चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद भी अभिनेता से नेता बने विजय (थालापति) की राह आसान नहीं दिख रही है। राजभवन और टीवीके (TVK) के बीच चल रहा गतिरोध अब संवैधानिक संकट की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। गुरुवार को लगातार दूसरे दिन राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर ने विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने से इनकार कर दिया। राज्यपाल का तर्क है कि विजय द्वारा पेश किया गया 113 विधायकों का आंकड़ा (108 TVK + 5 कांग्रेस) 118 के बहुमत के निशान से कम है।
राजभवन की ‘क्लास’ और विजय का ‘फ्लोर टेस्ट’ दांव
सूत्रों के अनुसार, गुरुवार सुबह जब विजय राज्यपाल से मिलने पहुंचे, तो उन्हें कई तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। राज्यपाल ने स्पष्ट रूप से पूछा कि बहुमत के बिना वे एक स्थिर सरकार कैसे चलाएंगे? इसके जवाब में विजय ने संवैधानिक परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि वे विधानसभा में ‘फ्लोर टेस्ट’ के जरिए बहुमत साबित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने मांग की कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उन्हें सरकार बनाने का पहला मौका दिया जाना चाहिए।
क्या अब कोर्ट में होगा फैसला?
राजभवन की सख्ती को देखते हुए टीवीके ने अब ‘प्लान-बी’ पर काम शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि विजय, देश के दिग्गज वकील अभिषेक मनु सिंघवी के संपर्क में हैं।
-
कानूनी विकल्प: यदि राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को मौका नहीं देते हैं, तो टीवीके सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सकती है।
-
दलील: पार्टी का तर्क होगा कि कई ऐतिहासिक फैसलों में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में राज्यपाल को सबसे बड़े दल या गठबंधन को मौका देना चाहिए।
जादुई आंकड़े की तलाश: कहाँ फंसा है पेंच?
विजय को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचने के लिए 118 का आंकड़ा चाहिए। वर्तमान में उनकी स्थिति कुछ इस प्रकार है:
-
कांग्रेस (5 सीटें): समर्थन दे दिया है, लेकिन शर्त है कि बीजेपी से कोई संबंध न हो।
-
लेफ्ट और VCK: विजय को उम्मीद है कि 4 वामपंथी और 2 वीसीके विधायक उनके साथ आएंगे।
-
PMK (4 सीटें): पीएमके फिलहाल बीजेपी गठबंधन में है, जिसे विजय अपनी वैचारिक दुश्मन मानते हैं।
अगर विजय इन सभी छोटे दलों (लेफ्ट, VCK, PMK) को साथ लाने में सफल रहते हैं, तो उनका आंकड़ा 122-123 तक पहुँच सकता है। लेकिन मुश्किल यह है कि ये दल फिलहाल अलग-अलग खेमों में बंटे हुए हैं।
रिजॉर्ट पॉलिटिक्स और राष्ट्रपति शासन का साया
तमिलनाडु में एक बार फिर ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ की वापसी हो गई है। अपने विधायकों को टूटने से बचाने के लिए विजय ने उन्हें मामल्लापुरम के एक सुरक्षित रिसॉर्ट में रखा है। दूसरी ओर, AIADMK के कुछ विधायकों के भी टूटने की खबरें हैं, जिन्हें रोकने के लिए पार्टी ने उन्हें पुडुचेरी भेज दिया है।
यदि अगले कुछ दिनों में कोई भी दल बहुमत का ठोस प्रमाण नहीं दे पाता है, तो राज्यपाल विधानसभा को निलंबित कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में तमिलनाडु को दोबारा चुनाव का सामना करना पड़ सकता है, जिससे बचने के लिए सभी दल पर्दे के पीछे से जोड़-तोड़ में जुटे हैं।
The News 11 – ताज़ा हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया