संयुक्त राष्ट्र (UN) के सबसे शक्तिशाली मंच यानी सुरक्षा परिषद (UNSC) से इस वक्त की बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हुए बेहद कड़े और दिलचस्प हाई-वोल्टेज चुनाव में एशिया-प्रशांत समूह (Asia-Pacific Group) से किर्गिस्तान ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस महाजीत के साथ ही संयुक्त राष्ट्र में भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान का खेल पूरी तरह खत्म हो चुका है और उसकी सुरक्षा परिषद से छुट्टी हो गई है। पाकिस्तान का दो साल का कार्यकाल 2026 के अंत में समाप्त हो रहा है और अब उसकी जगह किर्गिस्तान वीटो पावर वाले शक्तिशाली देशों के साथ बैठकर दुनिया के बड़े फैसले करेगा।
34 साल में पहली बार रचा इतिहास, 2 साल तक चलेगा किर्गिस्तान का ‘राज’
किर्गिस्तान का यह ऐतिहासिक कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से शुरू होकर 31 दिसंबर 2028 तक यानी पूरे दो साल के लिए चलेगा। साल 1992 में संयुक्त राष्ट्र का हिस्सा बनने के बाद, पिछले 34 वर्षों के इतिहास में यह पहला मौका है जब किर्गिस्तान को विश्व की सबसे शक्तिशाली सुरक्षा परिषद की मेज पर बैठने का गौरवशाली अवसर मिला है।
एशिया-प्रशांत सीट के लिए किर्गिस्तान और फिलीपींस के बीच अंत तक बेहद कड़ा और सांसें रोक देने वाला मुकाबला देखने को मिला। पूरे चार राउंड की गहन वोटिंग के बाद, किर्गिस्तान ने 142 वोटों का भारी-भरकम बहुमत हासिल कर फिलीपींस (49 वोट) को एकतरफा मुकाबले में धूल चटा दी।
इन 5 देशों की हुई विदाई, किर्गिस्तान समेत 5 नए देशों की एंट्री
साल 2026 के अंत में अपना 2 साल का कार्यकाल पूरा कर रहे पांच देशों की सुरक्षा परिषद से विदाई हो रही है। इनमें पाकिस्तान के साथ-साथ डेनमार्क, ग्रीस, पनामा और सोमालिया शामिल हैं।
इस चुनाव के बाद अब इन देशों को रिप्लेस करने के लिए पांच नए चेहरे सुरक्षा परिषद के मंच पर दिखाई देंगे। किर्गिस्तान के अलावा इस रेस में ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल, त्रिनिदाद और टोबैगो, तथा जिम्बाब्वे ने भी बाजी मारी है और 2027-2028 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद के नए गैर-स्थायी सदस्य के रूप में अपनी जगह पक्की कर ली है।
जर्मनी की करारी हार, यूरोपीय गुट में मच गया हड़कंप
इस चुनाव में सिर्फ पाकिस्तान को ही मायूसी नहीं हाथ लगी, बल्कि यूरोप के सबसे ताकतवर और आर्थिक रूप से समृद्ध देश जर्मनी को भी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर बहुत बड़ा और करारा झटका लगा है।
पश्चिमी यूरोपीय और अन्य देशों के समूह (WEOG) की सीट के लिए त्रिकोणीय मुकाबला था, जिसमें ऑस्ट्रिया ने 131 वोट और पुर्तगाल ने 134 वोट हासिल कर बाजी मार ली। वहीं, इस ग्रुप में सुरक्षा परिषद के सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे जर्मनी को महज 104 वोट मिले और उसे इस वैश्विक चुनाव में शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा।
जानिए क्या है UNSC का पूरा गणित और वीटो का पावर?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को दुनिया की ‘सुपर पुलिस’ भी कहा जाता है, क्योंकि इस पर अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा बनाए रखने और किसी भी देश के बीच युद्ध को रोकने की सबसे प्राथमिक व कानूनी जिम्मेदारी होती है। इसके फैसलों को मानना सभी सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी होता है।
सुरक्षा परिषद की इस खास मेज पर कुल 15 सदस्य देश बैठते हैं। इनमें से 5 स्थायी सदस्य (Permanent Members) हैं, जिनके पास वीटो पावर (Vito Power) जैसी ब्रह्मास्त्र शक्ति है— ये देश अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस हैं। वहीं, बाकी बचे 10 गैर-स्थायी सदस्यों को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा हर साल 2-2 साल के सीमित कार्यकाल के लिए चुना जाता है, ताकि दुनिया के हर कोने (भौगोलिक प्रतिनिधित्व) को इस मंच पर आवाज मिल सके।
भारत ने चुनाव नतीजों का किया दिल खोलकर स्वागत, दी बधाई
वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की विदाई और किर्गिस्तान की इस अभूतपूर्व जीत पर भारत ने बेहद सकारात्मक रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने चुनाव के तुरंत बाद किर्गिस्तान सहित सभी नवनिर्वाचित सदस्य देशों को दिल खोलकर बधाई दी।
राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने भरोसा दिलाया कि आगामी 2027-28 के कार्यकाल के दौरान भारत इन सभी देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करेगा और हर संभव सहयोग देगा। आपको बता दें कि भारत स्वयं साल 2021-22 में सुरक्षा परिषद का गैर-स्थायी सदस्य रहकर दुनिया का नेतृत्व कर चुका है और भारत ने साल 2028-29 के अगले कार्यकाल के लिए भी अपनी मजबूत उम्मीदवारी की आधिकारिक घोषणा पहले ही कर दी है।
The News 11 – ताज़ा हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया