वाशिंगटन: दुनिया जिस शांति की उम्मीद कर रही थी, उस पर काले बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक ऐसा बयान दिया है जिसने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए साफ कहा कि ईरान के साथ चल रहा युद्धविराम (Ceasefire) अब ‘वेंटिलेटर’ पर है और इसके बचने की उम्मीद महज 1% रह गई है। ट्रंप की इस कड़ी चेतावनी के बाद खाड़ी देशों में एक बार फिर युद्ध के बादल गहरे हो गए हैं।
“ईरान का प्रस्ताव कचरा है”: ट्रंप का तीखा हमला
अमेरिकी राष्ट्रपति का यह गुस्सा ईरान द्वारा भेजे गए उस प्रस्ताव के बाद फूटा है, जिसे तेहरान ने शांति की दिशा में अपना कदम बताया था। ट्रंप ने कहा, “ईरान की प्रतिक्रिया मिलने के बाद मैंने उसे पूरा भी नहीं पढ़ा। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।” ट्रंप ने युद्धविराम की तुलना लाइफ सपोर्ट पर पड़े एक मरीज से करते हुए कहा कि इसकी हालत इतनी नाजुक है कि ‘डॉक्टर’ भी कह रहा है कि बचने की संभावना न के बराबर है।
8 अप्रैल को शुरू हुआ था ‘नाजुक’ समझौता
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह तनावपूर्ण युद्धविराम 8 अप्रैल 2026 को लागू हुआ था। उस समय ट्रंप ने ईरान को ‘पूरी सभ्यता’ नष्ट करने की धमकी देते हुए मेज पर आने को मजबूर किया था।
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शुरुआती अवधि: पहले यह समझौता 2 सप्ताह के लिए था।
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एकतरफा विस्तार: 21 अप्रैल को ट्रंप ने इसे खुद ही आगे बढ़ाया था।
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हॉर्मुज जलडमरूमध्य: ट्रंप की मुख्य शर्त हॉर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना था, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा है।
सीजफायर के बीच भी बरसते रहे बम और गोलियां
हैरानी की बात यह है कि कागजों पर युद्धविराम होने के बावजूद जमीन पर हिंसा थमी नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान युद्ध के मैदान से डराने वाली खबरें आईं:
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UAE पर हमला: पिछले सप्ताह ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात को निशाना बनाया।
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नौसैनिक झड़प: हॉर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका और ईरान की नौसेना के बीच सीधी गोलीबारी हुई।
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टैंकरों पर हमला: पेंटागन ने पुष्टि की है कि अमेरिकी बलों ने ईरान के दो बड़े तेल टैंकरों को निशाना बनाया है।
परमाणु कार्यक्रम पर अड़ा ईरान, ट्रंप बोले- “बिल्कुल पसंद नहीं”
रविवार को अपने प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्हें ईरान की शर्तें बिल्कुल पसंद नहीं आई हैं। दरअसल, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करे, जबकि तेहरान इसे अपनी संप्रभुता का हिस्सा बता रहा है। ट्रंप के इस रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और सख्त हो सकती है, जिससे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है।
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