अंतरराष्ट्रीय डेस्क: जापान के साइतामा प्रांत (Saitama Prefecture) के कावागोए शहर से एक बेहद संवेदनशील और विवादित मामला सामने आया है। यहां स्थानीय प्रशासन की कानूनी मंजूरी के बिना ही एक विशाल मस्जिद का निर्माण कर दिया गया है। इस पूरे मामले ने तब बड़ा राजनीतिक और राजनयिक (Diplomatic) तूल पकड़ लिया, जब यह बात सामने आई कि इस साल की शुरुआत में जापान में पाकिस्तान के राजदूत ने खुद जाकर इस मस्जिद का भव्य उद्घाटन किया था।
मामला जापानी मीडिया में उछलने और स्थानीय प्रशासन के कड़े तेवरों के बाद, अब टोक्यो स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने खुद को इस पूरे विवादित प्रोजेक्ट से पूरी तरह अलग कर लिया है।
ग्रीन जोन और वन भूमि पर खड़ी कर दी मस्जिद
जापान के प्रतिष्ठित अखबार ‘द असाही शिम्बुन’ (The Asahi Shimbun) की एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, यह विवादित मस्जिद लगभग 4,500 वर्ग मीटर के एक बड़े भूखंड पर बनाई गई है। जापानी सरकारी रिकॉर्ड में यह जमीन ‘पहाड़ी वन भूमि’ (Mountainous Forest Land) के रूप में वर्गीकृत (Classified) है।
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शहरीकरण नियंत्रण क्षेत्र (Urbanization Control Zone): यह पूरा इलाका एक विशेष नियंत्रण क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए स्थानीय जापानी अधिकारियों की विशेष अनुमति के बिना किसी भी प्रकार के पक्के निर्माण पर कानूनी रूप से पूर्ण प्रतिबंध होता है।
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प्रशासन का कड़ा रुख: कावागोए शहर के नगर पालिका अधिकारियों ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि इस इमारत के निर्माण के लिए सिटी प्लानिंग एक्ट (City Planning Act) के तहत कोई आवश्यक परमिट या मंजूरी नहीं ली गई थी। बिना अनुमति के किए गए इस निर्माण को जापानी कानून के तहत ‘अवैध’ घोषित किया गया है, जिसके बाद इस ढांचे को ढहाए जाने (बुलडोजर चलने) या हटाने की कानूनी संभावना काफी बढ़ गई है।
मार्च 2025 में बदली थी जमीन की ओनरशिप
जापानी सरकारी संपत्ति के आधिकारिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि विवादित मस्जिद वाली इस जमीन का मालिकाना हक मार्च 2025 में फुजिमी स्थित एक रियल एस्टेट कंपनी से बदला गया था। इसे कावागोए के ही एक पते पर रजिस्टर्ड फर्म के नाम ट्रांसफर किया गया था, जिसके बाद बिना किसी सरकारी कागजी कार्रवाई के गुपचुप तरीके से यहां मस्जिद खड़ी कर दी गई।
पाकिस्तानी राजदूत की मौजूदगी से भड़का जापान
यह मामला साधारण अवैध निर्माण से बढ़कर दो देशों के बीच का राजनयिक मुद्दा तब बन गया, जब 3 अप्रैल 2026 को जापान में पाकिस्तान के तत्कालीन राजदूत अब्दुल हमीद ने इस मस्जिद के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। जापानी सोशल मीडिया और मीडिया में राजदूत की मौजूदगी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।
इस विवाद पर जापान में रहने वाले अन्य पुराने और जिम्मेदार मुस्लिम नागरिकों ने भी नाराजगी जताई है। याशियो मस्जिद का प्रतिनिधित्व करने वाले 62 वर्षीय पाकिस्तानी मूल के जापानी नागरिक शकील शेख मोहम्मद ने इस अवैध प्रोजेक्ट की आलोचना करते हुए कहा, “अगर कुछ लोग बिना परमिशन के मस्जिद बना रहे हैं तो यह बेहद गलत बात है। आप जापानी कानून और स्थानीय लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाकर ही इस्लाम के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार कर सकते हैं, नियमों को तोड़कर नहीं।”
विवाद बढ़ने पर पाकिस्तानी दूतावास ने जारी की सफाई
जापानी मीडिया में चौतरफा थू-थू होने के बाद पाकिस्तानी दूतावास ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (X) पर बैक-टू-बैक दो बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है:
1. नागरिकों को सख्त हिदायत (2 जून 2026): दूतावास ने जापान में रह रहे अपने सभी नागरिकों और समुदाय के सदस्यों से अपील की है कि वे नमाज स्थलों या किसी भी इमारत के निर्माण के संबंध में जापानी कानूनों का शत-प्रतिशत पालन करें। स्थानीय सरकार से परमिट लिए बिना कोई भी काम शुरू न किया जाए।
2. राजदूत को धोखे में रखने का दावा (31 मई 2026): दूतावास ने स्पष्ट किया कि राजदूत अब्दुल हमीद ने उद्घाटन समारोह का निमंत्रण केवल इसलिए स्वीकार किया था क्योंकि आयोजकों ने उन्हें लिखित झूठ बोला था कि सभी आवश्यक सरकारी स्वीकृतियां ले ली गई हैं। दूतावास का ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट से कोई लेना-देना नहीं है जो स्थानीय जापानी कानूनों का उल्लंघन करता हो।
पाकिस्तानी दूतावास ने अंत में अपने नागरिकों से कहा है कि वे इस मामले की जांच कर रहे जापानी अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करें और किसी भी प्रोजेक्ट की कानूनी स्थिति के बारे में स्थानीय जापानी निवासियों को पूरी तरह पारदर्शी और सच जानकारी दें, ताकि दोनों देशों के आपसी संबंधों और नागरिकों की छवि पर कोई आंच न आए।
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