बॉक्स ऑफिस पर रो पड़े दर्शक: इम्तियाज अली की ‘मैं वापस आऊंगा’ क्यों है एक मस्ट-वॉच मास्टरपीस? जानें 5 बड़ी वजहें

सिनेमाहॉल में पसरा गहरा सन्नाटा, पर्दे पर सिसकियों की आवाज और थिएटर से बाहर निकलते हुए दर्शकों की नम आंखें— मशहूर डायरेक्टर इम्तियाज अली की नई फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को देखने के बाद कुछ ऐसा ही नजारा हर तरफ देखने को मिल रहा है। ‘रॉकस्टार’ और ‘लव आजकल’ जैसी फिल्मों से प्यार के अनोखे रंगों को पर्दे पर उतारने वाले इम्तियाज अली इस बार भारत-पाकिस्तान बंटवारे (Partition of India) की पृष्ठभूमि पर एक रूहानी और बेहद दर्दनाक प्रेम कहानी लेकर आए हैं। अगर आपने अभी तक यह फिल्म नहीं देखी है, तो आपको सिनेमाहॉल का रुख क्यों करना चाहिए, आइए जानते हैं इसकी 5 सबसे बड़ी वजहें।

1. सिग्नेचर ‘इम्तियाज अली वाइब’ और दो दौर की कहानी

इस फिल्म को देखने की पहली और सबसे बड़ी वजह खुद इम्तियाज अली का खास सिनेमाई स्टाइल (Imtiaz Ali Vibe) है। अगर आपको साल 2009 में आई फिल्म ‘लव आजकल’ का नैरेटिव पसंद आया था, तो यह फिल्म आपके दिल को छू लेगी। फिल्म दो अलग-अलग टाइमलाइंस (दौर) की कहानियों को समानांतर लेकर चलती है और शुरुआत से लेकर अंत तक दर्शकों को एक गहरे भावनात्मक जुड़ाव में बांधकर रखती है। फिल्म का हर एक फ्रेम इतना कसा हुआ है कि आप पर्दे से नजरें नहीं हटा पाएंगे।

2. लाउड एक्शन के बिना बंटवारे का रूहानी दर्द

भारत-पाकिस्तान के बंटवारे पर भारतीय सिनेमा में अब तक सैकड़ों फिल्में बनी हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर लाउड डायलॉग्स, हिंसा, एक्शन और राष्ट्रवाद के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गईं। ‘मैं वापस आऊंगा’ इस मामले में बिल्कुल जुदा है। यह बिना किसी शोर-शराबे के उस मानवीय दर्द को दिखाती है, जिसने सरहद के पार अपनों को खो दिया।

कहानी है बिस्तर पर जिंदगी के आखिरी पल गिन रहे एक बुजुर्ग ईशर सिंह (नसीरुद्दीन शाह) की, जो चाहकर भी मर नहीं पा रहे हैं। उनकी रूह सिर्फ इसलिए अटकी है क्योंकि वह मौत से पहले बॉर्डर के उस पार रह गए अपने पहले प्यार से आखिरी बार मिलकर विदा (इजाजत) लेना चाहते हैं। इस दर्द को सिर्फ उनका पोता ही समझ पाता है।

3. अनोखा और रोंगटे खड़े कर देने वाला डायरेक्शन

फिल्म में इम्तियाज अली का डायरेक्शन कमाल का है। विशेष रूप से जब नसीरुद्दीन शाह के नजरिए से अतीत के फ्लैशबैक सीन्स दिखाए जाते हैं, तो दर्शकों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। दंगों और इंसानों को मारने वाले दंगाइयों को याद करते हुए ईशर सिंह के दृश्यों को बेहद अनोखे ढंग से फिल्माया गया है। इम्तियाज ने इन नफरत फैलाने वाले दंगाईयों को किसी दूसरी ही दुनिया के खौफनाक जीवों की तरह पेश किया है, जो हिंदी सिनेमा में पहली बार देखने को मिलता है।

4. वेदांग रैना और नसीरुद्दीन शाह की कड़क एक्टिंग

कहानी को दर्शकों के दिलों तक पहुंचाने का काम फिल्म के बेहतरीन कलाकारों ने किया है। ईशर सिंह के जवानी के किरदार में वेदांग रैना ने अपनी अदाकारी से सबको चौंका दिया है। वहीं, बिस्तर पर लेटे नसीरुद्दीन शाह ने सिर्फ अपनी आंखों और चेहरे के भावों से दर्शकों को रोने पर मजबूर कर दिया है। इसके अलावा शारवरी (जिया), रजत कपूर, दानिश पंडोर और मनीष चौधरी जैसे कलाकारों ने अपने सधे हुए अभिनय से फिल्म में जान फूंक दी है।

5. फिल्म के अंत में दिलजीत दोसांझ का मेगा सरप्राइज

फिल्म के क्लाइमेक्स के बाद अंत में आने वाला गाना इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) है। अक्सर पार्टी और तड़कते-भड़कते पंजाबी गानों के लिए मशहूर दिलजीत दोसांझ ने इस गाने को न सिर्फ गाया है, बल्कि इस पर बेहतरीन परफॉर्म भी किया है। यह गाना दुनिया में फैली नफरत और मोहब्बत की जंग को दिखाता है। इसे जिस तरह से फिल्माया गया है, वह सिनेमाहॉल से निकलने के बाद भी आपके जेहन से नहीं उतरेगा। इस सरप्राइज पैकेज को अनुभव करने के लिए आपको आखिरी तक सीट पर बैठना पड़ेगा।

सोशल मीडिया पर आ रही दर्शकों के रोने की वीडियोज कोई पीआर स्टंट (PR Stunt) नहीं हैं, बल्कि यह फिल्म वाकई सिनेमा का एक बेहतरीन सम्मान है जिसे बड़े पर्दे पर ही देखा जाना चाहिए।

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