
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से इस वक्त एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जहाँ चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास बने एक अस्थायी लेबर कैंप में मंगलवार सुबह अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी भयानक थी कि इसकी ऊंची-ऊंची लपटें और काले धुएं का गुबार करीब दो किलोमीटर दूर तक साफ-साफ दिखाई दे रहा था, जिसे देखकर आसपास के इलाके में भारी अफरा-तफरी मच गई। इस बड़े हादसे के दौरान कैंप में मौजूद सैकड़ों मजदूरों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई, हालांकि इस दुर्घटना में दो मजदूरों के घायल होने की खबर सामने आई है। आग लगने की इस अचानक हुई घटना से प्रशासनिक अमले में भी हड़कंप मच गया और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। आइए इस पूरी घटना और मौके के हालात के बारे में विस्तार से जानते हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर चल रहे विकास कार्यों और निर्माण परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूरों के रहने के लिए एयरपोर्ट परिसर के बाहर एक बड़ा तीन मंजिला अस्थाई लेबर कैंप बनाया गया था। इस कैंप में लगभग 33 कमरे बने हुए थे और कुल मिलाकर करीब 500 मजदूर यहाँ अलग-अलग शिफ्टों में रहकर काम करते थे। मंगलवार की सुबह जब अधिकांश मजदूर अपनी दैनिक गतिविधियों में व्यस्त थे, तभी अचानक कैंप के एक हिस्से में आग भड़क उठी। बताया जा रहा है कि यह कैंप मुख्य रूप से पीवीसी पैनल और अन्य ज्वलनशील सामग्रियों से तैयार किया गया था, जिसके कारण आग ने महज कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते आग की लपटें इतनी तेज हो गईं कि आसमान में काले धुएं का विशाल गुबार छा गया, जिसे कई किलोमीटर दूर से आते-जाते लोगों ने भी देखा।
आग लगने की इस अचानक हुई घटना के बाद कैंप के भीतर और आसपास काम कर रहे मजदूरों के बीच चीख-पुकार मच गई। गनीमत यह रही कि आग लगने की भनक लगते ही सुरक्षाकर्मियों और सतर्क मजदूरों ने तुरंत अपनी सूझबूझ का परिचय दिया और कैंप में मौजूद करीब 500 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना शुरू कर दिया। शुरुआती जांच और चश्मदीदों के बयानों के मुताबिक, जब यह हादसा हुआ तब बैरकों के अंदर कुछ लोग खाना बनाने या अन्य कार्यों में लगे हुए थे। इस भागदौड़ और बचाव कार्य के दौरान दो मजदूरों को मामूली चोटें और झुलसने की शिकायत हुई, जिन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। यदि समय रहते सभी मजदूरों को बाहर न निकाला जाता, तो यह हादसा किसी बहुत बड़ी त्रासदी में बदल सकता था, क्योंकि प्लास्टिक और पीवीसी पैनलों के कारण आग बहुत तेजी से फैली थी।
घटना की सूचना मिलते ही एयरपोर्ट की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ (CISF), स्थानीय सरोजिनी नगर थाने की पुलिस और लखनऊ फायर डिपार्टमेंट की कई गाड़ियां तुरंत मौके पर दौड़ पड़ीं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और दमकल कर्मियों ने लगातार पानी की बौछारें करते हुए करीब 30 से 40 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। दमकल विभाग की मुस्तैदी के कारण आग को आसपास के अन्य संवेदनशील इलाकों या एयरपोर्ट के मुख्य रनवे व टर्मिनल तक फैलने से सफलतापूर्वक रोक लिया गया। आग बुझाने के बाद कूलिंग ऑपरेशन चलाया गया और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आखिर शॉर्ट सर्किट या चूल्हे की चिंगारी में से किस वजह से यह आग इतनी तेजी से फैली थी। स्थानीय प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा सकें।
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