले किए गए सुरक्षा नियम
दान चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में गणना प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर खामियां उजागर की हैं। एसआईटी की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
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निजी सुरक्षा में लापरवाही: ट्रस्ट ने मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए ‘एसआईएस’ (SIS) नाम की एक प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी से कांट्रैक्ट किया था। नियम के मुताबिक, दान की गिनती वाले कमरे के ठीक बाहर एक एसआईएस गार्ड की तैनाती अनिवार्य थी, जिसका काम पूरी प्रक्रिया की लाइव निगरानी करना था। लेकिन ट्रस्ट ने इस नियम का कड़ाई से पालन नहीं होने दिया।
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तलाशी के कड़े नियम बदले: फरवरी 2024 में ट्रस्ट और एसबीआई के बीच हुए समझौते (MoU) के अनुसार, मंदिर के चढ़ावे की गिनती और उसे बैंक ले जाते समय सुरक्षा का पूरा जिम्मा ट्रस्ट का था। ट्रस्ट के अधिकारियों का कर्तव्य था कि वे गिनती कक्ष (Counting Room) में आने-जाने वाले हर कर्मचारी की एसआईएस गार्ड्स के जरिए सघन तलाशी (Frisking) करवाएं।
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6 फरवरी 2025 का खेल: एसआईटी के मुताबिक, 6 फरवरी 2025 को ट्रस्ट और बैंक अधिकारियों ने आपसी सहमति से इस तलाशी के कड़े नियमों को बेहद शिथिल (कमजोर) कर दिया था। पहले जहां हर बार आने-जाने वाले की नियमित जांच का प्रावधान था, उसे बदलकर महज ‘अचानक तलाशी’ (सप्राइज चेकिंग) में तब्दील कर दिया गया, जिसका फायदा उठाकर आरोपियों ने दान के करोड़ों रुपयों पर हाथ साफ कर दिया।
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