नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। हिंदू धर्म में महादेव की उपासना के लिए मासिक शिवरात्रि का दिन अत्यंत फलदायी माना जाता है। वैसे तो साल में आने वाली महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है, लेकिन प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि भी शिव-शक्ति के मिलन का अद्भुत प्रतीक है। मई 2026 में ज्येष्ठ मास की मासिक शिवरात्रि आने वाली है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजन करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं भी दूर हो जाती हैं।
मई 2026 में कब है मासिक शिवरात्रि? जानें सटीक डेट
हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का विशेष महत्व है। साल 2026 में ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि 15 मई, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
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चतुर्दशी तिथि का आरंभ: 15 मई 2026 को सुबह 08:31 बजे से।
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चतुर्दशी तिथि का समापन: 16 मई 2026 को सुबह 05:11 बजे तक।
चूंकि शिवरात्रि की पूजा मध्य रात्रि यानी निशिता काल में की जाती है, इसलिए उदय तिथि और शास्त्रों के अनुसार 15 मई को ही यह पर्व मनाना श्रेष्ठ रहेगा।
3 शुभ योगों में होगी महादेव की आराधना
ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार की मासिक शिवरात्रि बेहद खास होने वाली है। इस दिन तीन अत्यंत शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जो भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने में सहायक सिद्ध होंगे:
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सर्वार्थ सिद्धि योग: किसी भी नए कार्य की शुरुआत और सफलता के लिए उत्तम।
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आयुष्मान योग: स्वास्थ्य लाभ और दीर्घायु प्रदान करने वाला।
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शोभन योग: सकारात्मक ऊर्जा और ऐश्वर्य में वृद्धि करने वाला।
इन दुर्लभ योगों में शिवलिंग का अभिषेक करना अनंत गुना फलदायी माना जाता है।
मासिक शिवरात्रि पूजा विधि: इस तरह करें भोलेनाथ को प्रसन्न
मासिक शिवरात्रि पर विशेष रूप से रात्रि पूजन का विधान है। यदि आप इस दिन व्रत रख रहे हैं, तो इन चरणों का पालन करें:
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संकल्प: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और भगवान शिव के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
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पंचामृत अभिषेक: शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर अर्पित करें।
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प्रिय वस्तुएं: शिव जी को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और शमी पत्र चढ़ाएं। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
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मंत्र जाप: पूरी श्रद्धा के साथ ‘ॐ नमः शिवाय’ का निरंतर जाप करें।
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जागरण और आरती: रात्रि के समय जागरण कर शिव पुराण का पाठ या कीर्तन करें और अंत में आरती कर भोग लगाएं।
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पारणा: अगले दिन स्नान-दान के पश्चात भोजन ग्रहण कर व्रत खोलें।
शिव पूजा से होने वाले लाभ
शास्त्रों के अनुसार, नियमित मासिक शिवरात्रि व्रत करने वाले जातकों के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। यह दिन आध्यात्मिक शांति, मन की एकाग्रता और आत्मिक शुद्धि के लिए सर्वोत्तम है। अविवाहित जातकों को सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है और वैवाहिक जीवन में चल रहे कलह शांत होते हैं।
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