दिनभर की भागदौड़, लंबे समय तक खड़े रहने या टाइट जूते पहनने के कारण कभी-कभार पैरों में हल्की सूजन आना सामान्य बात है। लेकिन अगर आपके पैरों या टखनों (Ankles) में बार-बार सूजन आ रही है और आराम करने के बाद भी ठीक नहीं हो रही, तो सावधान हो जाइए। इसे सिर्फ थकान का असर समझकर नजरअंदाज करना आपके लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, पैरों की क्रॉनिक सूजन शरीर के भीतर पल रही किसी गंभीर बीमारी का अलार्म हो सकती है।
क्या है पैरों की सूजन का विज्ञान? (What is Edema)
मेडिकल की भाषा में पैरों में आने वाली इस सूजन को एडिमा (Edema) कहा जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि आपके शरीर के ऊतकों (Tissue Cells) में जरूरत से ज्यादा अतिरिक्त तरल पदार्थ (Fluid Retention) जमा हो गया है।
जब हमारा ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम या शरीर के मुख्य अंग सुचारू रूप से काम नहीं करते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के कारण यह अतिरिक्त फ्लूइड नीचे की तरफ बहकर पैरों, टखनों और पंजों में इकट्ठा होने लगता है। यह शरीर का एक रक्षात्मक तरीका है जिसके जरिए वह आपको सचेत करता है कि अंदरूनी अंगों में सब कुछ ठीक नहीं है।
इन 4 अंगों की खराबी का हो सकता है इशारा
बार-बार पैरों में फ्लूइड जमा होने के पीछे शरीर के इन महत्वपूर्ण अंगों से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं:
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हार्ट फेलियर (Heart Disease): जब दिल की पंपिंग क्षमता कमजोर हो जाती है, तो वह खून को ठीक से वापस नहीं खींच पाता, जिससे पैरों की नसों में दबाव बढ़ता है और सूजन आ जाती है।
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किडनी की बीमारी (Kidney Damage): गुर्दे का काम शरीर से अतिरिक्त पानी और टॉक्सिन्स को बाहर निकालना है। जब किडनी फिल्टर करना कम कर देती है, तो शरीर में सोडियम और पानी बढ़ने लगता है, जो पैरों में एडिमा के रूप में दिखता है।
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लिवर सिरोसिस (Liver Disease): लिवर की गंभीर बीमारी होने पर खून में एल्ब्युमिन प्रोटीन की कमी हो जाती है, जिससे तरल पदार्थ नसों से रिसकर ऊतकों में जमा होने लगता है।
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नसों की कमजोरी (DVT – Deep Vein Thrombosis): पैरों की नसों के वॉल्व कमजोर होने या नसों में खून का थक्का (Blood Clot) जमने के कारण भी एक या दोनों पैरों में अचानक भारी सूजन और दर्द हो सकता है।
कब तुरंत भागें डॉक्टर के पास?
यदि आपको पैरों में सूजन के साथ-साथ ये लक्षण भी दिखाई दें, तो बिना एक मिनट गंवाए तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट या जनरल फिजिशियन से संपर्क करें:
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सांस लेने में तकलीफ होना या लेटने पर दम घुटना।
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छाती में दर्द, भारीपन या बेचैनी महसूस होना।
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सूजन वाले हिस्से को उंगली से दबाने पर वहां गड्ढा (Pitting Edema) बन जाना और देर तक ठीक न होना।
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केवल एक पैर में अचानक तेज सूजन के साथ लालिमा और तेज दर्द होना।
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