पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार का असर अब पार्टी के भीतर खुलकर सामने आने लगा है। हार के बाद से पार्टी के भीतर मची भगदड़ के बीच, वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. शांतनु सेन ने गुरुवार को टीएमसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया है।
आरजी कर मामले पर पार्टी को घेरा
पेशा से डॉक्टर शांतनु सेन ने अपने इस्तीफे में आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हुई महिला डॉक्टर की बलात्कार और हत्या की घटना तथा वहां फैले भ्रष्टाचार का तीखा जिक्र किया है। सेन उन चुनिंदा नेताओं में से थे, जिन्होंने इस घटना के बाद अस्पताल में व्याप्त अनियमितताओं को लेकर पार्टी लाइन से हटकर खुलकर आवाज उठाई थी। उनकी इस मुखरता के कारण उन्हें पहले ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में निलंबित भी किया गया था। हालांकि उन्होंने पार्टी छोड़ने का ऐलान नहीं किया है, लेकिन प्रवक्ता पद से उनका इस्तीफा पार्टी नेतृत्व के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
पार्टी में ‘अंदरूनी असंतोष’ का बढ़ता दायरा
शांतनु सेन का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व की कार्यशैली और हार के कारणों को लेकर जबरदस्त उथल-पुथल मची है। पार्टी के कई नेता सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
इस बीच, टीएमसी सांसद सुखेन्दु शेखर रॉय ने भी पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आरजी कर की घटना के बाद जनता का सड़कों पर उतरना एक साफ संदेश था, जिसे पार्टी समझने में विफल रही। रॉय ने आरोप लगाया कि पार्टी का पूरा प्रशासन इस घटना की सच्चाई जानने के बजाय उसे दबाने और छिपाने में लगा रहा, जिसका खामियाजा पार्टी को विधानसभा चुनाव में हार के रूप में भुगतना पड़ा।
ममता बनर्जी के सामने अस्तित्व का संकट?
जानकारों का मानना है कि शांतनु सेन और सुखेन्दु शेखर रॉय जैसे नेताओं के बगावती तेवर यह दर्शाते हैं कि टीएमसी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी की सरकार पर जो नैतिक दबाव बना है, उसने पार्टी की संगठनात्मक नींव को हिला दिया है।
-
प्रमुख घटनाक्रम:
-
शांतनु सेन ने राष्ट्रीय प्रवक्ता पद छोड़ा, आरजी कर मामले को हार का बड़ा कारण बताया।
-
सांसद सुखेन्दु शेखर रॉय ने प्रशासन की कार्यशैली पर खड़े किए गंभीर सवाल।
-
पार्टी के 18 दिग्गज नेताओं की नाराजगी और 20 सांसदों के पाला बदलने की चर्चा ने टीएमसी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
-
बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के लिए यह सबसे चुनौतीपूर्ण दौर माना जा रहा है, जहां उन्हें न केवल चुनावी हार से उबरना है, बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर बढ़ते विद्रोह को भी नियंत्रित करना है।
The News 11 – ताज़ा हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया