ढाका/नई दिल्ली: दक्षिण एशिया की भू-राजनीति (Geopolitics) में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। दशकों की खटास को पीछे छोड़ते हुए पाकिस्तान और बांग्लादेश अब रक्षा क्षेत्र में हाथ मिलाने जा रहे हैं। सोमवार को पाकिस्तान वायुसेना (PAF) का एक सात सदस्यीय उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल बांग्लादेश की राजधानी ढाका पहुंचा है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच पहले ‘एयर स्टाफ टॉक्स’ (Air Staff Talks) का आयोजन करना और रक्षा सहयोग के कई समझौतों (MoUs) पर मुहर लगाना है।
पहली बार ‘एयर स्टाफ टॉक्स’: क्या है पाकिस्तान का एजेंडा?
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी डेलिगेशन का यह दौरा महज एक औपचारिक मुलाकात नहीं है। इसके पीछे एक गहरा सैन्य एजेंडा छिपा है। बैठक के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
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पायलट ट्रेनिंग: समझौतों के तहत बांग्लादेशी वायुसेना (BAF) के पायलटों और तकनीशियनों को पाकिस्तान में ‘एडवांस्ड कॉम्बैट ट्रेनिंग’ दी जाएगी।
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तकनीकी सहयोग: दोनों देशों की वायुसेनाओं के बीच तकनीकी संबंधों को मजबूत करने और रखरखाव (Maintenance) के लिए साझा ढांचा तैयार करने पर चर्चा होगी।
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रणनीतिक वार्ता: यह पहली बार है जब दोनों देश औपचारिक रूप से वायुसेना स्तर पर इतनी बड़ी बातचीत कर रहे हैं।
JF-17 थंडर: क्या बांग्लादेश के आसमान में उड़ेगा ‘पाकिस्तानी’ विमान?
इस डेलिगेशन के दौरे में सबसे अधिक चर्चा JF-17 थंडर फाइटर जेट्स को लेकर हो रही है। इस साल की शुरुआत में बांग्लादेशी एयर चीफ मार्शल हसन महमूद खान ने इन विमानों को खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखाई थी।
JF-17 थंडर क्या है?
यह एक हल्का, सिंगल-इंजन मल्टीरोल लड़ाकू विमान है जिसे चीन और पाकिस्तान ने मिलकर विकसित किया है। यह विमान पाकिस्तानी वायुसेना की रीढ़ माना जाता है और अब पाकिस्तान इसे बांग्लादेश को निर्यात करने की फिराक में है।
भारत के लिए ‘टू-फ्रंट’ टेंशन?
बांग्लादेश और पाकिस्तान की यह बढ़ती नजदीकी नई दिल्ली के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
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बदलते कूटनीतिक समीकरण: 2024 में मोहम्मद यूनुस की सरकार के समय से ही ढाका का झुकाव इस्लामाबाद की ओर बढ़ा था। हालांकि अब तारिक रहमान की सरकार ने ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ की नीति अपनाई है, लेकिन पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता भारत की सुरक्षा घेरे के लिए एक नई चुनौती पेश कर सकता है।
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1971 की यादों से आगे: विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश का पाकिस्तान के साथ सैन्य डील करना यह दर्शाता है कि वह अब 1971 के युद्ध की ऐतिहासिक कड़वाहट को दरकिनार कर अपनी रक्षा जरूरतों के लिए नए विकल्प तलाश रहा है।
तारिक रहमान की नीति पर विशेषज्ञों की नजर
हालांकि वर्तमान सरकार ने भारत के साथ संबंधों को बेहतर करने का आश्वासन दिया है, लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों की ढाका में बढ़ती सक्रियता रक्षा विशेषज्ञों को सतर्क कर रही है। यदि JF-17 की डील फाइनल होती है, तो यह दक्षिण एशिया के सैन्य संतुलन (Military Balance) में एक बड़ा बदलाव होगा।
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