मुंबई: मायानगरी मुंबई में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने अब एक बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले लिया है। शहर के कई इलाकों में हुए भारी जलजमाव और गंदगी के कारण डेंगू, लेप्टोस्पायरोसिस और स्वाइन फ्लू (H1N1) जैसी जानलेवा बीमारियों के मामलों में अचानक तेज उछाल आया है। मानसून की मार झेल रहे मुंबईकरों के लिए यह दोहरी मुसीबत बन चुका है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने पूरे शहर में अलर्ट जारी कर नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
मुंबई में क्यों तेजी से फैल रहा है लेप्टोस्पायरोसिस और डेंगू?
मुंबई के निचले इलाकों में पिछले कई दिनों से पानी जमा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ या जमा हुए गंदे पानी और कीचड़ के संपर्क में आने से लेप्टोस्पायरोसिस (Leptospirosis) बीमारी फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
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संक्रमण का मुख्य कारण: यदि किसी व्यक्ति के पैर या शरीर पर कोई मामूली कट, घाव या खरोंच है, और वह इस दूषित पानी से होकर गुजरता है, तो लेप्टोस्पायरोसिस के बैक्टीरिया तुरंत शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
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आंकड़े डराने वाले: बीते सालों के ट्रेंड को देखें तो जुलाई के महीनों में डेंगू के मामलों में 58% और लेप्टोस्पायरोसिस के मामलों में 79% तक की भयावह बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है, जिसके चलते इस बार प्रशासन पहले से ही बेहद सतर्क है।
बीएमसी (BMC) का महाअभियान और कीटनाशक विभाग की कार्रवाई
इस मानसूनी संकट से निपटने के लिए बीएमसी के कीटनाशक विभाग ने शहरव्यापी अभियान छेड़ दिया है। मच्छरों के प्रजनन (Breeding) को रोकने के लिए नगर निगम की टीमों ने शहर के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया है। अब तक मुंबई के 30 लाख से अधिक घरों और उनके आसपास फॉगिंग (धुआं छोड़ने का काम) करवाई जा चुकी है ताकि डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों का खात्मा किया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग की सख्त गाइडलाइन: बुखार को न करें नजरअंदाज
मुंबई स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता के लिए बेहद जरूरी चिकित्सा परामर्श जारी किया है:
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तुरंत लें डॉक्टर की सलाह: जो भी लोग जलभराव वाले रास्तों या कीचड़ से होकर गुजरे हैं, उन्हें अगले 24 से 72 घंटों के भीतर डॉक्टर से संपर्क कर प्रिवेंटिव दवाइयां ले लेनी चाहिए।
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घरेलू नुस्खों से बचें: मानसून के इस मौसम में यदि आपको या परिवार में किसी को भी तेज बुखार, बदन दर्द या सिरदर्द की शिकायत होती है, तो उसे सामान्य मौसमी फ्लू समझने की भूल बिल्कुल न करें। खुद से दवाइयां (सेल्फ-मेडिकेशन) लेने या घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल या डॉक्टर से जांच करवाएं।
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