सनातन धर्म में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का विशेष महत्व है, लेकिन इस साल इसकी तारीख को लेकर श्रद्धालुओं के बीच काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सोशल मीडिया से लेकर पंचांगों तक दो अलग-अलग तिथियों (10 जुलाई और 11 जुलाई) की चर्चा हो रही है। दरअसल, इस भ्रम का मुख्य कारण स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में सूर्योदय व तिथि गणना के अलग-अलग नियम हैं, जिसकी वजह से दोनों संप्रदायों के लिए व्रत और पारण का समय बदल गया है।
स्मार्त संप्रदाय के लिए आज है पारण का समय
स्मार्त परंपरा (गृहस्थ जीवन) का पालन करने वाले श्रद्धालुओं ने योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई को रखा था। ऐसे में इन व्रतियों के लिए आज यानी 11 जुलाई को द्वादशी तिथि में पारण करना अनिवार्य है। पंचांग के अनुसार, आज पारण का सबसे उत्तम और शुभ समय सुबह 05:21 बजे से 09:59 बजे तक है। इसके अतिरिक्त, कुछ विद्वान हरिवासर समाप्त होने के बाद दोपहर 01:24 बजे से शाम 04:09 बजे तक भी पारण करने की सलाह दे रहे हैं।
वैष्णव परंपरा वाले आज रख रहे हैं व्रत
वैष्णव संप्रदाय (साधु, संत और विष्णु भक्त) से जुड़े लोग उदयातिथि के नियमों के तहत आज यानी 11 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत रख रहे हैं। यही कारण है कि आज देश भर के प्रमुख विष्णु मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप किया जा रहा है। वैष्णव मत के श्रद्धालु आज पूरे दिन फलाहार और श्रीहरि की भक्ति में लीन रहकर कल अपना व्रत खोलेंगे।
वैष्णव एकादशी व्रत के पारण का मुहूर्त
जो श्रद्धालु आज 11 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत रख रहे हैं, वे अगले दिन यानी 12 जुलाई को द्वादशी तिथि में पारण करेंगे। वैष्णव व्रत के पारण का शुभ समय 12 जुलाई की सुबह 05:22 बजे से 08:09 बजे तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, हरिवासर की अवधि समाप्त होने के बाद ही पारण करना सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है। यदि किसी कारणवश इस समय में पारण न हो सके, तो अपने कुलगुरु की सलाह अवश्य लें।
योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
योगिनी एकादशी का व्रत साक्षात भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की असीम कृपा दिलाने वाला माना गया है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने और सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र का दान करने से जीवन के समस्त पापों का नाश होता है। मान्यता है कि इस व्रत को पूर्ण निष्ठा से करने पर व्यक्ति को समस्त मानसिक व शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है और घर में सुख, शांति तथा अटूट समृद्धि का वास होता है।
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