पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित सियासी भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। चुनावी शिकस्त का सामना कर रही सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर एक बहुत बड़ी बगावत की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चल रही तीव्र अटकलों के मुताबिक, टीएमसी के एक दर्जन से अधिक लोकसभा सांसद जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी दल की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन हाल ही में टीएमसी के कई पार्षदों के इस्तीफे और विधायकों की पार्टी कार्यक्रमों से बढ़ती दूरी इस संभावित टूट की कहानी खुद बयां कर रही है।
29 में से दो-तिहाई सांसदों को तोड़ने की रणनीति, नहीं लागू होगा दल-बदल कानून
‘संघवाद प्रतिदिन’ की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, टीएमसी के लगभग 12 सांसदों ने भाजपा में शामिल होने या उसे बाहर से समर्थन देने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है। सूत्रों का दावा है कि इस लिस्ट में 5 से 6 अन्य सांसदों के नाम भी शामिल हैं, जिससे यह आंकड़ा 20 तक पहुंच सकता है।
दरअसल, पर्दे के पीछे चल रही इस पूरी सियासी बिसात के केंद्र में ‘दल-बदल विरोधी कानून’ (Anti-Defection Law) है। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 29 सांसद हैं। कानूनी जानकारों और रणनीति कारों के बीच इस बात पर गंभीर चर्चा चल रही है कि दल-बदल कानून की कार्रवाई से बचने के लिए कितने सांसदों की आवश्यकता होगी। यदि टीएमसी के कुल सांसदों में से दो-तिहाई () यानी कम से कम 20 सांसद एक साथ अलग गुट बनाते हैं, तो उन पर दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता की तलवार नहीं लटकेगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि संसद के आगामी मॉनसून सत्र (Monsoon Session) तक इस महाटूट की पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बगावती लिस्ट में शामिल कई चेहरे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के बेहद करीबी माने जाते रहे हैं।
पार्टी के प्रदर्शन से गायब रहे 45 विधायक, आंतरिक कलह चरम पर
चुनावी हार के बाद टीएमसी आलाकमान ने संगठन को फिर से मजबूत करने और जनता के बीच पैठ बनाने के लिए 20 मई को एक बड़े सड़क प्रदर्शन का आयोजन किया था। पार्टी की अंदरूनी बैठक में तय हुआ था कि सभी नेता सड़कों पर उतरकर राजनीति की ओर लौटेंगे। लेकिन इस प्रदर्शन ने टीएमसी की आंतरिक गुटबाजी को सरेआम उजागर कर दिया।
पार्टी के कुल 80 विधायकों में से महज 35 विधायक ही इस महत्वपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे, जबकि 45 विधायकों ने इस कार्यक्रम से पूरी तरह दूरी बना ली। विधायकों की इस सामूहिक अनुपस्थिति से राजनीतिक गलियारों में संगठन के बिखरने की चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि, विपक्ष के नेता पद की रेस में सबसे आगे चल रहे वरिष्ठ नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने इस आंतरिक कलह की खबरों को खारिज करते हुए दावा किया कि कई विधायक अपनी संगठनात्मक जिम्मेदारियों और व्यावहारिक कारणों से नहीं आ सके।
डायमंड हार्बर में तृणमूल का सूपड़ा साफ! 8 पार्षदों ने एक साथ दिया इस्तीफा
एजेंसी वार्ता के इनपुट्स के मुताबिक, टीएमसी को सबसे बड़ा जमीनी झटका फलता क्षेत्र में भाजपा की बड़ी जीत के बाद लगा है। अभिषेक बनर्जी के प्रभाव वाले क्षेत्र डायमंड हार्बर नगर पालिका (Diamond Harbour Municipality) में सोमवार को टीएमसी के आठ पार्षदों ने अचानक अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया।
विशेष बात यह है कि इस शहरी स्थानीय निकाय में कुल 16 पार्षद थे और सभी के सभी टीएमसी के ही थे यानी विपक्ष का यहां खाता तक नहीं खुला था। अब एक साथ 8 पार्षदों द्वारा अलग-अलग व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दिए जाने के बाद नगर पालिका में टीएमसी का पूर्ण बहुमत खतरे में पड़ गया है, जिससे ममता बनर्जी के इस मजबूत गढ़ में भी पार्टी की पकड़ ढीली होती दिख रही है।
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