चिलचिलाती और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की शुरुआत होते ही अधिकांश लोग सीधे फ्रिज से निकालकर बर्फ जैसा ठंडा पानी पीना पसंद करते हैं। हालांकि, बड़े-बड़े स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डॉक्टर लगातार यह चेतावनी देते हैं कि फ्रिज का अत्यधिक ठंडा पानी हमारे गले, फेफड़ों और पाचन तंत्र (Digestive System) दोनों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। यही वजह है कि आज के आधुनिक दौर में भी कई घरों में मिट्टी के मटके या घड़े का पानी सबसे उत्तम, स्वास्थ्यवर्धक और प्राकृतिक विकल्प माना जाता है। मटके का पानी शरीर के तापमान को धीरे-धीरे सामान्य करता है और इसका सोंधा स्वाद ताजगी का एक अलग ही एहसास देता है। हालांकि, कई लोगों की यह आम शिकायत होती है कि उनके मटके का पानी ठीक से ठंडा नहीं हो पाता। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान पर आधारित कुछ आसान देसी जुगाड़ आपके साधारण मटके को फ्रिज से भी ज्यादा असरदार और कूलिंग मशीन बना सकते हैं।
1. सबसे पुराना और अचूक महाउपाय: मटके पर लपेटें गीला कपड़ा या बोरी
मिट्टी के घड़े के पानी को बर्फ जैसा ठंडा करने का सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध तरीका है—मटके को गीले कपड़े से ढकना। इसके लिए आप सूती (कॉटन) का कोई मोटा कपड़ा या जूट की साफ बोरी ले सकते हैं। इसे अच्छी तरह पानी में भिगोकर मटके के चारों ओर लपेट दें। विज्ञान के अनुसार, जब बाहरी गर्म हवा इस गीले कपड़े से टकराती है, तो कपड़े का पानी भाप बनकर उड़ने (Evaporation) लगता है। इस प्रक्रिया में कपड़ा मटके के भीतर की सारी गर्मी को बाहर खींच लेता है, जिससे अंदर का पानी फ्रिज की तरह ठंडा हो जाता है। यदि गर्मी बहुत ज्यादा हो, तो दिन में 2 से 3 बार कपड़े पर पानी छिड़क कर उसे गीला करते रहें।
2. सही जगह का चुनाव: हवादार कोने में रखने से बढ़ेगी ठंडक
मटके को आप घर के किस कोने में रख रहे हैं, इसका पानी के ठंडा होने पर सबसे सीधा असर पड़ता है। कई लोग अज्ञानतावश मटके को रसोई के किसी बंद और गर्म कोने में या ऐसी जगह रख देते हैं जहां सीधी धूप या गैस की गर्मी आती हो, जिससे पानी उबलने जैसा गर्म हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मटके को हमेशा ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां हवा का वेंटिलेशन या क्रॉस-कम्युनिकेशन सबसे अच्छा हो। घर की खिड़की के पास, बालकनी के ठंडे कोने में या हवादार गलियारे में घड़ा रखना सबसे उपयुक्त माना जाता है। हवा के निरंतर बहाव से मिट्टी के छिद्र ठंडे रहते हैं और पानी तेजी से ठंडा होता है।
3. नए मटके के लिए सबसे जरूरी नियम: इस्तेमाल से पहले 12 घंटे पानी में भिगोएं
यदि आपने बाजार से बिल्कुल नया मटका या सुराही खरीदी है, तो उसे लाकर तुरंत उसमें पीने का पानी भरने की भूल बिल्कुल न करें। नया मटका इस्तेमाल करने से पहले उसे कम से कम 10 से 12 घंटे के लिए किसी बड़ी बाल्टी या साफ पानी में पूरा डुबोकर छोड़ देना अत्यंत आवश्यक है। ऐसा करने से मिट्टी के भीतर मौजूद अत्यंत सूक्ष्म और बारीक छिद्र (Pores) पूरी तरह से खुल जाते हैं। यही छिद्र मटके के पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा करने का काम करते हैं। कई लोग इस जरूरी स्टेप को छोड़ देते हैं, जिसके कारण उनका नया घड़ा गर्मियों भर पानी को ठंडा नहीं कर पाता।
4. सीधे फर्श पर रखने की गलती न करें, नीचे बनाएं ‘रेत का आसन’
मटके को ठंडा रखने के लिए एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि घड़े को कभी भी सीधे पक्के फर्श या टाइल्स पर नहीं रखना चाहिए। गर्मियों में घर का फर्श भी गर्म हो जाता है और उसकी तपिश मटके के निचले हिस्से तक पहुंचकर पानी को गर्म कर देती है। इसलिए मटके को हमेशा लकड़ी के मजबूत स्टैंड, स्टूल, ईंटों के ऊंचे ढांचे या किसी विशेष स्टैंड पर ही रखें। सबसे बेहतरीन देसी जुगाड़ यह है कि एक चौड़े मिट्टी के बर्तन या परात में थोड़ी सी साफ बालू (रेत) बिछा लें, उसे पानी से अच्छी तरह गीला कर दें और फिर उसके ऊपर अपना मटका रखें। यह गीली रेत मटके के तापमान को कभी बढ़ने नहीं देगी।
मटके की सफाई और देखभाल से जुड़े कुछ कड़े नियम
मटके का पानी रोजाना बदलना और उसकी समय-समय पर उचित सफाई करना बेहद जरूरी है, क्योंकि कई दिनों तक एक ही पानी रहने से वह अपनी प्राकृतिक ठंडक और सोंधा स्वाद दोनों खो देता है। घड़े को साफ करने के लिए हमेशा हल्के गुनगुने पानी और एक मुलायम ब्रश या साफ सूती कपड़े का ही इस्तेमाल करें। भूलकर भी मटके को धोने के लिए बर्तन धोने वाले साबुन, लिक्विड जेल या किसी भी प्रकार के केमिकल डिटर्जेंट का इस्तेमाल न करें। मिट्टी इन रसायनों को सोख लेती है, जिससे पानी का स्वाद तो खराब होता ही है, साथ ही वह सेहत के लिए भी बेहद हानिकारक हो जाता है।
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