नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है, और जब यह तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो इसे ‘सोमवती अमावस्या’ कहा जाता है। साल 2026 की पहली सोमवती अमावस्या ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और फल कई गुना बढ़ गया है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, जप-तप और दान करने से जातकों को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी पाप मिट जाते हैं। लेकिन इस बार अमावस्या तिथि दो दिन होने के कारण लोगों में तारीख को लेकर उलझन है। आइए जानते हैं सोमवती अमावस्या की सही डेट, शुभ मुहूर्त और धन लाभ के चमत्कारी उपाय।
14 या 15 जून: जानें किस दिन रखा जाएगा सोमवती अमावस्या का व्रत
पंचांग की गणना के अनुसार, इस बार अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि दो दिनों तक व्याप्त रहेगी, जिसके कारण दोनों दिनों का अपना अलग-अलग महत्व है:
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14 जून (रविवार): अमावस्या तिथि का प्रारंभ 14 जून को दोपहर 12:20 बजे से हो जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, पितृ तर्पण, श्राद्ध और पूर्वजों के निमित्त किए जाने वाले सभी कार्यों के लिए 14 जून का दिन ही सबसे उत्तम और फलदायी रहेगा।
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15 जून (सोमवार): अमावस्या तिथि 15 जून को सुबह 08:24 बजे समाप्त होगी। शास्त्रों में ‘उदया तिथि’ (सूर्योदय के समय की तिथि) को सर्वोपरि माना जाता है। चूंकि 15 जून के सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि मौजूद रहेगी और उस दिन सोमवार है, इसलिए सोमवती अमावस्या का मुख्य व्रत, स्नान और दान 15 जून 2026 को ही किया जाएगा।
नोट कर लें स्नान-दान का ब्रह्म मुहूर्त और अमृत काल
सोमवती अमावस्या पर शुभ फलों की प्राप्ति के लिए शुभ मुहूर्त में स्नान और दान करना बेहद कल्याणकारी माना जाता है:
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स्नान-दान का ब्रह्म मुहूर्त: 15 जून को सुबह 04:04 बजे से लेकर सुबह 04:44 बजे तक रहेगा। इस दौरान पवित्र नदी में स्नान करना या घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ होता है।
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अमृत काल मुहूर्त: इस दिन दोपहर 03:56 बजे से लेकर शाम 05:20 बजे तक अमृत काल रहेगा, जो देव पूजा और दान के लिए उत्तम है।
सोमवती अमावस्या का महत्व: मिलता है पितरों और महादेव का आशीर्वाद
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव, माता पार्वती और पितरों की विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और पीपल के वृक्ष की पूजा कर 108 बार परिक्रमा करती हैं। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इसके साथ ही, इस तिथि पर किए गए श्राद्ध और तर्पण से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों का आशीर्वाद घर के सदस्यों पर हमेशा बना रहता है।
आर्थिक तंगी दूर करने और धन लाभ के 3 अचूक उपाय
यदि आप जीवन में पैसों की तंगी का सामना कर रहे हैं या व्यापार में घाटा हो रहा है, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सोमवती अमावस्या की शाम को ये उपाय अवश्य करें:
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मां लक्ष्मी को चढ़ाएं पीली कौड़ियां: अमावस्या की शाम को माता लक्ष्मी की पूजा के समय उन्हें पीली कौड़ियां अर्पित करें। यदि पीली कौड़ी न मिले, तो सफेद कौड़ी पर हल्दी लगाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। रात भर इन्हें पूजा स्थल पर रहने दें और अगले दिन सुबह स्नान के बाद इन्हें लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें। इससे धन का आगमन बढ़ता है।
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पीपल के पेड़ के पास जलाएं दीपक: शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं और अपने पितरों का ध्यान करें। मान्यता है कि इस उपाय से आर्थिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं और कर्ज से मुक्ति मिलती है।
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मछलियों को खिलाएं आटे की गोलियां: सोमवती अमावस्या के दिन किसी साफ नदी या तालाब में जाकर मछलियों को शक्कर मिली हुई आटे की गोलियां खिलाएं। यह उपाय कुंडली के अनेक दोषों को शांत करता है और घर में बरकत लाता है।
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