एविएशन सेक्टर (Aviation Industry) से इस वक्त की एक बेहद हैरान करने वाली और अजीबोगरीब खबर सामने आ रही है। यूरोपीय देशों की प्रमुख विमानन कंपनी स्कैंडिनेवियाई एयरलाइंस (SAS) की एक फ्लाइट, जो पूरे 17 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत के लिए अपनी ऐतिहासिक शुरुआत करने वाली थी, उसे एक बड़ी तकनीकी और प्रशासनिक चूक के कारण बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा।
यह विमान करीब चार घंटे का सफर तय कर भारत की सीमा के नजदीक पहुंचने ही वाला था कि अचानक कॉकपिट क्रू को एक ऐसा संदेश मिला, जिसने यात्रियों के होश उड़ा दिए। भारत सरकार के विमानन नियामक (DGCA) की तरफ से हरी झंडी न मिलने के कारण फ्लाइट को अजरबैजान के आसमान से यू-टर्न लेना पड़ा।
अजरबैजान के ऊपर उड़ रहा था विमान, तभी कोपेनहेगन एटीसी (ATC) से आया इमरजेंसी मैसेज
पूरा मामला मंगलवार (2 जून 2026) का है। स्कैंडिनेवियाई एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या SK969 (एयरबस A330) ने डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन से भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई के लिए बेहद उत्साह के साथ उड़ान भरी थी। विमान अपनी तय गति से उड़ता हुआ जब अजरबैजान के हवाई क्षेत्र के ऊपर पहुंचा, तभी कोपेनहेगन के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) यूनिट ने कॉकपिट क्रू से तुरंत संपर्क किया और विमान को वापस मोड़ने का कड़ा निर्देश दिया।
विमानन सूत्रों के मुताबिक, उड़ान के बीच में ही पायलटों को सूचित किया गया कि भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इस विशेष उड़ान के संचालन के लिए अभी तक अपनी अंतिम लिखित मंजूरी जारी नहीं की है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, किसी भी विदेशी कमर्शियल फ्लाइट को भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने और लैंडिंग के लिए डीजीसीए की लिखित अनुमति होना अनिवार्य है। इस बड़ी प्रशासनिक चूक पर फिलहाल डीजीसीए और भारतीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने चुप्पी साध रखी है।
धरी रह गईं तैयारियां, मुंबई एयरपोर्ट पर ‘वॉटर कैनन सैल्यूट’ के लिए तैनात थी टीम
यह घटना जितनी हैरान करने वाली एयरलाइंस के लिए थी, उतनी ही निराशाजनक मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए भी रही। चूंकि यह एयरलाइंस 17 साल बाद भारत में वापसी कर रही थी, इसलिए इसके भव्य और ऐतिहासिक स्वागत के लिए एयरपोर्ट पर जोरों-शोरों से तैयारियां की गई थीं।
विमान के लैंड करते ही उसे ‘वॉटर कैनन सैल्यूट’ (फायर ब्रिगेड की गाड़ियों द्वारा पानी की बौछार से सलामी) देने के लिए एयरपोर्ट की एक विशेष टीम रनवे पर पूरी तरह से स्टैंडबाय पर थी। लेकिन जब विमान को वापस लौटने की खबर आई, तो हवाई अड्डा अधिकारियों और वहां मौजूद अतिथियों में मायूसी छा गई।
8 घंटे तक हवा में ही लटका रहा करोड़ों का विमान, यात्रियों की आफत
इस पूरी कूटनीतिक और तकनीकी लापरवाही के कारण सबसे ज्यादा परेशानी विमान में बैठे यात्रियों को उठानी पड़ी। कोपेनहेगन से मुंबई की तरफ 4 घंटे की दूरी तय करने के बाद जब विमान अजरबैजान से मुड़ा, तो उसे वापस लौटने में भी 4 घंटे का समय लगा। इस तरह यह विमान करीब 8 घंटे तक लगातार हवा में ही चक्कर काटता रहा और आखिरकार सुरक्षित रूप से वापस कोपेनहेगन एयरपोर्ट पर लैंड हुआ।
‘ओवर कॉन्फिडेंस’ में फंसी एयरलाइंस, SAS ने आधिकारिक बयान में दी सफाई
इस पूरे हाई-वोल्टेज ड्रामे पर स्कैंडिनेवियाई एयरलाइंस (SAS) ने अपना आधिकारिक बयान जारी कर सफाई दी है। एयरलाइंस ने स्वीकार किया कि भारत सरकार के अधिकारियों से जिस अंतिम और औपचारिक मंजूरी की उम्मीद थी, वह समय पर नहीं मिल पाई, जिसके कारण फ्लाइट को वापस बुलाना पड़ा।
एयरलाइंस ने बताया कि इस रूट को शुरू करने के लिए महीनों की प्लानिंग की गई थी और सभी कानूनी दस्तावेज जमा कर दिए गए थे। संबंधित अधिकारियों के साथ चल रही बातचीत के आधार पर एयरलाइंस को पूरा ‘भरोसा’ था कि जब तक विमान 4-5 घंटे की दूरी तय कर भारत की सीमा के पास पहुंचेगा, तब तक डीजीसीए से औपचारिक हरी झंडी मिल जाएगी। लेकिन एयरलाइंस का यह ‘ओवर कॉन्फिडेंस’ भारी पड़ गया और समय पर मंजूरी न मिलने के कारण करोड़ों का विमान बीच रास्ते से लौट आया।
कब शुरू होगी दोबारा उड़ान? एयरलाइंस ने जताया भरोसा
SAS एयरलाइंस ने प्रभावित यात्रियों से खेद जताते हुए कहा है कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान फंसे हुए यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाने और डीजीसीए से बची हुई औपचारिक मंजूरी को जल्द से जल्द हासिल करने पर है। एयरलाइंस को पूरी उम्मीद है कि अगले एक से दो दिनों के भीतर सभी कानूनी अड़चनें दूर कर ली जाएंगी और यह सर्विस दोबारा शुरू हो जाएगी।
आपको बता दें कि कोपेनहेगन-मुंबई रूट भारत में 17 साल बाद इस यूरोपीय एयरलाइंस की बड़ी वापसी का प्रतीक है, जो दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते एविएशन मार्केट (भारत) और स्कैंडिनेवियाई देशों के बीच व्यापारिक व पर्यटन कनेक्टिविटी को एक नई मजबूती देगा।
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