दुनिया अभी हालिया महामारियों के जख्मों से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि एक और बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरस ने अंतरराष्ट्रीय सीमाएं लांघकर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DRC) से शुरू हुआ इबोला वायरस (Ebola Virus) का कहर अब यूरोप तक जा पहुंचा है। फ्रांस में इबोला के पहले पुष्ट मामले की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। कांगो में महज एक महीने के भीतर 1,000 से ज्यादा लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं, जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे लेकर वैश्विक स्तर पर अलर्ट जारी कर दिया है।
पेरिस उतरते ही डॉक्टर मिला इबोला पॉजिटिव, फ्लाइट के यात्रियों में दहशत
फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, देश का पहला इबोला मरीज एक डॉक्टर है जो हाल ही में कांगो से चिकित्सा सेवा देकर लौटा था। यह डॉक्टर कांगो की राजधानी किंशासा से एयर फ्रांस की एक कमर्शियल फ्लाइट के जरिए पेरिस के एयरपोर्ट पर उतरा।
फ्लाइट के दौरान ही डॉक्टर की तबीयत बिगड़ने लगी और उन्हें तेज सिरदर्द की शिकायत हुई। लैंडिंग के तुरंत बाद मुस्तैद स्वास्थ्य टीम ने उन्हें सीधे विशेष आइसोलेशन (पृथकवास) वार्ड में शिफ्ट कर दिया। राहत की बात यह है कि मरीज की हालत फिलहाल स्थिर है और उनका वायरल लोड काफी कम है। हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से एयरलाइंस ने उस फ्लाइट में सवार सभी यात्रियों की लिस्ट स्वास्थ्य अधिकारियों को सौंप दी है ताकि कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग (संपर्क में आए लोगों की पहचान) की जा सके।
युगांडा में भी पैर पसार रहा है वायरस, सीमाएं हुईं अलर्ट
कांगो के पड़ोसी देश युगांडा में भी इबोला वायरस तेजी से पैर पसार रहा है। युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि देश में अब तक इबोला के कुल 20 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से 15 संक्रमित लोग कांगो से आए शरणार्थी या प्रवासी हैं, जबकि 5 लोग स्थानीय स्तर पर संक्रमण का शिकार हुए हैं।
युगांडा में इस वायरस से अब तक 2 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 3 मरीजों का अभी भी क्रिटिकल केयर में इलाज चल रहा है। हालांकि, संतोषजनक बात यह है कि 15 मरीज इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।
अफ्रीका के इतिहास में पहली बार इतनी तेज रफ्तार, WHO हैरान
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के स्वास्थ्य आपातकाल निदेशक अब्दिरहमान महामुद ने जिनेवा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस नए प्रकोप को बेहद डरावना बताया है। कांगो में बीते 15 मई को इस महामारी की घोषणा की गई थी और महज एक महीने के भीतर वहां 1,094 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 277 लोगों की मौत हो चुकी है।
WHO के मुताबिक, पूरे अफ्रीका के इतिहास में इबोला के किसी भी प्रकोप के पहले ही महीने में इतनी बड़ी संख्या में मरीजों का मिलना बेहद असाधारण और चिंताजनक है। फिलहाल कांगो में 387 मरीज कड़ी निगरानी में इलाज करा रहे हैं, जबकि 131 नए संदिग्ध मामले सामने आए हैं।
युद्ध स्तर पर सरकारी प्रयास, कांगो और युगांडा ने मिलाया हाथ
इस अचानक आई आफत से निपटने के लिए कांगो के राष्ट्रपति फेलिक्स त्शिसिकेदी ने महामारी के मुख्य केंद्र इतुरी प्रांत का दौरा करने का फैसला किया है। कांगो सरकार ने प्रभावित इलाकों में मेडिकल बेड्स की संख्या रातों-रात 500 से ज्यादा बढ़ा दी है। राजधानी किंशासा और प्रभावित प्रांतों में टेस्टिंग क्षमता को रोजाना 30 से बढ़ाकर सीधे 2,000 टेस्ट प्रतिदिन कर दिया गया है।
इसके साथ ही, वायरस को अफ्रीका से बाहर फैलने से रोकने के लिए युगांडा और कांगो की सरकारों ने एक संयुक्त सीमा-पार अभियान (Joint Cross-Border Operation) शुरू किया है, जिसके तहत दोनों देशों की रैपिड रिस्पांस टीमें और मोबाइल लैबोरेट्रीज बॉर्डर पर तैनात होकर हर आने-जाने वाले की सघन जांच कर रही हैं।
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