नई दिल्ली: संगीत की दुनिया में कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं जो कभी नहीं मरतीं। मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार और लता मंगेशकर जैसे दिग्गजों ने अपनी गायकी से दशकों तक हमारे दिलों पर राज किया। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब इन फनकारों ने अपनी ज़िंदगी का आखिरी गाना रिकॉर्ड किया होगा, तो उनके जहन में क्या चल रहा होगा? इनमें से कुछ गाने तो उनकी मौत के महज कुछ घंटों पहले रिकॉर्ड हुए थे। आइए जानते हैं इन 5 महान सिंगर्स के आखिरी गानों की दास्तां।
1. मोहम्मद रफ़ी: ‘तू कहीं आस-पास है दोस्त’
मोहम्मद रफ़ी साहब की आवाज़ में वो कशिश थी जो पत्थर दिल को भी पिघला दे। 31 जुलाई 1980 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ। हैरान करने वाली बात यह है कि अपनी मौत से ठीक एक दिन पहले, यानी 30 जुलाई को उन्होंने फिल्म ‘आस-पास’ के लिए लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के निर्देशन में अपना आखिरी गाना रिकॉर्ड किया था। गाने के बोल थे— “तू कहीं आस-पास है दोस्त”। ऐसा लगता है मानो रफ़ी साहब इस गाने के जरिए अपने प्रशंसकों को बता रहे थे कि वे हमेशा हमारे बीच रहेंगे।
2. किशोर कुमार: ‘गुरु गुरु आ जाओ गुरु’
हरफनमौला किशोर दा ने अपनी मखमली आवाज़ से 70 और 80 के दशक को यादगार बना दिया। 13 अक्टूबर 1987 को किशोर कुमार ने दुनिया को अलविदा कहा। उनके निधन से ठीक एक दिन पहले, 12 अक्टूबर को उन्होंने फिल्म ‘वक्त की आवाज’ के लिए मिथुन चक्रवर्ती और श्रीदेवी पर फिल्माया गया गाना “गुरु गुरु आ जाओ गुरु” रिकॉर्ड किया था। आशा भोसले के साथ रिकॉर्ड किया गया यह गाना किशोर दा की ऊर्जा और मस्ती का आखिरी प्रमाण बना।
3. लता मंगेशकर: ‘सौगंध मुझे इस मिट्टी की’
‘भारत रत्न’ लता मंगेशकर ने सात दशकों तक भारतीय संगीत को संवारा। साल 2022 में उनके निधन से पूरा देश शोक में डूब गया था। उनके आखिरी रिकॉर्डेड गानों की बात करें, तो साल 2019 में उन्होंने “सौगंध मुझे इस मिट्टी की” गाना रिकॉर्ड किया था, जो राष्ट्र को समर्पित था। इसके अलावा, साल 2018 में ईशा अंबानी की शादी के अवसर पर रिकॉर्ड किया गया ‘गायत्री मंत्र’ और ‘गणेश स्तुति’ उनकी आवाज़ में रिकॉर्ड की गई आखिरी रूहानी भेंट मानी जाती है।
4. आशा भोसले: ‘द शैडोई लाइट’
सुरों की मल्लिका आशा भोसले (आशा ताई) ने अपने अंतिम समय तक संगीत का साथ नहीं छोड़ा। 12 अप्रैल 2026 को उनका निधन संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति रही। अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले ही उन्होंने लंदन के मशहूर बैंड ‘गोरिल्लाज़’ (Gorillaz) के साथ उनके एल्बम ‘पर्वत’ के लिए “द शैडोई लाइट” नाम का एक इंडो-वेस्टर्न फ्यूजन गाना रिकॉर्ड किया था। 90 की उम्र पार करने के बाद भी उनकी आवाज़ की खनक वैसी ही थी।
5. मुकेश: ‘चंचल, शीतल, निर्मल, कोमल’
‘दर्द का बादशाह’ कहे जाने वाले सिंगर मुकेश का निधन 27 अगस्त 1976 को अमेरिका में एक कॉन्सर्ट के दौरान हुआ था। राज कपूर की आवाज़ कहे जाने वाले मुकेश ने अपनी मौत से कुछ समय पहले फिल्म ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ का टाइटल ट्रैक “चंचल, शीतल, निर्मल, कोमल” रिकॉर्ड किया था। जब राज कपूर को उनकी मौत की खबर मिली, तो उन्होंने कहा था कि “आज मैंने अपनी आवाज़ खो दी है।”
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